0 10,783 करोड़ से 5 राज्यों में 656 किमी नई रेल लाइनें बिछेंगी
0 14 जिलों से गुजरेंगी, 56 लाख लोगों को फायदा
0 छत्तीसगढ़ में ट्रेनों की रफ्तार-कनेक्टिविटी बढ़ेगी
नई दिल्ली/रायपुर। रेल मंत्रालय ने छत्तीसगढ़ समेत 5 राज्यों के लिए बड़ा मल्टीट्रैकिंग प्रोजेक्ट मंजूर किया है। केंद्र सरकार की आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमेटी ने बुधवार को रेलवे की 3 परियोजनाओं को मंजूरी दी। इन पर 10,783 करोड़ रुपए खर्च होंगे। करीब 656 किमी रेल नेटवर्क बढ़ाया जाएगा और काम 2029-30 तक पूरा करने का लक्ष्य है।
इन परियोजनाओं का असर 14 जिलों पर पड़ेगा। इनमें छत्तीसगढ़ के बिलासपुर, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही क्षेत्र से जुड़े महत्वपूर्ण रेल रूट भी शामिल हैं। नई लाइनें बनने से इस पूरे रूट पर ट्रेनों की आवाजाही के लिए ज्यादा जगह मिलेगी और मालगाड़ियों का दबाव कम करने में मदद मिलेगी।
इस प्रोजेक्ट की जानकारी के देते हुए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि इन प्रोजेक्ट्स के तहत पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के 14 जिलों में करीब 656 किमी रेल लाइनें बढ़ाई जाएंगी। इससे करीब 4,790 गांवों के 56 लाख लोगों को बेहतर रेल कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है।
खड़गपुर-झारसुगुड़ा रेल सेक्शन के बीच चौथी लाइन का निर्माण शामिल है। इसके अलावा कटनी-पेंड्रा रोड सेक्शन में भी चौथी लाइन बनाई जाएगी। वहीं, बिलासपुर (उसलापुर)-पेंड्रा रोड सेक्शन में तीसरी लाइन का निर्माण किया जाएगा।
सबसे बड़ा फायदा बिलासपुर-उस्लापुर से पेंड्रा रोड रूट को
छत्तीसगढ़ में इस प्रोजेक्ट का सबसे बड़ा फायदा बिलासपुर-उस्लापुर से पेंड्रा रोड और आगे कटनी की तरफ जाने वाले रेल रूट को मिलेगा। यहां ट्रैक की क्षमता बढ़ने से यात्री ट्रेनों और मालगाड़ियों के संचालन को बेहतर तरीके से मैनेज किया जा सकेगा। इसका फायदा आगे चलकर ट्रेनों की संख्या बढ़ाने, समय पर संचालन और नए रूट पर ट्रेन चलाने की क्षमता के रूप में मिल सकता है।
14 जिलों के 4,790 गांवों को फायदा
तीनों प्रोजेक्ट पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के 14 जिलों को कवर करेंगे। इससे करीब 4,790 गांवों की लगभग 56 लाख आबादी को बेहतर रेल कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है।
27 मिलियन टन ज्यादा माल हर साल
रेलवे के मुताबिक इन परियोजनाओं से माल ढुलाई की क्षमता में करीब 27 मिलियन टन प्रति साल की बढ़ोतरी होगी। कोयला, सीमेंट, लौह अयस्क और स्टील जैसी चीजों की ढुलाई में इसका बड़ा फायदा मिलेगा।
12 करोड़ लीटर तेल और 62 करोड़ किलो कार्बन की बचत
रेल से माल ढुलाई बढ़ने पर सड़क परिवहन पर दबाव कम होगा। रेलवे के अनुमान के मुताबिक परियोजनाओं से करीब 12 करोड़ लीटर तेल की बचत होगी। वहीं करीब 62 करोड़ किलो कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन कम होगा। रेलवे ने इसे करीब 2.48 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर बताया है।
2029-30 तक पूरा करने का लक्ष्य
इन सभी परियोजनाओं को पीएम गति शक्ति नेशनल मास्टर प्लान के तहत तैयार किया गया है। इसका मकसद सड़क, रेल और दूसरे परिवहन माध्यमों की कनेक्टिविटी को बेहतर करना है। सरकार का लक्ष्य इन परियोजनाओं को 2029-30 तक पूरा करना है।