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0 शाह ने लोकसभा में नेहरू की चिट्ठी पढ़ी: बोले- नेहरू ने खुद शेख अब्दुल्ला से कहा था, कश्मीर मुद्दा यूएन ले जाना गलती थी
0 जम्मू-कश्मीर आरक्षण (संशोधन) बिल और जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) बिल पास

नई दिल्ली। संसद के शीतकालीन सत्र के तीसरे दिन बुधवार को लोकसभा में जम्मू-कश्मीर आरक्षण (संशोधन) बिल और जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) बिल पास हो गया। सदन में चर्चा के दौरान अमित शाह ने जवाहर लाल नेहरू को कोट किया। गृह मंत्री ने कहा कि नेहरू ने शेख अब्दुल्ला को लिखा था कि कश्मीर मुद्दा यूएन ले जाना गलती थी। शाह के बयान पर कांग्रेस समेत विपक्ष ने हंगामा किया। शाह ने कहा कि मैंने वही बात कही, जो खुद नेहरू ने अब्दुल्ला से कही थी।

शाह ने ये भी कहा कि कश्मीर में सेना जीत रही थी, तभी सीजफायर कर दिया गया। नेहरू की गलती से पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर (पीओके) बन गया। देश की जमीन का जाना नेहरू का ब्लंडर था।

गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए बुधवार को कहा कि जम्मू-कश्मीर में सत्तर वर्षों तक जिनके साथ अन्याय हुआ और जिन्हें अपमानित किया गया अब उनको सम्मान के साथ अधिकार मिलेगा।
श्री शाह ने लोकसभा में जम्मू-कश्मीर आरक्षण संशोधन विधेयक और जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन संशोधन विधेयक पर छह घंटे तक चली चर्चा का जवाब देते हुए आज कहा कि 70 वर्षों से जिन पर अन्याय हुआ, अपमानित हुए और जिनकी अनदेखी की गई उनको न्याय दिलाने का विधेयक है। किसी भी समाज में जो लोग वंचित हैं उन्हें आगे लाना चाहिए, यही भारत के संविधान की मूल भावना है। उन्हें इस तरह से आगे लाना होगा जिससे उनका सम्मान कम न हो।
उन्होंने कहा कि 80 के दशक में कश्मीरी पंडितों के साथ जब अत्याचार हुए उन्हें बेघर किया गया तो कोई मदद के लिए सामने नहीं आया। उस समय की सरकारें अगर पहले आतंकवाद को खत्म करते तो इन लोगों को प्रदेश छोड़ने की जरूरत नहीं पड़ती। जब ये लोग विस्थापित हुए तो उन्हें देश के अलग-अलग हिस्सों में जाना पड़ा। एक लाख से ज्यादा लोग अपने ही देश में विस्थापित हो गए। ऐसे विस्थापित हुए कि उनकी जड़े ही अपने क्षेत्र अपने राज्य से उखड़ गए। यह विधेयक इन लोगों को आधार देने का है।
गृह मंत्री ने कहा कि नरेन्द्र मोदी ऐसे नेता हैं, जो गरीब घर में जन्म लेकर देश के प्रधानमंत्री बने हैं, वह पिछड़ों और गरीबों का दर्द जानते हैं। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 हटाना कुछ लोगों को खटक गया है।
उन्होंने कहा,“ परिसीमन की जो सिफारिश है उसको कानूनी जामा पहनाकर आज इसे संसद के सामने रखा है। दो सीटें कश्मीर विस्थापितों के लिए आरक्षित होंगी। एक सीट पीओके के विस्थापित व्यक्तियों के लिए दी जाएगी। परिसीमन आयोग की सिफारिश के पहले जम्मू में 37 सीटें थीं जिसे अब 43 कर दी गई हैं।कश्मीर में पहले 46 सीटें थी अब 47 हुई है। पीओके की 24 सीटें हमने रिजर्व रखी है क्योंकि वो हिस्सा हमारा है। जम्मू-कश्मीर विधानसभा में पहले 107 सीटें थीं जो अब बढ़कर 114 हो गई हैं। पहले दो नामांकित सदस्य हुआ करते थे अब पांच सदस्य होंगे।

श्री शाह ने कहा कि प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के समय में जो गलतियां हुई थीं, उसका खामियाजा वर्षों तक कश्मीर को उठाना पड़ा। पहली और सबसे बड़ी गलती- जब हमारी सेना जीत रही थी, पंजाब का क्षेत्र आते ही सीजफायर कर दिया गया और पीओके का जन्म हुआ। अगर सीजफायर तीन दिन बाद होता तो आज पीओके भारत का हिस्सा होता। दूसरा- संयुक्त राष्ट्र में भारत के आंतरिक मसले को ले जाने की गलती की।

लोकसभा में अमित शाह की प्रमुख बातें
0 यह बिल उन लोगों को अधिकार दिलाने का बिल है, जिनकी अनदेखी की गई। अच्छी बात ये रही कि 6 घंटे की बहस में किसी ने भी इसका विरोध नहीं किया। बिल पर प्रतिपक्ष के कुछ लोगों ने कम आंकने का प्रयास किया। किसी ने कहा कि सिर्फ नाम बदल रहा है। मैं कहना चाहता हूं कि नाम में ही सम्मान जुड़ा है। मदद से ज्यादा सम्मान व्यक्ति को आगे बढ़ाने का काम करता है।
0 जम्मू-कश्मीर में महाराजा हरि सिंह ने विलय का निर्णय लिया था, तब से अब तक कई बदलाव हुए। वहां आतंकवाद का लंबा दौर चला। किसी ने विस्थापित लोगों की केयर नहीं की। जिनको केयर करनी थी, वो इंग्लैंड में छुट्टी मना रहे थे। अगर उस समय उनके लिए काम किया गया होता तो वे विस्थापित नहीं हुए होते। ये बिल उनको प्रतिनिधित्व देने का है।
0 1947, 1965 और 1971 में जम्मू-कश्मीर से 41 हजार 844 परिवार विस्थापित हुए। इस बिल से इन लोगों को अधिकार मिलेगा। डीलिमिटेशन की प्रक्रिया पवित्र नहीं है तो लोकतंत्र पवित्र नहीं हो सकता। डीलिमिटेशन को हमने न्यायिक डीलिमिटेशन नाम दिया है।
0 बिल में दो सीटें घाटी से विस्थापितों के लिए होंगी। 5 नॉमिनेटेड मेंबर होंगे। जम्मू-कश्मीर में अब 107 सीटों की जगह 114 सीटें होंगी।
0 परिसीमन आयोग ने पूरे जम्मू-कश्मीर का दौरा किया। पिछड़े लोगों को रोकने का काम कांग्रेस ने किया है। पिछड़ा वर्ग आयोग को 70 साल से संवैधानिक दर्जा पहले क्यों नहीं मिला। नरेंद्र मोदी सरकार ने इसे संवैधानिक दर्जा दिया।
0 विपक्ष पूछता है कि कश्मीर में क्या फर्क पड़ा। अब जम्मू-कश्मीर में दो एम्स हैं, मल्टीप्लेक्स खुले, 370 हटने के बाद 4 थिएटर बने। कश्मीर में फिल्मों की शूटिंग हो रही है। अब पथराव की घटनाएं नहीं होतीं। हमने टेरर फंडिंग रोकी।
0 जो कहते थे कि 370 हटा तो खून की नदियां बह जाएंगी, 370 हटने के बाद कंकड़ तक नहीं फेंका गया।