मुंबई। ओटीटी की दुनिया ने सिनेमा का अलग रूप गढ़ा है। वेब सीरीज में क्राइम और हिंसा का खुल्लमखुल्ला खेला दिखाया जाने लगा है। अधिकांश में अपराधियों और आपराधिक ठिकानों की पृष्ठभूमि का नाता उत्तर प्रदेश से जोड़ दिया जाता है। यूं तो सिनेमा में उत्तर प्रदेश को दिखाए जाने की परंपरा नई नहीं है। न ही यहां के क्राइम की कहानी को फिल्मों में भुनाना नया है।
फिल्म 'गंगा जमना' से लेकर 'जिला गाजियाबाद' तक तमाम फिल्मों में यूपी के अपराध और हिंसा को दिखाया गया है। लेकिन, इसके साथ-साथ यहां की सामाजिक स्थितियों पर भी बराबर बात हुई है। मगर, हाल के दिनों का जो दौर है, उसमें समाज कहीं पीछे छूट रहा है और अपराध, हिंसा एक मसाले के रूप में फिल्मों में शामिल होते नजर आ रहे हैं।
बेशक उत्तर प्रदेश का चरित्र अपराध और हिंसा वाला रहा है, लेकिन यहां की गंगा-जमुनी तहजीब, साहित्य-कला-संस्कृति, ऐतिहासिक धरोहरें इस प्रदेश की गौरवगाथाएं कहती हैं। ओटीटी के जमाने में प्रदेश की यह खूबियां गुम-सी हैं। हालांकि, 'पंचायत' वेबसीरीज इस मामले में जरूर अलग कहानी कहती है, जो ग्रामीण पिछड़ेपन और भ्रष्टाचार पर केंद्रित है। यह मुद्दा प्रासंगिक भी है। लेकिन, इससे इतर कई वेब सीरीज में यूपी की छवि 'गनतंत्र' वाली बना दी गई है। इसका उदाहरण हैं यह पांच वेब सीरीज...
मिर्जापुर
'मिर्जापुर' वेब सीरीज के दोनों सीजन को दर्शकों का भरपूर प्यार मिला। इस वेब सीरीज की कहानी कारपेट निर्यातक अखंडानंद त्रिपाठी और मिर्जापुर के माफिया डॉन के इर्द-गिर्द घूमती है। अखंडानंद का बेटा अपने पिता की तरह योग्य नहीं है, लेकिन सत्ता पर काबिज होने की भूख उसके अंदर है। पिता की विरासत को हासिल करने के लिए वह किस तरह अपराधों से गुजरता है इस वेबसीरीज में दिखाया है। इस वेब सीरीज में मारकाट, खून-खराबा, गाली-गलौज से लेकर गोलीबाजी तक सबकुछ बहुत अधिक दिखााया गया है। बनारस और मिर्जापुर के स्थानीय लोगों ने अपने शहर की छवि खराब करने के आरोप भी इस वेबसीरीज पर लगाए थे। इसके दूसरे सीजन की रिलीज को रोकने के लिए बाकायदा पीआईएल दाखिल की गई थी। इस सीरीज को आप अमेजम प्राइम पर देख सकते हैं।
रंगबाज'
ओटीटी की दुनिया में गैंगस्टर ड्रामा 'रंगबाज' के दो सीजन रिलीज हो चुके हैं। इसकी लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि मेकर्स ने हाल ही में इसके तीसरे सीजन की घोषणा की है। इसके पहले सीजन में साकिब सलीब ने प्रकाश शुक्ला का किरदार निभाया, जो उत्तर प्रदेश के गोरखपुर का गैंगस्टर है। इसके पहले तो सीजने ओटीटी प्लेटफॉर्म जी5 पर देखे जा सकते हैं।
भौकाल
भौकाल पुलिस ऑफिसर नवनीत सिकेरा की रियल लाइफ पर आधारित है। एमएक्स प्लेयर पर दिखाई जा रही इस वेब सीरीज में यूपी पुलिस को बड़े अपराधियों से भिड़ते हुए दिखाया गया है। इस वेब सीरीज को एमएक्स प्लेयर पर देखा जा सकता है।
'रक्तांचल'
वेब सीरीज 'रक्तांचल' में उत्तर प्रदेश के बाहुबली विधायक की कहानी को दिखाया गया है। दरअसल इस सीरीज में दो राजनीतिक हस्तियों की रंजिश को प्रमुखता से दिखाया गया है। इसे एमएक्स प्लेयर पर देखा जा सकता है। सीरीज का प्लॉट पूर्वी यूपी के क्राइम पर आधारित है। इस वेब सीरीज में भी रंगदारी और अवैध ठेकेदारों को भी खूंखार अंदाज में दिखाया गया है।
'असुर'
यूपी के क्राइम पर आधारित वेब सीरीज में 'असुर' भी शामिल है। यह उत्तर प्रदेश के वाराणसी के प्लॉट पर है। इसमें एक सीरियल किलर को दिखाया गया है, जो धार्मिक भी है और कई हत्याओं को भी अंजाम देता है। वहीं, इसमें सीरियल किलर और पुलिस व फॉरेंसिक टीम के साथ खूब खेल चलता है। इसमें अरशद वारसी धनंजय राजपूत के किरदार में हैं, जो कि फॉरेंसिक एक्सपर्ट निखिल नायर (एक्टर बरुन सोबती) के मेंटर के रूप में दिखे हैं। यह वेब सीरीज ओटीटी प्लेटफॉर्म वूट पर उपलब्ध है।
क्या है वजह?
सवाल है कि आखिर वेब सीरीज में क्राइम दिखाने के लिए उत्तर प्रदेश के शहर और ठिकानों को इतनी अधिकता से क्यों चुना जा रहा है? जवाब हो सकता है, राजनीति के धरातल पर इस प्रदेश का दबदबा। शायद यही चीज इसे खास बनाती है। यहां की राजनीति, क्राइम, तमाम उलझी कहांनियां और उस पर यहां के सियासी मुद्दे रोज नई स्क्रिप्ट तैयार करते नजर आते हैं। शायद इसीलिए वेब सीरीज की दुनिया में भी यहां का असर दिख रह है। समाज और संस्कृति को पीछे छोड़ यूपी की सिर्फ आपराधिक छवि को दिखाना आखिर कब तक कारगर होगा, यह अनुमान लगाना कठिन है, लेकिन फिलहाल इसे दर्शक खूब पसंद कर रहे हैं।