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0 उनके बेटे हॉवर्ड बफे संभालेंगे बोर्ड की कमान
ओमाहा (नेब्रास्का)। अमेरिकी निवेशक वॉरेन बफेट ने बर्कशायर हैथवे के चेयरमैन पद से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे दिया है। वे 1970 से इस पद पर थे। कंपनी ने शुक्रवार, 18 सितंबर को बताया कि 96 साल के बफेट अब मानद चेयरमैन यानी चेयरमैन एमेरिटस की भूमिका निभाएंगे। वह कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में भी बने रहेंगे।

कंपनी के लंबे समय से तय उत्तराधिकार योजना यानी सक्सेशन प्लान के तहत बोर्ड ने वॉरेन बफेट के बेटे हॉवर्ड बफेट को नया चेयरमैन चुना है। वहीं ग्रेग एबेल चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर और सुजैन डेकर लीड इंडिपेंडेंट डायरेक्टर के पद पर बने रहेंगे।

फोर्ब्स की रियल टाइम बिलियनेयर्स लिस्ट के अनुसार, वॉरेन बफेट की नेटवर्थ 13.82 लाख करोड़ रुपए है। दुनिया के टॉप-10 अमीरों में वे 10वें नंबर पर आते हैं। वे फोर्ब्स की 2008 की सालाना अरबपतियों की सूची में दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति बने थे (62 अरब डॉलर संपत्ति के साथ)।

वॉरेन के योगदान की तुलना नहीं की जा सकती
बर्कशायर बोर्ड की ओर से सीईओ ग्रेग एबेल ने कहा कि अमेरिकी बिजनेस के इतिहास में बर्कशायर और इसके शेयरहोल्डर्स पर वॉरेन के योगदान की कोई तुलना नहीं की जा सकती। एबेल ने आगे कहा कि वॉरेन के बनाए गए कल्चर और वैल्यू कंपनी के फोकस में बने रहेंगे और हॉवर्ड बफेट इसे आगे बढ़ाने का काम करेंगे।

हॉवर्ड बफेट 1993 से बर्कशायर के बोर्ड में शामिल हैं
71 साल के हॉवर्ड बफेट 1993 से बर्कशायर के बोर्ड में डायरेक्टर के तौर पर शामिल हैं। वे 1999 से हॉवर्ड जी बफेट फाउंडेशन को लीड कर रहे हैं, जो ग्लोबल फूड सिक्योरिटी एंड कनफ्लिक्ट रेजोल्यूशन पर काम करता है। हॉवर्ड कई पब्लिक और प्राइवेट कंपनियों के बोर्ड में रह चुके हैं और करीब एक दशक तक यूनाइटेड नेशन वर्ल्ड फूड प्रोग्राम के गुडविल एम्बेसडर अगेंस्ट हंगर भी रहे हैं।

वॉरेन बफेट ने 9 महीने पहले सीईओ पद से इस्तीफा दिया था
इससे पहले वॉरेन बफेट ने 31 दिसंबर को बर्कशायर हैथवे के सीईओ पद से इस्तीफा दिया था। बफे की जगह ग्रेग एबेल नए सीईओ बनाए गए थे। बफेट जिस कंपनी के दम पर दुनिया के 10वें सबसे अमीर इंसान बने, उसे खरीदना ही वे अपनी जिंदगी की 'सबसे बड़ी गलती' मानते हैं। बफेट ने यह कंपनी किसी बिजनेस डील के लिए नहीं, बल्कि गुस्से में आकर खरीदी थी। वहीं एक बार रिटायरमेंट पर बफेट ने कहा था कि इस बारे में सोचना भी नामुमकिन है। मेरे लिए यह मौत से भी बदतर होगा।

डूबती कपड़ा मिल से बनाई 98 लाख करोड़ रुपए की कंपनी
1965 में जब वॉरेन बफेट ने बर्कशायर हैथवे का कंट्रोल हाथ में लिया था, तब यह एक संघर्ष कर रही टेक्सटाइल कंपनी थी। बफेट ने इसे दुनिया के सबसे बड़ी कंपनियों में से एक में बदल दिया। आज बर्कशायर हैथवे 1.09 ट्रिलियन डॉलर यानी, करीब 98 लाख करोड़ रुपए की वैल्यू वाली कंपनी है। इसके पास कोका-कोला, क्राफ्ट हेंज और एपल जैसे बड़े ब्रांड्स की हिस्सेदारी है, साथ ही जीको (Geico) और नेटजेट्स जैसी कंपनियां भी इसके पोर्टफोलियो में शामिल हैं। फोर्ब्स की रियल टाइम बिलियनेयर्स लिस्ट के अनुसार, वॉरेन बफेट की नेटवर्थ 13.82 लाख करोड़ रुपए है। दुनिया के टॉप-10 अमीरों में वे 10वें नंबर पर आते हैं। वे फोर्ब्स की 2008 की सालाना अरबपतियों की सूची में दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति बने थे ($62 अरब संपत्ति के साथ)।

बफेट ने कहा था- बर्कशायर खरीदना सबसे बड़ी गलती थी
हैरानी की बात यह है कि जिस कंपनी के दम पर बफेट दुनिया के टॉप-10 अमीरों में शामिल हुए, उसे ही वे अपनी सबसे बड़ी गलती मानते हैं। बफेट के मुताबिक, उन्होंने 1962 में सिर्फ इसलिए इस कंपनी को खरीदा था क्योंकि इसके मैनेजमेंट ने उन्हें धोखा दिया था। बफेट बताते हैं कि1964 में बर्कशायर के मालिक मिस्टर स्टैंटन ने वादा किया था कि उनके पास बर्कशायर के जितने भी स्टॉक है उसे वो 11.50 डॉलर के भाव पर खरीद लेंगे। कुछ दिनों बाद जब लेटर आया तो कीमत 11.375 डॉलर थी। यानी, जितने प्राइस में बात हुई थी उससे 12 सेंट कम। इस धोखाधड़ी से बफेट को इतना गुस्सा आया कि उन्होंने स्टॉक बेचने के बजाय पूरी कंपनी ही खरीद ली और स्टैंटन को नौकरी से निकाल दिया। बफेट इसे अपनी 'सबसे डंब' (बेवकूफी भरी) डील मानते हैं, क्योंकि उन्होंने एक डूबते हुए टेक्सटाइल बिजनेस में सालों तक अपना पैसा फंसाए रखा। बफेटट कहते हैं कि अगर मैं वह पैसा सीधे इंश्योरेंस बिजनेस में लगाता, तो आज बर्कशायर की वैल्यू दोगुनी होती।