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0 सभापति द्वारा स्थगन अग्राह्य होते ही नारेबाजी करते हुए गर्भगृह में पहुंचे कांग्रेस विधायक 
 
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा बजट सत्र के चौथे दिन गुरुवार को शून्यकाल में विपक्षी सदस्यों ने धान खरीदी में अव्यवस्था का मुद्दा उठाया। नेता प्रतिपक्ष ने सरकार की नीति को फेल बताते हुए विस्तार से चर्चा के लिए स्थगन प्रस्ताव दिया। सभापति द्वारा स्थगन प्रस्ताव को अग्राह्य करने पर कांग्रेस विधायक सदन में नारेबाजी करते हुए गर्भगृह में पहुंच गए और नियमानुसार सभी कांग्रेस सदस्य सदन से स्वमेव निलंबित हो गए।  

नेता-प्रतिपक्ष डॉ. चरण दास महंत ने स्थगन प्रस्ताव पर कहा कि धान खरीदी के मामले में सरकार की नीति फेल रही है। किसान परेशान होते रहे। पहले दिन से ही किसानों को चोर समझा। किसानों का पूरा धान नहीं खरीदा गया। किसानों को टोकन के नाम पर परेशान किया गया। अंग्रेजों के जमाने से भी बुरी स्थिति रही है। इस पर हमने स्थगन प्रस्ताव दिया है। इस पर विस्तार से चर्चा होनी चाहिए। 

उमेश पटेल ने कहा कि किसानों का कर्ज माफ की जाए और नहीं तो फिर से किसानों से खरीदी की जाए। वहीं स्थगन पर कांग्रेस सदस्य संगीता सिन्हा ने कहा कि किसानों को धान का समपर्ण कराने मजबूर किया गया है। बालोद जिले में किसानों का पूरा धान नहीं खरीदा गया। राघवेंद्र सिंह ने कहा कि किसानों को जांजगीर जिले में खरीदी के लिए बहुत परेशान होना पड़ा। किसान को प्रताड़ित होकर जहर पीना पड़ा। एक किसान को टॉवर पर चढ़ना पड़ गया। 
इसी तरह ब्यास कश्यप ने कहा कि जांजगीर जिले में 93 प्रतिशत किसान का ही धान खरीदा गया। किसानों को प्रताड़ित किया गया। किसानों को अपने हक के लिए लड़ना पड़ा है। उनके लिए एफआईआर हुई। द्वारिकाधीश यादव ने कहा कि धान और किसान का मुद्दा छत्तीसगढ़ के हित से जुड़ा है। किसान आज भी उम्मीद में है कि फिर से खरीदी होगी, लेकिन किसानों को परेशान करने काम किया गया। वहीं रामकुमार यादव ने कहा कि किसान को समर्पण कराने के लिए मजबूर किया गया। किसानों को डराने के लिए पुलिस को भेजा गया। कांग्रेस सदस्य बालेश्वर साहू ने कहा कि जो किसान धान नहीं बेच पाए हैं, उनकी खरीदी होनी चाहिए। किसानों का कर्ज माफी होनी चाहिए। विक्रम मंडावी ने कहा कि किसानों का यह प्रदेश है। बस्तर से लेकर सरगुजा तक किसान परेशान हैं। किसानों के हित में स्थगन पर चर्चा होनी चाहिए। 
इसी तरह भोलाराम साहू ने कहा कि धान खरीदी के नाम पर किसानों को प्रताड़ित किया गया। किसानों को डराने और धमकाने का काम किया गया। किसानों की स्थिति बहुत खराब है। लोन लेकर खेती करने वाले किसान आत्महत्या करने को मजबूर हो गए। अंबिका मरकाम ने कहा कि सिहावा क्षेत्र के किसान परेशान हुए। किसान इस बात दुःखी रहे कि उनका धान नहीं खरीदा गया। 
कुंवर सिंह निषाद ने कहा कि पूर्व विधायक को धान बेचने के लिए धरना देना पड़ा है। जनप्रतिनिधियों को, किसानों को परेशान होना पड़ा है। यशोदा वर्मा ने कहा कि मेरे विधानसभा क्षेत्र खैरागढ़ में किसानों को परेशान होना पड़ा है। किसानों का पूरा धान नहीं खरीदा गया। एक किसान ने परेशान होकर कलेक्ट्रेट के सामने आत्महत्या की कोशिश की। ओंकार साहू ने कहा कि धमतरी जिले में भी किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ा है। रकबा समर्पण से किसानों की हालत खराब हुई है। किसान कर्ज में डूबे हुए हैं। 

हर्षिता स्वामी बघेल ने कहा कि डोंगरगढ़ विधानसभा क्षेत्र में बहुत से किसान धान नहीं बेच पाए हैं। वंचित किसानों की सुध ली जानी चाहिए। वहीं अटल श्रीवास्तव ने कहा कि छत्तीसगढ़ में आज किसानों को हतोत्साहित करने का काम किया गया। किसान आज कर्जा में है। किसान को धान बेचने के लिए कई तरह से परेशान होना पड़ा है। सरकार किसानों के साथ नहीं है। 

वहीं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि सरकार की मंशा पहले स्पष्ट है कि धान और किसान पर चर्चा नहीं करानी है। छत्तीसगढ़ में आज अधिकारी राज चल रहा है। किसानों के घर में, खलिहान में जबरदस्ती प्रवेश किया गया। धान बेचने के लिए टोकन मांगने पर किसानों के घर अधिकारी भेजे गए। किसानों को चोर समझा गया। यह बेहद गम्भीर मामला है। इस पर चर्चा होनी चाहिए। श्री बघेल ने कहा कि मेरे घर पर भी अधिकारी बलात तरीके से घुसे थे। इस मामले में अगर चर्चा नहीं होती तो कम से कम सरकार की ओर से जवाब दिया जाना चाहिए।
सभी कांग्रेस सदस्यों की बात सुनने के बाद सभापति धरमलाल कौशिक ने कहा कि बजट सत्र के दौरान स्थगन पर चर्चा नहीं की जा सकती। बजट सत्र में आय-व्यय पर चर्चा होती है। इसके बाद सभापति ने विपक्ष के स्थगन को अग्राह्य कर दिया। सभापति द्वारा स्थगन अग्राह्य करते ही विपक्षी सभी कांग्रेस सदस्य सदन में की नारेबाजी करते हुए गर्भगृह में पहुंच गए और सभी स्वमेव निलंबित हो गए। सभापति ने सभी कांग्रेस सदस्यों सदन से बाहर जाने के लिए कहा। उनके जाते ही सभापति ने सभी कांग्रेस सदस्यों का निलंबन वापस ले लिया।