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नई दिल्ली। लोकसभा में गुरुवार को विपक्ष के भारी हंगामे और विरोध के बीच विकसित भारत रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण) वीबी -जी राम-जी (विकसित भारत जी राम जी) विधेयक 2025 पारित किया।

केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मनरेगा का स्थान लेने वाले वीबी-जी-राम-जी विधेयक पर बुधवार मध्यरात्रि तक चली चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि इस विधेयक के माध्यम से महिला, युवा, गरीबों की जिंदगी बदलने का काम कर बापू के आदर्शों को जिंदा रखने का काम किया गया है। यह गरीबों की जिंदगी बदलेगा और आदर्श ग्राम की स्थापना करेगा जिसमें लोगों को सभी प्रकार की सुविधाएं उनकी पहुंच में होगी।

उन्होंने कहा कि हम किसी से भेदभाव नहीं करते हैं। बापू हमारी प्रेरणा और श्रद्धा हैं। पूरा देश हमारे लिए एक है। हमारे विचार संकीर्ण और संकुचित नहीं है। कांग्रेस ने मनरेगा को पूरी तरह से भ्रष्टाचार के हवाले कर दिया था। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार का जवाब सुनना ही नहीं चाहती है। उन्होंने कहा कि असल मायने में मनरेगा के फंड का दुरुपयोग किया गया है। दूसरी तरफ हमारी सरकार ने विकास कार्यों पर खर्च करने का काम किया है। उन्होंने कहा कि इस विधेयक से किसानों और गरीबों का कल्याण होगा।

उन्होंने कहा कि नरेगा को महात्मा गांधी के नाम के साथ शुरू नहीं किया गया था। उन्होंने 2009 के चुनावों से पहले वोट बैंक को ध्यान में रखते हुए इसमें महात्मा गांधी का नाम जोड़ा था। उन्होंने कहा कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) ने अपने कार्यकाल में इस पर सिर्फ 2.13 लाख करोड़ रुपये खर्च किये जबकि मोदी सरकार ने 2014 से इस पर 8.53 लाख करोड़ रुपये खर्च किये हैं। उन्होंने कहा कि पहले इसमें भ्रष्टाचार था लेकिन मोदी सरकार ने इसे भ्रष्टाचार मुक्त बनाया है।

ग्रामीण विकास मंत्री ने कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के उन आरोपों को खारिज कर दिया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सरकार अपनी मर्जी से योजनाओं के नाम बदल देती है। इस आरोप का जवाब देते हुए उन्होंने नेहरू गांधी परिवार के सदस्यों के नाम पर कई कल्याणकारी कार्यक्रमों की सूची गिना दी और तर्क दिया कि कांग्रेस का राजनीतिक फायदे के लिए नाम जोड़ने का लंबा इतिहास रहा है।

उन्होंने कांग्रेस पर महात्मा गांधी के आदर्शों को धोखा देने का भी आरोप लगाया और कहा कि पार्टी ने भारत के बंटवारे को स्वीकार किया और आजादी के बाद कांग्रेस को भंग करने की गांधी की बात को नजरअंदाज किया। कांग्रेस ने खुद गांधीवादी सिद्धांतों को खत्म कर दिया।
उन्होंने कहा कि इस विधेयक के नाम में ही इस योजना का काम लिखा हुआ है। इस योजना में रोजगार की गारंटी दे रहे हैं, आजीविका को समृद्ध कर रहे हैं। इससे वैभवशाली, गौरवशाली भारत का निर्माण हो रहा है।विकसित भारत के लिए विकसित गांव का निर्माण हो रहा है।

उन्होंने कहा कि मनरेगा की जगह पर नया विधेयक इसलिए लिए लाया गया ताकि राज्यों के बीच फंड का जो बंटवारा असमान्य था उसे ठीक किया जाये। मनरेगा को भ्रष्टाचार के हवाले कर दिया गया था इसे दुरुस्त करना आवश्यक था। मनरेगा का सही उपयोग हो और पैसे का सही उपयोग हो ,इसलिए इन कमियों को दूर करने का विचार किया गया। व्यापक विचार विमर्श के बाद मनरेगा में संशोधन लाया गया।

केंद्रीय मंत्री के जवाब के दौरान विपक्ष सदन के बीचोंबीच विधेयक के विरोध में नारेबाजी करते रहे। हंगामे के बीच ही शिवराज सिंह ने अपना जवाब दिया। इस दौरान कुछ सदस्यों ने कागज फाड़कर आसन के पास उड़ाये।

इस दौरान लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि आपको देश की जनता ने यहां कागज फेंकने के लिए नहीं भेजा है। यह संसदीय परंपराओं के अनुरूप भी नहीं है। अध्यक्ष के आग्रह के बावजूद हंगामा नहीं रूका, तब सदन की कार्यवाही को दिन भर के लिए स्थगित कर दिया गया।