0 मलबे से 2 साल के मासूम का शव निकाला
जम्मू-श्रीनगर/कोहिमा/देहरादून। जम्मू-कश्मीर के पुंछ और किश्तवाड़ में शनिवार रात बादल फट गए। बाढ़-लैंडस्लाइड में अब तक 11 लोगों की मौत हो गई है। पुंछ के सुरनकोट में लैंडस्लाइड से एक मकान मलबे में दब गया। उस वक्त घर में 8 लोग थे। इनमें 2 साल के बच्चे समेत 5 लोगों के शव बरामद किए गए। इधर, नगालैंड के मोन इलाके में हुई लैंडस्लाइड के बाद एनडीआरएफ की टीमों ने मलबे से 8 शव निकाल लिए हैं, जबकि कुछ और लोगों के दबे होने की आशंका है।
जम्मू-कश्मीर पुलिस ने पुंछ में एडवाइजरी जारी की
जम्मू-कश्मीर के पुंछ में भारी बारिश के बाद आई बाढ़ को देखते हुए पुलिस ने एडवाइजरी जारी की है। लोगों से नदियों और नालों से दूर रहने, बिना जरूरी काम के घर से बाहर न निकलने और बेहद जरूरी न हो तो सड़कों पर गाड़ी न चलाने की अपील की गई है।
जम्मू-कश्मीर: सलाल बांध के कई गेट खोले गए
जम्मू-कश्मीर में भारी बारिश से चिनाब नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण रियासी जिले के सलाल बांध के कई स्पिलवे गेट खोल दिए गए हैं। जलाशय के जलस्तर को नियंत्रित करने और जलविद्युत परियोजना के सुरक्षित संचालन को सुनिश्चित करने के लिए पानी को नियंत्रित तरीके से छोड़ा जा रहा है। अधिकारी स्थिति पर कड़ी नजर रख रहे हैं और जनता से सतर्क रहने और आधिकारिक सलाह का पालन करने की अपील की है।
अमरनाथ यात्रा रुकने से कई श्रद्धालु रास्ते में फंसे
जम्मू-कश्मीर में खराब मौसम के कारण अमरनाथ यात्रा अस्थायी रूप से रोक दी गई है। इसके चलते कई श्रद्धालु रास्ते में फंस गए हैं और विभिन्न मार्गों पर वाहनों की लंबी कतारें लग गई हैं। यात्रा स्थगित होने के बाद जम्मू-कश्मीर के कई इलाकों में ट्रैफिक जाम की स्थिति बन गई। बड़ी संख्या में श्रद्धालु आगे बढ़ने का इंतजार कर रहे हैं, जबकि प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए है। खराब मौसम के चलते एहतियात के तौर पर यात्रा रोकी गई है। फिलहाल यात्रा दोबारा कब शुरू होगी, इसकी जानकारी नहीं दी गई है।
जम्मू-कश्मीर के पहाड़ी इलाकों में बादल ज्यादा फटते हैं
जम्मू-कश्मीर में बादल फटने की सबसे बड़ी वजह हिमालय की ऊंची पर्वत श्रृंखलाएं हैं। अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से आने वाली नमी भरी हवाएं इन पहाड़ों से टकराकर ऊपर उठती हैं। ऊपर जाते ही हवा ठंडी हो जाती है और उसमें मौजूद नमी तेजी से बादलों में जमा होने लगती है। इसके अलावा, संकरी घाटियां और ऊंची चोटियां बादलों को एक जगह रोक देती हैं। इससे कम क्षेत्र में बहुत ज्यादा नमी इकट्ठी हो जाती है। जब बादल इतना पानी संभाल नहीं पाते, तो अचानक बेहद तेज बारिश होती है। यही वजह है कि डोडा, किश्तवाड़, रामबन, पुंछ, राजौरी, सोनमर्ग और कश्मीर घाटी के ऊंचे इलाकों में बादल फटने की घटनाएं मैदानी क्षेत्रों की तुलना में ज्यादा होती हैं।
अरुणाचल में बाढ़ से डेढ़ लाख प्रभावित, केदारनाथ रूट पर लैंडस्लाइड
अरुणाचल में बाढ़ और भूस्खलन के इस दौर में अब तक सात लोगों की मौत हो चुकी है, 29 लोग घायल हुए हैं और 1,49,257 लोग प्रभावित हुए हैं। मानसून की मार से कुल 26 जिले, 328 सर्कल और 576 गांव प्रभावित हुए हैं।
इधर, पिथौरागढ़ में, कैलाश-मानसरोवर यात्रा का चौथा जत्था, जिसमें 50 तीर्थयात्री शामिल हैं धारचूला बेस कैंप में रोक दिया गया है। बेस कैंप के इंचार्ज धन सिंह बिष्ट ने बताया कि गरबाधार में भूस्खलन के कारण गुंजी जाने वाला रास्ता बंद हो गया है।
किश्तवाड़ के सुर्नू इलाके में बादल फटने से लोगों के घरों और खेतों को नुकसान पहुंचा। राजौरी में भी भारी बारिश के बाद धारहाल नदी का जलस्तर बढ़ गया। करीब 200 से 250 गाड़ियां बह गईं। उत्तराखंड में शनिवार को लैंडस्लाइड के बाद केदारनाथ यात्रा के रूट पर घोड़े- खच्चरों की सेवाएं रोक दी गईं और कैलाश-मानसरोवर यात्रियों का एक जत्था भी रुक गया।
उत्तराखंड में बिजली गिरने से 2 की मौत, भूस्खलन से 84 सड़कें बंद
उत्तराखंड में लगातार हो रही भारी बारिश के बीच हरिद्वार जिले में बिजली गिरने से दो लोगों की मौत हो गई। राज्यभर में भूस्खलन के कारण 84 सड़कें बंद हो गई हैं, जिनमें दो राष्ट्रीय राजमार्ग भी शामिल हैं। मौसम विभाग ने कई जिलों के लिए रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक राज्य के कई हिस्सों में भारी बारिश की चेतावनी दी है। 20 जुलाई के लिए देहरादून, हरिद्वार और टिहरी जिलों में रेड अलर्ट जारी किया गया है, जबकि नैनीताल, उत्तरकाशी और पौड़ी में ऑरेंज अलर्ट घोषित किया गया है।