0 चैट डिलीट मिलने पर 4 जमाती पकड़े, मुजम्मिल के कमरे पर पहुंची टीमें
फरीदाबाद। फरीदाबाद में 2900 किलोग्राम विस्फोटक मिलने के बाद, मंगलवार को पुलिस ने अल-फलाह यूनिवर्सिटी में छापा मारा। पुलिस सूत्रों के अनुसार, यहां से 13 लोगों को हिरासत में लिया गया है, जिनमें 7 डॉक्टर, 5 स्टूडेंट और एक युवती शामिल है। बताया जा रहा है कि युवती डॉ. मुजम्मिल की कार इस्तेमाल करती थी।
9 नवंबर को जम्मू-कश्मीर पुलिस ने डॉ. मुजम्मिल शकील के फतेहपुर तगा और धौज स्थित किराए के घरों से विस्फोटक सामग्री बरामद की थी। पुलिस जांच के लिए फतेहपुर तगा गांव की मस्जिदों में भी गई, क्योंकि मुजम्मिल अक्सर तगा की मस्जिद में नमाज पढ़ने आता था। यहां पुलिस ने शक के आधार पर 4 लोगों को हिरासत में लिया है, जिनके फोन से वॉट़्सएप चैट डिलीट मिली है।
दिल्ली में ब्लास्ट का आरोपी मोहम्मद उमर नबी भी इसी यूनिवर्सिटी में पढ़ाता था। वह 7 मई 2024 को यहां पढ़ाने आया था, लेकिन 30 अक्टूबर के बाद से वह पढ़ाने नहीं आया। जांच में यह भी सामने आया है कि 10 नवंबर को ब्लास्ट वाले दिन उमर यूनिवर्सिटी से ही आई20 कार लेकर निकला था। बाद में, दिल्ली में लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास इसी कार में ब्लास्ट हुआ था।
वॉट्सएप चैट डिलीट मिली, 4 जमाती पूछताछ के लिए हिरासत में लिए
पुलिस ने सर्च अभियान के दौरान 4 जमातियों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है। पहले गांव में काफी देर तक पुलिस ने इन जमातियों के दस्तावेज और बैग चेक किए। बाद में शक के आधार पर सभी जमातियों को पुलिस अपने साथ लेकर गई है। इन जमातियों में एक जम्मू कश्मीर एक तमिलनाड़ु , एक ओडीसा और एक पलवल जिले के हथीन का रहने वाला है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, जमातियों के फोन में वॉट्सऐप पर कुछ चैट डिलीट पाई गई। इसके बाद उन्हें अधिक पूछताछ के लिए अपने साथ लेकर गई है।
यूनिवर्सिटी से जुड़े 3 डॉक्टर गिरफ्तार
इस केस में पुलिस ने डॉ. आदिल अहमद राठर, डॉ. मुजम्मिल अहमद गनई उर्फ मुजम्मिल शकील और लेडी डॉक्टर शाहीन शाहिद की गिरफ्तारी की है। तीनों ही डॉक्टरों के तार फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े हैं। बताया जा रहा है कि यह यूनिवर्सिटी गल्फ फंडिंग से बनी है। घटना के बाद से यूनिवर्सिटी की ओर से कोई सार्वजनिक बयान नहीं आया है। यह भी सामने आया है कि फरीदाबाद के धौज व फतेहपुर तगा इलाके के 2 घरों से मिले विस्फोटक की पूरी साजिश 'व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल' का हिस्सा है। इसमें समाज के ऐसे चेहरों का इस्तेमाल होता है, जिन पर आमतौर पर शक नहीं किया जा सकता। जैसे इस मामले में डॉक्टर इस्तेमाल किए जा रहे थे।