0 यह उन्हें मिला 36वां अंतरराष्ट्रीय सम्मान
0 दोनों देशों के बीच यूरेनियम सप्लाई पर बातचीत
ताशकंद। उज्बेकिस्तान के दौरे पर गए पीएम मोदी को रविवार को राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव ने अपने देश के सर्वोच्च राज्य सम्मान 'ओली दाराजली दोस्तलिक' से सम्मानित किया। यह उज़्बेकिस्तान का विदेशी नेताओं के लिए सर्वोच्च सम्मान है।
उज्बेक भाषा के इस शब्द का मतलब है- उच्च स्तरीय मित्रता। यह पीएम मोदी को मिला 36वां अंतरराष्ट्रीय सम्मान है। रविवार रात पीएम उज्बेकिस्तान से रवाना होकर किर्गिस्तान पहुंच चुके हैं।
इस सम्मान को स्वीकार करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने इसे भारत की 1.4 बिलियन जनता को समर्पित किया और कहा कि यह दोनों देशों और सभ्यताओं के बीच अटूट मित्रता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति मिर्ज़ियोयेव द्वारा उनके लिए कहे गए प्रशंसा के शब्द भारत और उज़्बेकिस्तान की सदियों पुरानी मित्रता और उनकी साझा विरासत को श्रद्धांजलि हैं। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि यह सम्मान भारत पर उज़्बेकिस्तान के साथ वैश्विक दक्षिण साझेदार के रूप में मानवता की भलाई के लिए मिलकर काम करने की अतिरिक्त जिम्मेदारी निभाने पर बल देता है।
“ओली दाराजली दोस्तलिक” सम्मान का प्रदान किया जाना भारत-उज़्बेकिस्तान के बीच गहरे सभ्यतागत सम्बंधों और लगातार मजबूत हो रही व्यापक रणनीतिक साझेदारी को दर्शाता है।
मोदी ने शास्त्री स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की
प्रधानमंत्री ने रविवार को ताशकंद में शास्त्री स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की। इस वर्ष ताशकंद में 1965 में पूर्व प्रधानमंत्री के निधन की 60वीं बरसी है। यह स्मारक श्री लाल बहादुर शास्त्री के नाम पर रखी गई सड़क पर स्थित है। ताशकंद में पूर्व प्रधानमंत्री के जीवन और उनकी विरासत को बेहद सम्मान के साथ याद किया जाता है। इस स्मारक तथा सड़क के अलावा, ताशकंद में एक स्थानीय विद्यालय और भारतीय सांस्कृतिक केन्द्र का नाम भी उनके नाम पर रखा गया है। शास्त्री स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद, प्रधानमंत्री ने ताशकंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ ओरिएंटल स्टडीज का दौरा किया। इस विश्वविद्यालय में, उज्बेकिस्तान के प्रधानमंत्री और रेक्टर ने प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत किया। प्रधानमंत्री मोदी ने इस विश्वविद्यालय के महात्मा गांधी केन्द्र में शैक्षणिक गतिविधियों में शामिल इंडोलॉजिस्ट और विद्वानों से बातचीत की। हिंदी भाषा और अन्य भारतीय विषयों को पढ़ाने के मामले में इस विश्वविद्यालय का रिकॉर्ड बेहद शानदार रहा है। अपनी राजकीय यात्रा के दौरान, प्रधानमंत्री ने उज्बेक विद्यार्थियों के लिए हिंदी भाषा हेतु ‘लाल बहादुर शास्त्री छात्रवृति’ की घोषणा की। इस वर्ष इस विश्वविद्यालय में हिंदी पढ़ाने के 80 वर्ष पूरे हो रहे हैं। दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक समानता को देखते हुए, उज्बेक विद्यार्थियों में हिंदी सीखने के प्रति काफी ललक है। उज्बेक और हिंदी भाषाओं में 3000 से अधिक शब्द समान हैं।