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0 लोकसभा की सीटें 543 से 816 की जा सकती हैं

नई दिल्ली। संसद में बजट सत्र के दूसरे सेशन की आज की कार्यवाही पूरी हुई। सरकार ने मौजूदा सत्र को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है। राज्यसभा और लोकसभा अब 13 दिन के ब्रेक के बाद 16 अप्रैल को सुबह 11 बजे फिर से बैठेंगी। 3 दिन चलने वाले इस सेशन में महिला आरक्षण कानून में संशोधन से जुड़े अहम बिल पर चर्चा की जाएगी।

दरअसल, सरकार लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने के लिए संशोधन विधेयक लाने की योजना बना रही है। वर्तमान में लोकसभा में 543 सीटें हैं। प्रस्तावित 50% की बढ़ोतरी के साथ सीटों की संख्या बढ़कर 816 हो जाएगी, जिसमें से 273 (करीब एक तिहाई) सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। सरकार का मकसद 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' में संशोधन करना है। इसके जरिए महिलाओं के लिए तय कोटे को परिसीमन प्रक्रिया से अलग करना है। 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' साल 2023 में पारित किया गया था।

महिला आरक्षण कानून संविधान के 106वें संशोधन के रूप में पास हुआ
2023 में महिला आरक्षण कानून संविधान के 106वें संशोधन के रूप में पास हुआ था। इसके तहत महिला आरक्षण नई जनगणना के बाद लागू होना है। अब सरकार का प्रस्ताव है कि नई जनगणना का इंतजार करने की बजाय 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर ही परिसीमन किया जाए। इससे प्रोसेस तय समय पर पूरी हो सकेगी और आरक्षण लागू किया जा सकेगा।

2 बिल लाए जाएंगे, एससी और एसटी कोटा होगा
सत्र के दौरान दो बिल लाए जाएंगे। एक बिल के जरिए नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन होगा, जबकि दूसरा परिसीमन कानून में बदलाव से जुड़ा होगा। इसे पास कराने के लिए संसद में दो-तिहाई बहुमत जरूरी होगा। इसी वजह से सरकार विपक्ष का समर्थन जुटाने में लगी है। प्रस्ताव के मुताबिक 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। आरक्षण का ढांचा ऐसा होगा, जिसमें एससी और एसटी वर्ग की महिलाओं को उनके कोटे के भीतर हिस्सा मिलेगा। ओबीसी महिलाओं के लिए अलग से प्रावधान फिलहाल शामिल नहीं है। इसी फॉर्मूले पर राज्यों की विधानसभाओं में भी सीटें बढ़ाने और महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने की योजना है, ताकि पूरे देश में एक जैसा ढांचा रहे।

कांग्रेस से चर्चा बाकी
गृहमंत्री अमित शाह ने पिछले दिनों इसके लिए कई नेताओं से बैठकें की। इनमें वाईएसआर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, एनसीपी (एसपी), आरजेडी और एआईएमआईएम के नेता शामिल रहे। बीजेडी और शिवसेना (यूबीटी) से भी बातचीत हुई।

महिला आरक्षण बिल कानून नहीं बना
महिला आरक्षण कानून 2023 में संविधान के 106वें संशोधन के रूप में पास हुआ था। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू इसकी मंजूरी दे चुकी हैं। लोकसभा में यह बिल लगभग सर्वसम्मति से और राज्यसभा में सर्वसम्मति से पास हुआ था। हालांकि, यह कानून अभी लागू नहीं हुआ है। इसकी लागू होने की तारीख केंद्र सरकार अधिसूचना के जरिए तय करेगी और जरूरत पड़ने पर संसद इसमें संशोधन कर सकती है।