नई दिल्ली। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान ने शुक्रवार को यहां कहा कि किसी देश के व्यापार, ऊर्जा, बुनियादी ढाँचे या वित्तीय प्रणालियों पर सैन्य या राजनीतिक दबाव का प्रभाव उसकी सीमाओं से कहीं आगे तक जा सकता है और इससे क्षेत्रीय तथा वैश्विक स्थिरता प्रभावित हो सकती है।
श्री पेज़ेशकियान ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के सिलसिलें में भारत आये हुए हैं और उन्होंने शाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय मुकात से पहले यहां ब्रिक्स ब्रिजनस फोरम को संबोधित किया। वहां श्री मोदी और रूस के राष्ट्रपति ब्लादीमीर पुतिन भी उपस्थित थे। उनका यह बयान ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर उसके खिलाफ अमेरिका की सैन्य और व्यापारिक कार्रवाई (आर्थिक प्रतिबंध) के संदर्भों में देखा जा रहा है। ईरान के राष्ट्रपति ने इस पृष्ठभूमि में ब्रिक्स से ऐसी सशक्त और दृढ आर्थिक क्षमताएँ विकसित करने का आह्वान किया, जो किसी भी देश को वित्तीय साधनों या प्रौद्योगिकी पर एकाधिकार स्थापित करके किसी अन्य सदस्य देश के वैध व्यापार को बाधित करने से रोक सकें।
श्री पेज़ेशकियान ने कहा कि यह दौर वैश्विक अर्थव्यवस्था के सबसे जटिल दौर में से एक है। इस दौर की विशेषता यह है कि इसमें भू-राजनीतिक अनिश्चितता है, आपूर्ति शृंखला में व्यवधान है और राजनीतिक दबाव बनाने के लिए आर्थिक प्रतिबंधों का बड़े आधार पर प्रयोग किया जा रहा है। फरवरी 2026 में संघर्ष शुरू होने के बाद पेज़ेशकियान की यह पहली भारत यात्रा है। संघर्ष के प्रभाव का सीधे उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि ईरान वर्षों से व्यापक प्रतिबंधों का सामना कर रहा है, लेकिन हाल में यह दबाव एक "कहीं अधिक खतरनाक चरण" में प्रवेश कर गया है।
उन्होंने अमेरिका और इजरायल को ईरान के खिलाफ आक्रामक बताते हुए कहा, "इस आक्रामकता ने मानवीय और भौतिक क्षति पहुँचाने के साथ-साथ एक बार फिर एक महत्वपूर्ण वास्तविकता को उजागर किया है कि आर्थिक सुरक्षा को राष्ट्रीय और क्षेत्रीय सुरक्षा से अलग नहीं किया जा सकता।" उन्होंने कहा कि ब्रिक्स को अपनी आर्थिक क्षमता तक सीमित रहने के बजाय सहयोग को ठोस व्यापार, निवेश और वित्तपोषण तंत्रों में बदलने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा, "हमारा मानना है कि ब्रिक्स की वास्तविक ताकत केवल उसके सदस्य देशों की अर्थव्यवस्थाओं के आकार तक सीमित नहीं है। बल्कि यह तब अधिक स्पष्ट होती है, जब इन क्षमताओं को व्यापार, निवेश और संयुक्त वित्तपोषण के एक नेटवर्क में परिवर्तित किया जाता है।" उन्होंने व्यापारिक साझेदारों, वित्तपोषण के स्रोतों और भुगतान माध्यमों में विविधता लाने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि प्रतिबंधों के साथ ईरान के अनुभव ने अधिक आर्थिक लचीलेपन की आवश्यकता को स्पष्ट किया है। ईरान के राष्ट्रपति ने ब्रिक्स देशों के बीच होने वाले व्यापार में राष्ट्रीय मुद्राओं के अधिक इस्तेमाल की भी वकालत की और कहा कि ब्रिक्स के न्यू डेवलपमेंट बैंक (एनडीबी) को ब्रिक्स देशों में बुनियादी ढाँचे और ऊर्जा परियोजनाओं के वित्तपोषण का प्रमुख माध्यम बनाया जाना चाहिए। श्री पेज़ेशकियान ने 10 अरब अमेरिकी डॉलर की प्रारंभिक पूंजी के साथ ब्रिक्स की एक साझा पुनर्बीमा कंपनी स्थापित करने का प्रस्ताव रखा।
उन्होंने कहा कि अपनी भौगोलिक स्थिति और विशाल ऊर्जा भंडारों के कारण ईरान ब्रिक्स की ऊर्जा, खाद्य और परिवहन आपूर्ति शृंखलाओं में एक रणनीतिक साझेदार बनने के लिए तैयार है।