सियोल/नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और दक्षिण कोरिया के पूर्व सैनिक मामलों के मंत्री क्वोन ओह-यूल ने गुरुवार को सियोल स्थित इमजिंगाक पार्क में भारतीय युद्ध स्मारक का संयुक्त रूप से उद्घाटन किया। श्री सिंह दो दिन की दक्षिण कोरिया की यात्रा पर हैं।
रक्षा मंत्रालय ने बताया कि कोरियाई युद्ध की 75वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित स्मृति कार्यक्रमों के अंतर्गत निर्मित यह स्मारक भारतीय सेना की 60 पैरा फील्ड एम्बुलेंस और कस्टोडियन फोर्स ऑफ इंडिया द्वारा युद्ध के दौरान प्रदर्शित साहस, बलिदान और मानवीय सेवा को समर्पित है।
दोनों मंत्रियों ने स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित किया और उन वीर भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि दी, जिनकी सेवा को कोरिया की जनता आज भी बहुत सम्मान और कृतज्ञता के साथ याद करती है। रक्षा मंत्री ने कोरियाई प्रायद्वीप में शांति और मानवीय सहायता के लिए भारत के योगदान की स्थायी विरासत का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों का साझा इतिहास और बलिदान भारत-कोरिया गणराज्य विशेष सामरिक साझेदारी की मजबूत नींव बने हुए हैं।
श्री सिंह ने कहा कि भारतीय सैनिकों की भूमिका का स्मरण लोगों के बीच आपसी समझ को सुदृढ़ करता है और दोनों देशों के ऐतिहासिक संबंधों की ओर नए सिरे से ध्यान आकर्षित करता है। भारत की ओर से उन्होंने कोरिया सरकार, विशेष रूप से पूर्व सैनिक मामलों के मंत्रालय, द्वारा स्मारक की स्थापना में दिए गए सहयोग और समर्थन के लिए सराहना व्यक्त की।कोरिया पूर्व सैनिक मामलों के मंत्री ने कोरियाई युद्ध के दौरान भारत की भूमिका की प्रशंसा की। उन्होंने भारतीय सैनिकों के बलिदान और मानवीय सेवा से स्थापित स्थायी मित्रता संबंधों को स्वीकार किया।
दोनों मंत्रियों द्वारा एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए, जिसका उद्देश्य कोरियाई युद्ध के पूर्व सैनिकों का सम्मान करना और उनके बीच आदान-प्रदान को सुदृढ़ करना है। सैनिकों के निस्वार्थ बलिदान की स्मृति में एक संस्मरण भी जारी किया गया।
लेफ्टिनेंट कर्नल (डॉ.) ए. जी. रंगराज, महावीर चक्र के नेतृत्व में कार्यरत 60 पैरा फील्ड एम्बुलेंस ने अत्यंत कठिन और गोलाबारी की परिस्थितियों में हजारों घायल सैनिकों और नागरिकों का उपचार कर अपनी उत्कृष्ट चिकित्सीय सेवा और समर्पण के लिए व्यापक पहचान प्राप्त की। उनकी अद्वितीय बहादुरी और मानवीय दृष्टिकोण के कारण कोरिया के घायल सैनिकों और नागरिकों ने उन्हें 'मरून एंजेल्स' की उपाधि दी।