ताशकंद। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि भारत और उज्बेकिस्तान ने अपनी रणनीतिक भागीदारी को समग्र रणनीतिक साझेदारी का दर्जा देते हुए अगले पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को एक अरब डॉलर तक पहुंचाने का निर्णय लिया है।
उज्बेकिस्तान की दो दिन की यात्रा पर गये श्री मोदी ने रविवार को राजधानी ताशकंद में राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव के साथ द्विपक्षीय वार्ता के बाद संयुक्त् प्रेस वक्तव्य में यह घोषणा की। उन्होंने कहा कि यह उज़्बेकिस्तान की चौथी यात्रा है जिससे संबंधों की निकटता, करीबी समन्वय और गहरी मित्रता का पता चलता है।
राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के साथ पिछले दशक में हुई अनेक मुलाकातों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी सकारात्मक और दूरदर्शी सोच, और निरंतर सीखते रहने की भावना वाकई बहुत ही प्रेरणादायक है। भारत के प्रति उनकी गहरी मित्रता और अटूट प्रतिबद्धता के लिए मैं उनका हार्दिक अभिनंदन करता हूं।
श्री मोदी ने कहा कि जहां उज्बेकिस्तान मध्य एशिया के केन्द्र में है वहीं भारत के लिए भी वह इस क्षेत्र का केन्द्र बिन्दु है। भारत और उज़्बेकिस्तान की सोच और आकांक्षाओं में गहरी समानता है। " यांगी उज्बेकिस्तान " और "विकसित भारत 2047", दोनों के केंद्र में युवा, नवाचार, समावेशी विकास और अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी है। इस साझा विजन पर चलते हुए हम दोनों देशों के लोगों की भलाई के लिए काम कर रहे हैं।"
प्रधानमंत्री ने कहा कि इस वर्ष हमारी रणनीतिक साझेदारी के 15 वर्ष पूरे हो रहे हैं। इस विशेष अवसर पर हमने संबंधों को समग्र रणनीतिक साझेदारी का दर्जा देने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा ," आज हमने हमारी साझेदारी के इस नए स्वरूप में तेज़ गति और ठोस परिणामों के साथ आगे बढ़ने का महत्वाकांक्षी एजेन्डा तैयार किया है। हमारा द्विपक्षीय व्यापार एक अरब डॉलर पार कर चुका है। अब हमने 2030 तक पांच अरब डॉलर व्यापार का लक्ष्य रखा है। इसके लिए हम बाजार पहुंच, संपर्क, बैंकिंग और भुगतान से जुड़े विषयों पर व्यवस्थागत रूप से आगे बढ़ेंगे।
प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनों देश बुनियादी ढांचे के विकास , डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर , एआई, महत्वपूर्ण खनिज, स्वच्छ ऊर्जा , अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा में सहयोग हमारे संबंधों को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप बना रहे है।
उन्होंने कहा कि दोनों देश कृषि और स्वास्थ्य में एक दूसरे की खाद्य सुरक्षा में योगदान देंगे। चिकित्सकीय जड़ी बूटियों और आयुर्वेद के क्षेत्र में हुए समझौते से हमारे साझा प्रयासों को बल मिलेगा।
श्री मोदी ने कहा कि यह साझेदारी केवल दो राजधानियों तक सीमित न रहे। इसलिए हम अपने शहरों और राज्यों के बीच साझेदारी करने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच करीबी रक्षा और सुरक्षा सहयोग गहरे आपसी विश्वास को दर्शाता है। आने वाले समय में हम दोनों देशों के रक्षा उद्योगों के बीच सीधे संपर्क , सह उत्पादन और सह विकास को बढ़ावा देंगे।
प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि हमारा मानना है कि आतंकवाद, उग्रवाद और अलगाववाद पूरे क्षेत्र के लिए गंभीर चुनौती हैं। इनके विरुद्ध 'जीरो टॉलरेंस' हमारा साझा संकल्प रहा है, और आगे भी रहेगा।
उन्होंने कहा कि दोनों देशों के संबंधों की सबसे गहरी जड़ें हमारी साझा विरासत में हैं और आज इन्हें और मज़बूत बनाने पर विशेष बल दिया गया है। उन्होंने कहा ," उज़्बेकिस्तान के बौद्ध विरासत स्थलों के संरक्षण के लिए हम मिलकर काम करेंगे। दोनों देशों के युवाओं, विशेषकर छात्र और पेशेवरों के बीच आदान-प्रदान को बढ़ावा देना हमारी उच्च प्राथमिकता है। दोनों देशों के बीच पर्यटन बढ़ाने के लिए आज सहयोग पर सहमति बनी है। मुझे खुशी है कि उज़्बेकिस्तान में हिन्दी भाषा को बढावा देने के लिए आज हम छात्रवृति की घोषणा करने जा रहे हैं।
उन्होंने दोनों देशों के बीच खेलों के क्षेत्र में बढ़ते सहयोग का भी विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आज की चर्चा ने हमारे संबंधों के भविष्य की एक स्पष्ट दिशा तय की है। उन्होंने कहा ,"भारत- उज्बेकिस्तान के बीच मजबूत साझेदारी से मध्य एशिया में शांति, प्रगति और समृद्धि को बल मिलेगा।"
प्रधानमंत्री ने दो दिन बाद उज़्बेकिस्तान की स्वतंत्रता की 35वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में भारत की ओर से बधाई तथा शुभकामनाएं भी दी।