Head Office

SAMVET SIKHAR BUILDING RAJBANDHA MAIDAN, RAIPUR 492001 - CHHATTISGARH

tranding

0 चीन ने किया कन्फर्म
 
नई दिल्ली। नई दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन होने जा रहा है। ब्रिक्स समिट भारत मंडपम में आयोजित किया जाएगा, क्योंकि भारत 2026 में इस समूह की अध्यक्षता कर रहा है। नई दिल्ली में यह शिखर सम्मेलन ऐसे समय हो रहा है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया संकट (खासकर होर्मुज स्ट्रेट नाकेबंदी) और ट्रंप प्रशासन की टैरिफ नीतियों के बुरे असर का सामना कर रही है। इस अहम सम्मेलन में शामिल होने वाले प्रमुख नेताओं में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन शामिल हैं। थोड़ी देर पहले ही चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ की ओर से कहा गया कि शी जिनपिंग ब्रिक्स समिट में हिस्सा लेंगे।

ब्रिक्स नेताओं का मुख्य समिट 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में होगा। मौजूदा रिपोर्ट के अनुसार रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के 11 सितंबर को और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के 12 सितंबर को पहुंचने का कार्यक्रम है। समिट का पहला दिन भारत मंडपम में शुरू होगा, जहां पीएम मोदी ब्रिक्स में शामिल होने वाले नेताओं का स्वागत करेंगे। पहले दिन आने वाले नेताओं के साथ आधिकारिक कार्यक्रम होगा। शनिवार शाम को प्रधानमंत्री मोदी की ओर से ब्रिक्स में शामिल होने वाले नेताओं के लिए एक शानदार डिनर का आयोजन किया गया है।

13 सितंबर को समिट के दूसरे दिन नेता ब्रिक्स सहयोग और वैश्विक व क्षेत्रीय मुद्दों पर अपनी चर्चा जारी रखेंगे। चर्चा में आर्थिक और वित्तीय सहयोग, व्यापार और निवेश, टेक्नोलॉजी, खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा और भारत की अध्यक्षता में प्राथमिकता वाले अन्य क्षेत्रों को शामिल किए जाने की उम्मीद है। समिट का समापन 'नई दिल्ली घोषणापत्र' के साथ होने की उम्मीद है, जिसमें दो दिवसीय बैठक के दौरान चर्चा किए गए मुद्दों पर नेताओं के रुख और प्रतिबद्धताओं को बताया जाएगा।

पीएम मोदी, शी जिनपिंग और पुतिन की मुलाकात पर सबकी नजर
इस समिट से भारत को ब्रिक्स (ब्रिक्स) के प्रमुख नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें करने का मौका भी मिलेगा। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की यात्रा को लेकर लंबे समय से कयासबाजी जारी थी लेकिन इस पर अब विराम लग गया है। इससे पहले शी जिनपिंग 2019 में भारत आए थे। शी जिनपिंग की यात्रा खास तौर पर अहम है क्योंकि भारत और चीन कई सालों के तनाव के बाद अपने द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर करने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं पुतिन की मौजूदगी से भारत-रूस संबंधों, खासकर ऊर्जा, व्यापार और रक्षा सहयोग पर भी ध्यान केंद्रित होगा। मुख्य समिट से पहले पीएम मोदी और पुतिन की अलग से मीटिंग होनी है, जिसमें द्विपक्षीय व्यापार, ऊर्जा और रक्षा सहयोग पर चर्चा होने की उम्मीद है।