0 इसमें 7 साल की सजा, 10 करोड़ तक जुर्माना
0 राज्यसभा में वंदेमातरम से जुड़ा संशोधित बिल पास
नई दिल्ली। लोकसभा में बुधवार को सत्ता-पक्ष और विपक्ष में तकरार एवं हंगामे के बीच पेपर लीक से जुड़ा 'लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 बुधवार को ध्वनि मत से पास हो गया। मानसून सत्र का आज आठवां दिन था और इस दौरान यह पहला विधेयक था जो लोकसभा में पारित हुआ है।
बिल पर मंगलवार को करीब 9 घंटे चर्चा हुई थी। बुधवार को विपक्ष की तरफ से राहुल गांधी बिल पर 50 मिनट बोले। विपक्ष के हंगामे के बीच बिल पास हुआ। इसके तहत पेपर लीक से जुड़े कानून सख्त कर दिए हैं। अब पेपर लीक से जुड़े अपराधों में अधिकतम 10 साल तक की जेल और 10 करोड़ रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
वहीं राज्यसभा में राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण संशोधन विधेयक (2026) बिल पास हो गया। अब जन-गण-मन की तरह वंदे मातरम को कानूनी संरक्षण मिलेगा। वंदे मातरम का अपमान, अनादर और गायन में बाधा डालना दंडनीय अपराध होगा।
लोकसभा में विधेयक पर दो दिन में 10 घंटे से अधिक चली चर्चा में बुधवार को विपक्ष के नेता राहुल गांधी के भाषण के दौरान उनकी ओर से इस्तेमाल एक 'असंसदीय ' शब्द और गृहमंत्री अमित शाह के विरुद्ध आरोप को लेकर दोनों पक्षों में भारी तकरार हुई और सदन की कार्यवाही दो बार स्थगित करनी पड़ी। तीन बजे कार्यवाही पुन: शुरू होने पर प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने चर्चा का जवाब दिया और उसके बाद सदन ने ध्वनिमत से विधेयक को मंजूरी प्रदान की। मंत्री के जवाब के दौरान कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के सदस्य नारेबाजी करते रहे।
श्री गांधी के भाषण के दौरान संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने गृहमंत्री के विरुद्ध श्री गांधी की टिप्पणियों पर आपत्ति उठाते हुए कहा कि ‘वह इसकी पुष्टि करें या इसके लिए माफी मांगे।’ इस बात पर सदन में शोर शराबे के बीच अध्यक्ष ओम बिरला ने कार्यवाही पहले ढाई बजे तक और फिर तीन बजे तक के लिए स्थगित कर दी।
कार्यवाही शुरू होने पर विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए श्री सिंह ने कहा कि विपक्ष के नेता ने जिस असंसदीय शब्द का इस्तेमाल किया है, क्या वह विद्यार्थियों के लिए किया गया है। उन्होंने कहा कि वह हैरान हैं कि विपक्ष के नेता को सार्वजनिक जीवन की बुनियादी प्रणाली की भी जानकारी नहीं हैं। श्री सिंह के पास कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन विभाग की भी जिम्मेदारी है और उन्होंने ही इस विधेयक को सदन में पेश किया था।
श्री सिंह ने कहा कि श्री गांधी ने कहा है कि प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलायी गयीं, और इसका आदेश गृह मंत्री ने दिया। उन्होंने कहा कि गोली चलायी ही नहीं गयी और उनके साथ बहुत ही संयमित कार्रवाई की गयी। कहीं भी प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने का आदेश मजिस्ट्रेट देता है। गोली चलाने का आदेश कभी कोई मंत्री नहीं देता। इससे स्पष्ट है कि श्री गांधी में सार्वजनिक जीवन की जानकारियों का अभाव है।
उन्होंने कहा कि श्री गांधी ने यह भी कहा कि गृह मंत्री के काफिले में 30 गाड़ियां चलती हैं, यह भी गलत तथ्य है, गृह मंत्री के काफिले में इतनी गाड़ियां नहीं चलती। गृह मंत्री के विदेश जाने की बातें की गयीं, वह स्पष्ट करते हैं कि गृह मंत्री कभी विदेश गये ही नहीं।उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता का गैर जिम्मेदारी से बात कहना, शोभा नहीं देता।
श्री सिंह ने कहा कि श्री गांधी 21 जुलाई को अचानक प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरने पर बैठ गये, उन्हें समझाने का प्रयास किया तो उन्होंने कहा कि वह नहीं हटेंगे, उन्हें हटा दिया जाये। उन्होंने कहा कि वह बड़े बेगैरत होकर प्रधानमंत्री आवास के बाहर से हटे। इसी संदर्भ में उन्होंने यह शेर पढ़ा ..... ‘बड़े बेआबरू होकर, तेरे कूचे से हम निकले.. बहुत निकले मेरे अरमां फिर भी कम निकले..।'
उन्होंने कहा कि चर्चा के दौरान कांग्रेस सदस्य गौरव गोगोई ने कहा कि आंदोलनकारियों पर जुल्म किये गये। श्री सिंह ने कहा कि असम में कांग्रेस के शासन काल में आंदोलनकारी विद्यार्थियों के खिलाफ अत्याचार किये गये थे और बड़ी संख्या में छात्र मारे गये थे। शायद उन्होंने इसी के मद्देनजर ऐसा कहा है।
श्री सिंह ने कहा कि कांग्रेस सदस्य प्रियंका गांधी वाड्रा ने 152 बार पेपर लीक होने और करोड़ों विद्यार्थीयों और उनके परिवार के सदस्यों के पीड़ित होने की बात कही। उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं पता कि श्रीमती वाड्रा को यह आंकड़ा कहां से मिला।
उन्होंने मोदी सरकार के कार्यकाल में शिक्षा सुविधाओं के विस्तार का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान की संख्या सात से बढ़कर 20 हो गयी है। सरकारी मेडिकल कालेज की संख्या 387 से बढ़कर 844 हो गयी है। मेडिकल शिक्षा के लिए सीटें बड़ी संख्या में बढ़ायी गयी हैं।
डॉ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पेपर लीक की घटना को बहुत गंभीरता से लिया है।" पेपर लीक होने की जानकारी मिलते ही केन्द्रीय जांच ब्यूरो से जांच के आदेश दिये गये। आरोपी पकड़े गये और वे जेल में हैं। यह विधेयक पेपर लीक को लेकर सरकार की गंभीरता और संवेदनशीलता को परिलक्षित करता है। इसमें आरोपियों के खिलाफ सजा और जुर्माने को बहुत बढ़ा दिया गया है।
मंत्री के जवाब के बाद सदन ने विपक्ष की नारेबाजी के बीच विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया। अध्यक्ष ने विधेयक पारित होने के बाद सदन की कार्यवाही गुरुवार को पूर्वाह्न 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।
वंदे मातरम के अपमान पर अब 3 साल तक की जेल
राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण संशोधन विधेयक (2026) बिल के तहत 1971 के मूल अधिनियम में संशोधन का प्रावधान किया गया है। नए कानून में राष्ट्रगीत के अपमान के लिए तीन साल तक की जेल या जुर्माना या दोनों के प्रावधान हैं।