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0 भारत ने भी तुर्किये को मदद भेजी

अंकारा। तुर्किये और सीरिया में सोमवार सुबह 4 बजे आए भूकंप में मरने वालों की संख्या 5,261 हो गई है। हजारों लोग अभी भी लापता हैं। इस बीच तुर्किये के राष्ट्रपति रिसेप तैयप एर्दोआन ने 10 राज्यों में तीन महीने के लिए इमरजेंसी लगा दी है। यह इलाके भूकंप से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। एर्दोआन ने बताया कि तुर्किये में 70 देशों ने मदद भेजने का ऐलान किया है।

इधर, भारत ने भी तुर्किये को मदद भेजी है। इंडियन एयरफोर्स का C-17 विमान 2 एनडीआरएफ टीमों, डॉक्टरों और राहत सामग्री के साथ वहां पहुंच चुका है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी तुर्किये के हालात पर चिंता जाहिर की। मोदी मंगलवार को भाजपा संसदीय दल की बैठक में पहुंचे। सूत्रों के मुताबिक मोदी ने कहा कि आज तुर्किये जिस हालात से गुजर रहा है, उसे मैं समझ सकता हूं। 2001 में भुज में जब भूकंप आया था, तब मैं मुख्यमंत्री था। मुझे पता है कि रेस्क्यू ऑपरेशन में क्या दिक्कतें आती हैं।' भुज में आए भूकंप में 16 हजार से ज्यादा लोगों की जान गई थी। घायलों का आंकड़ा 68 हजार से ज्यादा था।

अब तक 243 आफ्टर शॉक्स, तुर्किये में 7 दिन का राष्ट्रीय शोक
तुर्किये और सीरिया में सोमवार सुबह 3 बड़े भूकंप आए थे। तुर्किये के वक्त के मुताबिक, पहला भूकंप सोमवार सुबह करीब चार बजे (7.8), दूसरा करीब 10 बजे (7.6) और तीसरा दोपहर 3 बजे (6.0) आया। इसके अलावा 243 आफ्टर शॉक्स भी दर्ज किए गए। इनकी तीव्रता 4 से 5 रही। तुर्किये में मंगलवार सुबह 8.53 पर फिर भूकंप आया। इसके बाद दोपहर 12.41 बजे 5.4 तीव्रता का भूकंप आया। तुर्किये में 7 दिन का राष्ट्रीय शोक है। 10 शहरों में इमरजेंसी और रेड अलर्ट जारी किया गया है। सभी स्कूल-कॉलेज एक हफ्ते बंद रहेंगे। 200 फ्लाइट्स रद्द कर दी गई हैं। 16 हजार लोग बचाव कार्य में लगे हुए हैं।

कड़ाके की ठंड से बचाव कार्य प्रभावित, तापमान माइनस में
UN ने कहा है कि बर्फबारी और बारिश के कारण भूकंप से प्रभावित दोनों ही देशों में बचाव कार्य प्रभावित हो रहा है। इमरजेंसी सर्विसेज की टीमों को रेस्क्यू में काफी दिक्कत हो रही है। तुर्किये के हताय प्रांत में एक आदमी ने रोते हुए रॉयटर्स को बताया कि इमारतों के ढेर में दबे लोग जान बचाने के लिए चीख रहे हैं। भूख, चोट और कड़ाके की ठंड से परेशान हैं।

वहीं, सीरिया में बचाव कार्यों में लगी व्हाइट हेलमेट्स की टीम के सदस्य रायद अल सालेह ने बताया कि जगह-जगह दबे लोगों को बचाने का काम वक्त के खिलाफ रेस की तरह लग रहा है।

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