0 भारतीय विदेश मंत्री ने चीन के विदेश मंत्री वांग यी के साथ द्विपक्षीय वार्ता की
नई दिल्ली। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता को दोनों देशों के बीच सामान्य संबंधों की पहली शर्त करार देते हुए कहा है कि इस पर ध्यान दिये जाने तथा संबंधित तंत्रों को इस दिशा में कार्य करने के लिए प्रोत्साहित किये जाने की जरूरत है।
श्री जयशंकर ने बुधवार को क्वाड और आसियान देशों की बैठकों से इतर चीन के विदेश मंत्री वांग यी के साथ द्विपक्षीय वार्ता की। विदेश मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच कजान और तियानजिन की मुलाकातों का उल्लेख करते हुए कहा कि इनके बाद से भारत और चीन के बीच संबंध धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं। भारत और चीन के बीच स्थिर और परस्पर सहयोग पर आधारित संबंधों को बहु- ध्रुवीय एशिया और बहु-ध्रुवीय दुनिया के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए उन्होंने कहा, "हमारा मानना है कि आपसी सम्मान, आपसी हित और आपसी संवेदनशीलता के आधार पर ही स्थिर और सहयोगात्मक संबंध विकसित किया जा सकता है। ऐसा संबंध बहु-ध्रुवीय एशिया और बहु-ध्रुवीय दुनिया में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।"
सीमा पर शांति और स्थिरता को सामान्य संबंधों के लिए बेहद जरूरत बताते हुए श्री जयशंकर ने कहा , "सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता सामान्य संबंधों के लिए पहली शर्त है। अक्टूबर 2024 से, दोनों पक्षों ने इस महत्वपूर्ण उद्देश्य को सुनिश्चित करने के लिए काम किया है। इसके लिए हमें लगातार ध्यान देने की आवश्यकता होगी। इस क्षेत्र में संबंधित तंत्रों को पूरा समर्थन और मजबूत प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए।"
उन्होंने कहा कि दो बड़े और महत्वपूर्ण पड़ोसी देशों के नाते, भारत और चीन के अपने-अपने विशिष्ट हित हैं इसीलिए शीर्ष नेताओं ने सहमति व्यक्त की थी कि मतभेदों को विवाद नहीं बनने देना चाहिए। उन्हें ठीक से संभालना कूटनीति की जिम्मेदारी है।
विदेश मंत्री ने संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में सीधी उड़ानों की बहाली, वीज़ा व्यवस्था को अद्यतन करने, कैलाश मानसरोवर यात्रा को फिर से शुरू करने और सीमा व्यापार को पुनः आरंभ करने जैसे कदमों का स्वागत किया।
श्री जयशंकर ने कहा कि दोनों देशों को अपने संबंधों के कुछ महत्वपूर्ण पहलूओं पर ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में निष्पक्ष बाजार पहुंच और व्यापार संतुलन प्रमुख हैं। आपूर्ति श्रृंखला की विश्वसनीयता के बारे में भी चिंताएं हैं। इसके अलावा आधिकारिक और आम लोगों के बीच आदान-प्रदान को सुविधाजनक बनाने पर ध्यान दिये जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि साथ ही दोनों देशों को ' अपनी आपसी प्राथमिकताओं के अनुसार विभिन्न तंत्रों और मंचों की बैठकों पर भी सहमत होने की आवश्यकता है।
उन्होंने मौजूदा वैश्विक स्थिति को जटिल बताते हुए कहा कि भारत इस वर्ष ब्रिक्स के अध्यक्ष के तौर चीन के भारत को समर्थन की सराहना करता है।