0 9 वेंटिलेटर पर, मरने वालों में सभी महिलाएं
चैन्नई। तमिलनाडु के तिरुवल्लूर जिले में रविवार को एक सीफूड एक्सपोर्ट फैक्ट्री में अमोनिया गैस का रिसाव हो गया। घटना में दो महिलाओं की मौत हो गई, जबकि 64 श्रमिक प्रभावित हुए। प्रभावितों में 60 महिलाएं और चार पुरुष शामिल हैं। हालांकि, इससे पहले न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट में 7 महिला कर्मचारियों की मौत कही गई थी। मरीजों में 9 महिलाएं वेंटिलेटर पर हैं।
प्रभावित 64 श्रमिकों में से 15 को सरकारी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। वहीं 47 कर्मचारी निजी अस्पतालों में भर्ती हैं, जिनमें 24 अन्य श्रमिक निजी अस्पतालों में भर्ती होकर निगरानी में हैं। गैस रिसाव की घटना सेंट पीटर्स पॉल सीफूड्स एक्सपोर्ट्स यूनिट में हुई।
मृतकों के परिजनों को दो लाख का मुआवजा
तमिलनाडु सरकार की ओर से मृतकों के परिजनों को 2 लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की गई है। साथ ही अस्पतालों में भर्ती कर्मचारियों के इलाज की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है।
9 मरीजों को चैन्नई रेफर किया गया
जिला कलेक्टर एस. कविता ने बताया कि 46 मरीजों को वेल्स हॉस्पिटल और 21 मरीजों को वेंकटेश्वरा हॉस्पिटल में एडमिट करवाया गया है। इनमें से नौ गंभीर मरीजों को बेहतर उपचार के लिए एम्बुलेंस के जरिए चेन्नई के सरकारी स्टेनली मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेजा गया है। हादसे का शिकार हुई अधिकांश कर्मचारी 24 से 25 वर्ष की युवा महिलाएं हैं। उन्होंने कहा कि मरीजों की नाड़ी और रक्तचाप की निगरानी की जा रही है। हालांकि कई मरीजों का ब्लड प्रेशर कम है, लेकिन उनकी कम उम्र को देखते हुए उनके स्वस्थ होने की उम्मीद जताई जा रही है।
सीएम विजय ने 24 घंटे में अंतरिम रिपोर्ट मांगी
मामले की जांच के लिए मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने तीन सदस्यीय समिति गठित करने के आदेश दिए हैं। समिति में औद्योगिक सुरक्षा एवं स्वास्थ्य निदेशक, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव और लोक स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त निदेशक को शामिल किया गया है। सरकार ने समिति को 24 घंटे के भीतर अंतरिम रिपोर्ट और तीन दिनों के भीतर अंतिम रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। जांच में गैस रिसाव के कारणों, सुरक्षा मानकों के पालन और संभावित लापरवाही की पड़ताल की जाएगी। मुख्यमंत्री ने राज्य के आईटी मंत्री, जो तिरुवल्लूर जिले के निगरानी मंत्री भी हैं, तथा निगरानी अधिकारी केपी कार्तिकेयन (आईएएस) को तुरंत जिले में पहुंचने के निर्देश दिए हैं। उन्हें जिला कलेक्टर और स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय कर प्रभावित लोगों को सर्वोत्तम चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने को कहा गया है।