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0 चीन और रूस ने अपना समर्थन दोहराया
नई दिल्ली। ब्रिक्स देशों ने संयुक्त राष्ट्र और उसकी सुरक्षा परिषद में भारत और ब्राजील की बड़ी भूमिका का समर्थन किया है। भारत और ब्राजील लंबे समय से सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता की दावेदारी कर रहे हैं। चीन और रूस ने सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों के रूप में भारत और ब्राजील की इस आकांक्षा के लिए अपना समर्थन दोहराया है। शनिवार को यहां भारत की मेजबानी और अध्यक्षता में आयोजित दो दिन के ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में अपनाये गए दिल्ली घोषणा पत्र में कहा गया है कि ब्रिक्स देशों ने संयुक्त राष्ट्र में व्यापक सुधार की जरूरत है। 

घोषणापत्र में कहा गया कि वैश्विक संस्थाओं में विकासशील देशों की भागीदारी बढ़नी चाहिए और ग्लोबल साउथ की आवाज को ज्यादा मजबूत बनाया जाना चाहिए। ब्रिक्स ने साफ किया कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार जरूरी है, ताकि यह ज्यादा लोकतांत्रिक, प्रतिनिधित्व वाला, प्रभावी और मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों के मुताबिक बन सके। घोषणापत्र में ब्रिक्स देशों ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार से ग्लोबल साउथ की आवाज और मजबूत होगी। समूह ने विकासशील देशों को वैश्विक फैसलों में ज्यादा भागीदारी देने की मांग की। खास तौर पर अफ्रीका, एशिया, लैटिन अमेरिका और कैरेबियन के देशों को वैश्विक संस्थाओं में ज्यादा और सार्थक प्रतिनिधित्व देने की बात कही गई है। ब्रिक्स घोषणापत्र में एक ऐसी अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की वकालत की गई, जो ज्यादा न्यायपूर्ण, समान, प्रभावी, प्रतिनिधित्व वाली और जवाबदेह हो। ब्रिक्स ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों को बनाए रखने पर भी जोर दिया। हम एक अधिक न्यायपूर्ण, समान, चुस्त, प्रभावी, कुशल, उत्तरदायी, प्रतिनिधि, वैध, लोकतांत्रिक और जवाबदेह अंतरराष्ट्रीय और बहुपक्षीय प्रणाली को बढ़ावा देकर वैश्विक शासन में सुधार और उसे बेहतर बनाने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हैं। 

वरिष्ठ पदों पर विकासशील देशों की भागीदारी बढ़े
ब्रिक्स ने संयुक्त राष्ट्र सचिवालय और दूसरे अंतरराष्ट्रीय संगठनों में भी विकासशील देशों का प्रतिनिधित्व बढ़ाने की मांग की। घोषणापत्र के मुताबिक वरिष्ठ और फैसले लेने वाले पदों पर किसी एक देश या कुछ देशों के नागरिकों का दबदबा नहीं होना चाहिए। इन पदों पर चयन की प्रक्रिया पारदर्शी और सभी को साथ लेकर चलने वाली होनी चाहिए। 

महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की भी मांग
घोषणापत्र में अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के नेतृत्व और बड़े पदों पर महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। ब्रिक्स ने कहा कि अब तक संयुक्त राष्ट्र महासचिव के पद पर कोई महिला नहीं चुनी गई है। समूह ने खास तौर पर उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं से आने वाली महिलाओं को ज्यादा अवसर देने की बात कही। 

अफ्रीकी देशों की मांग को भी मिला समर्थन
यूएनएससी सुधारों के मुद्दे पर ब्रिक्स ने अफ्रीकी देशों की लंबे समय से चली आ रही मांगों को भी स्वीकार किया। घोषणापत्र में एजुलविनी सहमति और सिरते घोषणापत्र में दर्ज अफ्रीकी देशों की आकांक्षाओं का जिक्र किया गया है। इसका मकसद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अफ्रीका समेत विकासशील क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व बढ़ाना है।

आईएमएफ और वर्ल्ड बैंक में भी सुधार चाहता है ब्रिक्स
दिल्ली घोषणापत्र में केवल संयुक्त राष्ट्र ही नहीं, बल्कि वैश्विक आर्थिक संस्थाओं में भी सुधार की मांग की गई। ब्रिक्स ने कहा कि आईएमएफ और वर्ल्ड बैंक जैसे ब्रेटन वुड्स संस्थानों की व्यवस्था में भी उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं की बढ़ती ताकत दिखाई देनी चाहिए। समूह ने इन संस्थानों के नेतृत्व में विकासशील देशों की ज्यादा भागीदारी और क्षेत्रीय विविधता बढ़ाने पर जोर दिया। 

डब्ल्यूटीओ सुधार और विवाद निपटान व्यवस्था बहाल करने की मांग
ब्रिक्स ने विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ ) में भी सुधार का समर्थन किया। समूह ने ऐसी वैश्विक व्यापार व्यवस्था की मांग की जो खुली, निष्पक्ष, पारदर्शी और नियमों पर आधारित हो। घोषणापत्र में डब्ल्यूटीओ की दो-स्तरीय विवाद निपटान व्यवस्था को जल्द पूरी तरह बहाल करने और नए अपीलीय निकाय सदस्यों की नियुक्ति की मांग की गई।