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0 सीएम साय ने कहा- पूरे प्रदेश के लिए गौरव का क्षण
 
रायपुर। 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में छत्तीसगढ़ की अनूठी सांस्कृतिक विरासत को देशभर में पहचान मिली है। छत्तीसगढ़ के अद्वितीय रामनामी समुदाय की आस्था, परंपरा और विरासत पर आधारित डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘राम-नामी’ को सर्वश्रेष्ठ वृत्तचित्र का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के कर-कमलों से यह सम्मान प्रदान किया गया।

इस उपलब्धि पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने खुशी जताते हुए इसे पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि रामनाम ही जिनका धर्म और रामभक्ति ही जिनका कर्म है, ऐसे पवित्र रामनामी समुदाय की आस्था और साधना की अपनी विशिष्ट पहचान है।

तन पर अंकित ‘राम’ आस्था की पहचान
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि रामनामी समुदाय के लोगों के तन पर अंकित ‘राम’ केवल अक्षर नहीं है, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही अटूट आस्था, साधना और समर्पण की पहचान है। राम के नाम को समर्पित इस समुदाय की जीवनशैली और सांस्कृतिक परंपराओं को डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘राम-नामी’ के माध्यम से देश-दुनिया के सामने प्रस्तुत किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि फिल्म ने छत्तीसगढ़ की लोक आस्था और सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय मंच पर नई पहचान दिलाई है। यह सम्मान प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण और संवर्धन के लिए भी प्रेरणादायी है।

निर्देशक भरतबाला गणपति समेत पूरी टीम को बधाई
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस गौरवपूर्ण उपलब्धि के लिए फिल्म के निर्देशक भरतबाला गणपति और ‘राम-नामी’ की पूरी टीम को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी है। उन्होंने कहा कि रामनामी समुदाय की अनूठी परंपरा को व्यापक स्तर पर सामने लाने वाली यह फिल्म छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।