रायपुर। अदालत के फैसले के बाद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और पीसीसी चीफ दीपक बैज ने प्रतिक्रिया देते हुए सवाल उठाए हैं। भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर लिखा, झीरम राजनीतिक जनसंहार के मामले में नक्सलियों के पैदल पियादों को दी गई सजा न अनुपातिक है और न इसे न्याय कहा जा सकता है। जिन्होंने षड्यंत्र रचा और जिन्होंने इस जनसंहार को अंजाम दिया, वे तो अभी भी बाहर खुले घूम रहे हैं।
श्री बघेल ने कहा कि नक्सलियों के बड़े नेताओं का नाम, पता नहीं है, किसके इशारे पर, एनआईए ने पहले ही हटा दिए थे। उन पर तो आरोप भी नहीं लगाया गया। न एनआईए ने षड्यंत्र की जांच की, न जांच आयोग ने इसकी जांच की। भाजपा के नेता लगातार अड़ंगा अटकाते रहे और जांच नहीं होने दी। अदालत के फैसले से हमारी सोच बदलने का प्रश्न ही नहीं है। हम अब भी मानते हैं कि न्याय अधूरा है, क्योंकि जांच अधूरी है।
बड़े नक्सलियों को कब मिलेगी सजाः दीपक बैज
पीसीसी चीफ दीपक बैज ने कहा कि 10 दोषियों को फांसी की सजा सुनाई गई है, लेकिन ये 10 लोग कौन हैं? उन्होंने ने दावा किया कि ये वो छोटे नक्सली हैं, जो बड़े नक्सलियों का झोला उठाते थे, राशन इकट्ठा करते थे और पानी पिलाने का काम करते थे, इन्हें सजा दी गई है। बड़े नक्सली सरकार की गोद और उनके संरक्षण में हैं, उन्हें सजा कब मिलेगी? फैसला आया है, लेकिन न्याय नहीं मिला, असली न्याय तब मिलेगा, जब सरकार के षड्यंत्रकारियों को फांसी की सजा होगी। बैज ने कहा कि सरकार बड़े नक्सलियों को बचाने का काम कर रही है, ताकि उनके षड्यंत्र का पर्दाफाश न हो सके, गांवों के छोटे नक्सलियों को सजा देने का काम किया गया है। इतनी बड़ी घटना को अंजाम देने की क्षमता इन छोटे नक्सलियों में नहीं थी, जिन्हें सजा नहीं मिलनी चाहिए, उन्हें सजा हुई है, जबकि बड़े नक्सली सरकार के संरक्षण में हैं। झीरम घाटी मामले में फैसला तो आया है, लेकिन न्याय अभी तक नहीं मिला है।