0 फिल्मों की तरह सर्टिफिकेशन की मांग
मुंबई/नागपुर। ओटीटी प्लेटफॉर्म पर दिखाए जाने वाले कंटेंट के सेंसरशिप के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने एक पैनल बनाया है। यह पैनल तय करेगा कि ओटीटी पर दिखाया जाने वाला कंटेंट अश्लील, संस्कृति के खिलाफ, एंटी नेशनल या बच्चों पर गलत प्रभाव डालने वाला नहीं है।
आरएसएस का मानना है कि ओटीटी पर कुछ ऐसा कंटेंट दिखाया जा रहा है, जिसका बच्चों और युवाओं पर गलत असर पड़ सकता है। संघ इसे भारतीय संस्कृति और सामाजिक मूल्यों से भी जोड़कर देखता है। इसी वजह से ओटीटी कंटेंट पर ज्यादा सख्त नियम बनाने की जरूरत पर चर्चा हो रही है। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत पहले भी ओटीटी और डिजिटल कंटेंट को लेकर चिंता जता चुके हैं। वहीं दूसरी तरफ सरकार ने सेंसर बोर्ड यानी सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (सीबीएफसी) का पुनर्गठन कर दिया है। सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने 18 सदस्यों वाले नए बोर्ड का ऐलान किया है।
क्या ओटीटी के लिए सेंसर बोर्ड बनेगा?
फिलहाल ऐसा कोई सेंसर बोर्ड नहीं बना है। आरएसएस ने सिर्फ एक पैनल बनाया है, जो इस मुद्दे पर सुझाव देगा। पैनल की सिफारिशों के बाद ही यह तय होगा कि आगे क्या व्यवस्था हो सकती है। संघ से जुड़े लोगों ने ओटीटी के लिए फिल्मों के सेंसर बोर्ड जैसी व्यवस्था बनाने को कहा है। अगर ऐसा होता है तो ओटीटी पर रिलीज होने वाले कंटेंट की पहले से जांच और सर्टिफिकेशन की व्यवस्था की जा सकती है।