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0 इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर का मैप जारी किया
0 अनुच्छेद 370 को भारत का मसला बताया था

दुबई। जी20 समिट के खत्म होने के बाद यूएई के उप प्रधानमंत्री सैफ बिन जायद अल नाहयान ने शिखर सम्मेलन का एक वीडियो शेयर किया। इसमें इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर (आईएमईसी) से जुड़ा एक मैप नजर आ रहा है। इस मैप में यूएई ने पीओके को भारत का हिस्सा दिखाया है।

इस वीडियो में अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन यूएई की तारीफ कर रहे हैं। वो कहते हैं कि यूएई नहीं होता तो शायद आज हम आईएमईसी प्रोजेक्ट के मामले में यहां तक नहीं पहुंच पाते। ये डिप्लोमैटिक कदम भारत के साथ यूएई के मजबूत रिश्ते दिखाता है। साथ ही ये भारत की क्षेत्रीय अखंडता को भी मजबूत करता है।

इससे पहले मार्च में दुबई के सबसे बड़े रियल एस्टेट डेवलपर एम्मार समूह ने श्रीनगर में एक मॉल प्रोजेक्ट की नींव रखी थी। 10 लाख स्क्वायर फीट में बन रहा ये मॉल कश्मीर से आर्टिकल 370 हटने के बाद पहला बड़ा विदेशी प्रोजेक्ट है।

भारत के खिलाफ कश्मीर पर बोलने से बचता है यूएई
यूएई उन अरब देशों में से एक है जो पाकिस्तान के नजदीकी हैं। उनकी दोस्ती का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि आर्थिक तंगी से जूझ रहे पाकिस्तान को यूएई ने भंडार बढ़ाने के लिए 1 अरब अमेरिकी डॉलर की मदद की थी। ये पहला मौका नहीं है, इससे पहले भी यूएई पाकिस्तान को कर्ज देकर मदद कर चुका है। हालांकि पाकिस्तान से अच्छे संबंध होने के बावजूद यूएई कश्मीर को लेकर भारत के खिलाफ कोई भी बयान देने से बचता है।

2019 में जब भारत ने कश्मीर को विशेषाधिकार देने वाले आर्टिकल 370 को खत्म किया था तो यूएई ने इसे भारत का आंतरिक मसला बताया था, जबकि पाकिस्तान भारत के इस एक्शन पर अरब देशों से कड़ी प्रतिक्रिया की उम्मीद कर रहा था।

भारत-पाक के बीच संबंध बेहतर करने का हिमायती है यूएई
पुलवामा में आत्मघाती आतंकी हमले और जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म करने के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच संबंध बेहद खराब हो गए थे। उस वक्त पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने कहा कि जब तक जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 बहाल नहीं किया जाएगा, तब तक भारत से कोई बातचीत नहीं होगी।

इधर, भारत ने भी कहा कि जब तक आतंकियों पर कार्रवाई नहीं की जाती, तब तक बातचीत का सवाल ही नहीं। 2 साल बाद ही 25 फरवरी 2021 को भारत-पाकिस्तान के बीच सीमा पर सीजफायर का ऐलान होता है। बताया जाता है कि दोनों देशों के बीच डीजीएमओ स्तर की वार्ता के बाद यह सहमति बनी है।

उस वक्त ब्लूमबर्ग ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया कि संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE ने सीजफायर के लिए भारत और पाकिस्तान के अधिकारियों की बातचीत के बीच गुप्त रूप से मेजबानी की थी। इस रिपोर्ट में कहा गया कि यूएई अमेरिका के बाद दूसरा देश था, जिसने सीजफायर के फैसले का स्वागत किया था।

यही नहीं इस समझौते के ऐलान के दूसरे दिन यानी 26 फरवरी को यूएई के विदेश मंत्री अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान अचानक दिल्ली के एक दिवसीय दौरे पर पहुंचे थे। रिपोर्ट में बताया गया कि यह यात्रा दोनों देशों के रिश्तों को आगे बढ़ाने के लिए थी। रिपोर्ट में बताया गया कि कैसे नवंबर 2020 में भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अबु धाबी की दो दिवसीय यात्रा के दौरान यूएई के क्राउन प्रिंस शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से मुलाकात की। इसके बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी भी इसी महीने उनसे मिले।