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रायपुर। गोवर्धन मठ पुरी पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती छत्तीसगढ़ प्रवास पर हैं। रायपुर के रावांभांठा स्थित सुदर्शन आश्रम में बुधवार को उन्होंने मीडिया से चर्चा की। निश्चलानंद ने वक्फ बोर्ड, नक्सलवाद, धर्मांतरण और छत्तीसगढ़ में नई शराब दुकान खुलने से जुड़े सवालों पर अपनी प्रतिक्रिया दी। शराब दुकान खोलने पर उन्होंने कहा कि नशा-सट्टा ना हो तो राजनेताओं की स्थिति दयनीय हो जाएगी। नक्सलवाद को लेकर उन्होंने कहा कि, पक्ष-विपक्ष के नेताओं का जितना हाथ नक्सलवाद को बढ़ाने में है। अगर वो अपना हाथ खींच ले तो नक्सलवाद की समस्या ही खत्म हो जाएगी।

वहीं, वक्फ बोर्ड को लेकर उन्होंने कहा कि, पूरी स्थिति की जानकारी के बिना कुछ बोलना उचित नहीं है। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सूझबूझ वाले हैं। कुछ सोच समझकर ही उन्होंने यह कदम उठाया होगा।

नक्सलवाद पर 1 साल इंतजार करें
स्वामी निश्चलानंद ने कहा कि, बरसों पहले ही मैंने यह कहा था कि पक्ष-विपक्ष के राजनेताओं का नक्सलवाद को जितना प्रोत्साहित करने का हाथ रहा है। अगर वह अपना हाथ खींच लेंगे तो नक्सलवाद की समस्या ही नहीं रहेगी। केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह के 31 मार्च 2026 तक देश से नक्सल खत्म करने के दावे पर उन्होंने कहा कि, आप अमित शाह को भी परख सकते हैं। एक साल की प्रतीक्षा करिए और आपसे अगर बन सके तो इसमें सहभागिता का परिचय दीजिए। चंबल के किनारे पहले डाकू हुआ करते थे आज वे नहीं है। लोग डाकू क्यों होते हैं, किस लिए वे ऐसा करते हैं। इस पर विचार किया गया। उनकी समस्या का निराकरण किया गया। कोई व्यक्ति लुटेरा क्यों बनता है। उस कारण पर विचार करना चाहिए। परिस्थिति के वशीभूत होकर कोई ऐसा करता है। उनकी समस्याओं को दूर करने क प्रकल्प होना चाहिए फिर कोई नक्सल की समस्या नहीं होगी।

नशा-सट्टा न हो तो राजनेताओं की स्थिति दयनीय हो जाएगी
छत्तीसगढ़ में 67 नई शराब दुकान खोलने और शराब दुकानों के विरोध को लेकर निश्चलानंद ने कहा कि, उन्होंने उपनिषद का एक किस्सा सुनाया। उन्होंने कहा, वहां एक राजा ने डंके की चोट पर कहा कि, उसके शासन में कोई चोर नहीं है, जुआरी नहीं है, मदिरा (शराब) का सेवन करने वाला भी कोई नहीं है। शासन इसका नाम है। ऐसा आज कोई शासक नहीं कह सकता। क्योंकि जुआ-सट्टा और मदिरा यह आमदनी का स्रोत है। इसी के आधार पर राजनेता काम करते हैं। अगर सट्टा लॉटरी और नशे की वस्तुओं की दुकान ना हो तो राजनेताओं की स्थिति दयनीय हो जाएगी। राजनेता पसंद नहीं करते की नशा मुक्त समाज हो।

हर व्यक्ति की जीविका जन्म से सुरक्षित हो
धर्मांतरण को लेकर स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने कहा कि, सनातन सिद्धांत को समझने और उसे अपनाने में जो अपने दुर्बलता हुई है। उस कारण ऐसी स्थिति बनी है। हिंदुओं को धर्म से अलग करने दिशाहीन करने का काम किया जा रहा है। तालिबान के शासन में चार क्रिश्चियन मुसलमान को क्रिश्चियन बनाने के लिए पहुंचे थे, उन्हें फांसी की सजा दे दी गई। लेकिन भारत में ही उनकी दाल क्यों गलती है। मठ मंदिर को केंद्र बनाकर शिक्षा रक्षा आज सेवा का प्रकल्प चला दें तो ऐसे में अन्य तंत्र की दाल यहां नहीं मिलेगी। शिक्षा, रक्षा अर्थ सभी के संतुलित प्रकल्प रहे बिना गर्भपात के परिवार नियोजन के जनसंख्या संतुलित रहे, हर व्यक्ति की जीविका जन्म से सुरक्षित हो, उनका जीवन सुरक्षित रहे यह सनातन सिद्धांत है। इसको समझकर अगर क्रियान्वित किया गया होता तो ऐसे में किसी भी तरह की लोगों की दाल यहां नहीं गलती।