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मुंबई। पुराने दौर की फिल्मों में किन्नर या तो किसी फनी सिचुएशन में या फिर मस्ती मजाक के लिए ही नजर आते थे। समय बीता तो कहानी में बदलाव हुआ और फिर फिल्मों में किन्नर ऐसे रोल में नजर आए कि शायद उनके बिना फिल्म पूरी नहीं हो सकती थी। 

पहले के समय में अभिनेता भी इस तरह के किरदार निभाने से बहुत हिचकते थे, लेकिन फिर आशुतोष राणा और परेश रावल जैसे एक्टर्स ने फिल्मों में किन्नर के किरदार में शानदार अभिनय से जान फूंक दी। इसके बाद एक्टर्स भी अब इस तरह के रोल करने लगे हैं। 

राजपाल यादव की फिल्म 'अर्ध' भी एक ऐसे शख्स की कहानी बताती है जो मुंबई में अपने जीवनयापन के लिए आदमी से किन्नर बनने पर मजबूर हो जाता है। आज हम आपको ऐसी ही कुछ फिल्मों के बारे में बताने जा रहे हैं जो मुख्य रूप से किन्नरों के किरदार पर आधारित हैं।

तमन्ना
इस फिल्म में दिग्गज अभिनेता परेश रावल ने किन्नर का किरदार निभाया है। इस फिल्म में किन्नर की जिंदगी को सकारात्मक तरीके से दिखाया गया था। इस फिल्म में परेश रावल किन्नर टिक्कू की भूमिका में थे। सामाजिक मुद्दे पर आधारित इस फिल्म को उस साल नेशनल अवॉर्ड भी मिला था। 

शबनम मौसी
साल 2005 में आई ये फिल्म एक सच्ची घटना पर आधारित थी। इस फिल्म में शबनम मौसी का किरदार आशुतोष राणा ने निभाया। शबनम मौसी 1998 से 2003 तक मध्य प्रदेश राज्य विधान सभा की निर्वाचित सदस्य थीं। वह सार्वजनिक पद के लिए चुनी जाने वाली पहली ट्रांसजेंडर भारतीय हैं।

संघर्ष
इस फिल्म में आशुतोष राणा ने एक ऐसे किन्नर का रोल निभाया था, जो बच्चों की बलि देकर अमर हो जाना चाहता है। लज्जा शंकर पांडे की चीख, सनकीपन और जीभ को ट्विस्ट करने वाली आवाज ने थियेटर में बैठे दर्शकों में खौफ भर दिया था। इस फिल्म के लिए आशुतोष राणा को बेस्ट विलेन का फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिल चुका है।

लक्ष्मी
अक्षय कुमार की फिल्म लक्ष्मी साउथ की रीमेक थी। इस फिल्म में अक्षय कुमार के अलावा शरद केलकर भी ट्रांसजेंडर की भूमिका में नजर आए थे। ये एक हॉरर फिल्म थी।