0 ब्रिक्स समिट में पीएम मोदी ने जताई चिंता
नई दिल्ली। ब्रिक्स सम्मेलन 2026 के दूसरे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने टेक्नोलॉजी और क्रिटिकल मिनरल्स को लेकर अहम बात कही। रविवार को ‘रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी’ सत्र में बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा कि टेक्नोलॉजी और जरूरी खनिजों का हथियार की तरह इस्तेमाल दुनिया की साझा तरक्की में रुकावट डाल सकता है। उन्होंने ब्रिक्स देशों के बीच टेक्नोलॉजी की पहुंच बढ़ाने के साथ-साथ सप्लाई चेन को मजबूत और भरोसेमंद बनाने पर जोर दिया। मोदी ने चीन के सामने क्रिटिकल मिनरल्स और टेक्नोलॉजी के हथियारीकरण पर चिंता जताई।
पीएम मोदी ने कहा कि टेक्नोलॉजी और क्रिटिकल मिनरल्स का हथियारीकरण दुनिया की साझा प्रगति को प्रभावित कर सकता है। इसलिए टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल और उसे अपनाने का तरीका ऐसा होना चाहिए, जिसमें सभी देशों की भागीदारी हो और किसी को इससे बाहर न रखा जाए।
पीएम मोदी की यह बात ऐसे समय आई है, जब चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी ब्रिक्स सम्मेलन में मौजूद हैं। चीन का रेयर अर्थ उद्योग में बड़ा दबदबा है। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी यानी आईईए के आंकड़ों के मुताबिक, 2024 में दुनिया में खनन से निकलने वाले मैग्नेट रेयर अर्थ्स के कुल उत्पादन में चीन की हिस्सेदारी करीब 60 फीसदी थी। वहीं, रेयर अर्थ्स से बने सामान यानी रिफाइंड आउटपुट में चीन की हिस्सेदारी 91 फीसदी रही। इसके अलावा सिंटर्ड परमानेंट मैग्नेट के दुनियाभर के उत्पादन में चीन की हिस्सेदारी करीब 94 फीसदी थी।
दुनिया में बढ़ते तनाव के बीच मजबूत तैयारी पर जोर
पीएम मोदी ने कहा कि दुनिया में तनाव लगातार बढ़ रहा है और इसका आम लोगों की जिंदगी पर बड़ा असर पड़ रहा है। उनके मुताबिक, महामारी, जलवायु से जुड़ी आपदाओं और सप्लाई चेन में आई रुकावटों ने दिखा दिया है कि आज की एक-दूसरे से जुड़ी दुनिया में किसी एक हिस्से में आया संकट सिर्फ वहीं तक सीमित नहीं रहता। इसी को देखते हुए भारत ने ब्रिक्स के भीतर किसी भी संकट से निपटने की तैयारी मजबूत करने पर खास जोर दिया है। इसके तहत संभावित चुनौतियों की समय रहते पहचान करने, उनसे निपटने की तैयारी रखने और जरूरत पड़ने पर तेजी से कदम उठाने की कोशिश की जा रही है।
पीएम मोदी ने बताया कि संक्रामक बीमारियों की रोकथाम और उनसे निपटने के लिए ब्रिक्स इंटीग्रेटेड अर्ली वार्निंग सिस्टम बनाने पर सहमति बनी है। इसके अलावा आपदा प्रबंधन के लिए अर्ली वार्निंग डेटा इंटीग्रेशन गाइडलाइंस भी तैयार की गई हैं। वहीं, ब्रिक्स लॉजिस्टिक्स सप्लाई चेन कोऑपरेशन फ्रेमवर्क के जरिए सदस्य देशों के बीच सप्लाई चेन को ज्यादा मजबूत और भरोसेमंद बनाने पर काम किया जाएगा।
चार प्रमुख स्तंभों पर भारत का फोकस
पीएम मोदी ने कहा कि भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान चार प्रमुख क्षेत्रों पर खास ध्यान दिया गया। इनमें मजबूती, नवाचार, सहयोग और टिकाऊ विकास शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इन चारों क्षेत्रों के जरिए ब्रिक्स के साझा विजन को ऐसे सहयोग में बदलने की कोशिश की गई है, जिसका फायदा सभी सदस्य देशों को मिल सके। साथ ही, ब्रिक्स के जरिए तैयार किए जाने वाले समाधानों को ग्लोबल साउथ के देशों की जरूरतों के हिसाब से भी इस्तेमाल किया जा सके।
विकास के साथ पर्यावरण का भी ध्यान
पीएम मोदी ने टिकाऊ विकास को लेकर कहा कि मानव विकास और पर्यावरण की सुरक्षा के बीच संतुलन बनाना जरूरी है। उन्होंने भारतीय सभ्यता का जिक्र करते हुए कहा कि यहां प्रकृति को मां के रूप में सम्मान दिया जाता है। सदियों से यह माना जाता रहा है कि विकास और पर्यावरण एक-दूसरे के विकल्प नहीं हैं, बल्कि दोनों साथ-साथ आगे बढ़ सकते हैं। इसी सोच के तहत स्मार्ट ग्रिड और ऊर्जा भंडारण के लिए ब्रिक्स डिजिटल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाया गया है। इसका उद्देश्य स्वच्छ ऊर्जा से जुड़ी व्यवस्थाओं को ज्यादा भरोसेमंद, बेहतर और लोगों के लिए आसान बनाना है। कृषि के क्षेत्र में कृषि-पारिस्थितिकी और पुनर्योजी खेती से जुड़े उत्कृष्टता केंद्र भी बनाए जाएंगे। इनमें पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक विज्ञान के साथ जोड़ने की कोशिश होगी। वहीं, समुदाय आधारित जलवायु अनुकूलन के सिद्धांतों के जरिए स्थानीय और पारंपरिक ज्ञान को जलवायु से जुड़ी कार्रवाई का अहम हिस्सा बनाने पर जोर दिया जाएगा।
चीन के निर्यात प्रतिबंध से बढ़ी थी चिंता
रेयर अर्थ और उनसे जुड़े मैग्नेट की सप्लाई को लेकर चिंता अप्रैल 2025 में और बढ़ गई थी। उस समय चीन ने सात रेयर-अर्थ मेटल और तैयार मैग्नेट के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था। इन चीजों को दूसरे देशों में भेजने के लिए निर्यात लाइसेंस लेना जरूरी कर दिया गया था। चीन के इस फैसले के बाद कई शिपमेंट में देरी हुई। इससे भारत में ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रिक वाहन बनाने वाली कंपनियों के लिए भी परेशानी बढ़ने की आशंका जताई गई थी। इसकी वजह है कि इन उद्योगों में कुछ खास तरह के परमानेंट मैग्नेट का इस्तेमाल जरूरी होता है। भारत अभी परमानेंट मैग्नेट की सप्लाई के लिए चीन पर काफी निर्भर है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2022 से 2025 के बीच भारत के परमानेंट मैग्नेट आयात में मात्रा के हिसाब से चीन की हिस्सेदारी अलग-अलग श्रेणियों में करीब 85 से 90 फीसदी रही। भारत फिलहाल सिंटर्ड नियोडिमियम-आयरन-बोरॉन रेयर-अर्थ परमानेंट मैग्नेट की अपनी पूरी जरूरत आयात के जरिए ही पूरी करता है।
स्टार्टअप से लेकर खेती तक एआई पर जोर
नवाचार को बढ़ावा देने के लिए भारत ने ब्रिक्स इन्क्यूबेटर नेटवर्क पर जोर दिया है। इसका उद्देश्य ब्रिक्स देशों के स्टार्टअप और इन्क्यूबेटरों को आपस में जोड़ना है। भारत ने ब्रिक्स स्टार्टअप इनोवेशन फंड बनाने का प्रस्ताव भी रखा है। इसके जरिए ऐसे नए समाधान विकसित करने और उन्हें बढ़ावा देने की कोशिश होगी, जिन्हें बड़े स्तर पर इस्तेमाल किया जा सके। खेती के क्षेत्र में भी नई तकनीक के इस्तेमाल पर जोर दिया गया है। ब्रिक्स नेटवर्क ऑन डिजिटल एग्रीकल्चर के जरिए एआई, भू-स्थानिक तकनीक और डिजिटल सार्वजनिक ढांचे को किसानों की जरूरतों से जोड़ने की योजना है। इसके अलावा ‘ब्रिक्स कनेक्ट’ के जरिए कौशल विकास, रोजगार के लिए जरूरी क्षमताएं बढ़ाने, महिलाओं की कार्यबल में भागीदारी, सामाजिक सुरक्षा और क्षमता निर्माण जैसे मुद्दों पर काम किया जा रहा है।
छोटे कारोबार और शहरों के लिए भी पहल
ब्रिक्स देशों में छोटे कारोबारों को बढ़ावा देने के लिए सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम यानी एमएसएमई सहयोग पोर्टल शुरू किया गया है। इसका मकसद छोटे कारोबारों को जरूरी जानकारी, वित्तीय मदद और नए बाजारों तक पहुंच दिलाने में मदद करना है। इसके साथ ही ब्रिक्स अर्बन मोबिलिटी हब भी बनाया गया है। इसके जरिए अलग-अलग देशों के शहर परिवहन और शहरी आवाजाही से जुड़े अपने अनुभव साझा कर सकेंगे। साथ ही, शहरों में अपनाए जा रहे बेहतर तरीकों से दूसरे देश भी सीख सकेंगे।
नई दिल्ली घोषणा में क्रिटिकल मिनरल्स पर जोर
ब्रिक्स सम्मेलन में अपनाई गई नई दिल्ली घोषणा में क्रिटिकल मिनरल्स की सप्लाई चेन को लेकर भी अहम बात कही गई है। इसमें ऐसी सप्लाई चेन बनाने की जरूरत बताई गई है, जो भरोसेमंद, जिम्मेदार, अलग-अलग स्रोतों वाली, मजबूत, निष्पक्ष, टिकाऊ और न्यायसंगत हो। घोषणा में यह भी माना गया है कि क्रिटिकल मिनरल्स ऊर्जा सुरक्षा और कम उत्सर्जन वाली तकनीकों के लिए बेहद जरूरी हैं।
शी जिनपिंग से मुलाकात में भी आर्थिक मुद्दों पर चर्चा
पीएम मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच शनिवार को ब्रिक्स सम्मेलन से अलग भी मुलाकात हुई थी। इस दौरान दोनों नेताओं ने दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा की। बातचीत में व्यापार असंतुलन, सप्लाई चेन से जुड़ी कमजोरियां और बाजार तक पहुंच जैसे मुद्दे शामिल रहे। ऐसे में ब्रिक्स सम्मेलन के मंच से पीएम मोदी का सप्लाई चेन को मजबूत बनाने और जरूरी खनिजों की भरोसेमंद सप्लाई सुनिश्चित करने पर जोर देना अहम है।