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0 रोज 50 लाख सिलेंडर की डिलीवरी
0 घबराहट की वजह से बुकिंग कई गुना बढ़ी
0 1 लाख पेट्रोल पंप पर तेल की कमी नहीं
नई दिल्ली। भारत सरकार के विदेश, शिपिंग, पेट्रोलियम, सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने गुरुवार को देश में कच्चे तेल और गैस की किल्लत को लेकर जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस की। सरकार ने बताया कि भारत अपनी जरूरत का करीब 60% एलपीजी आयात करता है, जिसमें से लगभग 90% सप्लाई स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से आती है।

सरकार ने कहा कि देश में हालात चुनौतीपूर्ण हैं, लेकिन सरकार गैस सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। देश में रोजाना करीब 50 लाख एलपीजी सिलेंडर की डिलीवरी की जाती है। हाल में घबराहट के कारण सिलेंडर बुकिंग में कई गुना बढ़ोतरी देखी गई है। अमेरिका-इजराइल की ईरान से जंग की वजह से भारत में एलपीजी की किल्लत बढ़ती जा रही है। देशभर में गैस सिलेंडर एजेंसियों के बार लम्बी लाइनें लगी हुई हैं। इसके अलावा गैस सिलेंडर कालाबाजारी भी होने लगी है। कुछ राज्यों में 900 के घरेलू गैस सिलेंडर के लिए 1800 तक वसूले जा रहे हैं।

देश में पेट्रोल-डीजल और एलपीजी की उपलब्धता संतोषजनक हैः पेट्रोलियम मंत्रालय
पेट्रोलियम मंत्रालय की जॉइंट सेक्रेटरी (मार्केटिंग और ऑयल रिफाइनरी) सुजाता शर्मा ने कहा कि देश में पेट्रोल-डीजल और एलपीजी की उपलब्धता को लेकर स्थिति काफी सहज और संतोषजनक है। भारत रोजाना करीब 55 लाख बैरल कच्चे तेल का इस्तेमाल करता है और दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रिफाइनर होने के कारण पेट्रोल-डीजल जैसे उत्पादों की उपलब्धता को लेकर भरोसा बना हुआ है। 9 मार्च को पेट्रोलियम मंत्रालय ने एसेंशियल कमोडिटी एक्ट के तहत सभी रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन अधिकतम करने का आदेश दिया था। इसके बाद घरेलू उत्पादन में बढ़ोतरी हुई है और अब यह 25% से बढ़कर 28% हो गया है। भारत सरकार हर तिमाही राज्यों को केरोसिन आवंटित करती है। हर तीन महीने में लगभग 1 लाख किलोलीटर केरोसिन राज्यों को दिया जाता है। आज जारी किए गए नए आदेश के तहत राज्य सरकारों को अतिरिक्त 48 हजार किलोलीटर केरोसिन और जारी किया जाएगा। घरेलू बाजार में एलपीजी की सप्लाई डिमांड और सप्लाई दोनों के मैनेजमेंट पर निर्भर करती है। सरकार सभी मोर्चों पर कार्रवाई कर रही है। जहां तक सप्लाई का सवाल है, हम घरेलू एलपीजी उत्पादन बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। राज्य सरकार या केंद्र शासित प्रदेश की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है, ताकि वितरण पारदर्शी और प्राथमिकता के आधार पर सुनिश्चित किया जा सके।

होर्मुज स्ट्रैट में 28 भारतीय जहाज हैं, सभी सुरक्षितः शिपिंग मंत्रालय
शिपिंग मंत्रालय के अधिकारी राजेश कुमार सिन्हा ने बताया कि पर्शियन गल्फ क्षेत्र में भारतीय जहाजों की संख्या फिलहाल 28 है और यह संख्या पहले जैसी ही बनी हुई है। इन जहाजों में कुल 778 भारतीय नाविक सवार हैं। इन 28 जहाजों में से 24 होर्मुज स्ट्रैट के पश्चिमी हिस्से में हैं, जिन पर 677 भारतीय नाविक मौजूद हैं। वहीं चार जहाज होर्मुज के पूर्वी हिस्से में हैं, जिन पर 101 भारतीय नाविक सवार हैं। सरकार इन सभी जहाजों और उनके क्रू की सुरक्षा पर लगातार नजर रख रही है। हाल में विदेशी झंडे वाले कुछ जहाजों पर भारतीय नाविकों से जुड़े समुद्री हादसे हुए हैं। इन जहाजों पर कुल 78 भारतीय नाविक मौजूद थे। इनमें से 70 नाविक सुरक्षित निकल आए हैं, जबकि चार नाविक घायल हुए हैं और उनकी हालत स्थिर है। इन घटनाओं में तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई है, जबकि एक नाविक अब भी लापता बताया जा रहा है।

तेहरान स्थित दूतावास भारतीयों की मदद कर रहा हैः विदेश मंत्रालय
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि तेहरान स्थित भारतीय दूतावास उन भारतीय नागरिकों की मदद कर रहा है जो ईरान छोड़ना चाहते हैं। उन्हें आर्मेनिया और अजरबैजान के रास्ते बाहर निकलने में सहायता दी जा रही है, जहां से उपलब्ध वाणिज्यिक उड़ानों का उपयोग किया जा सकता है। तेहरान में हमारा दूतावास भारतीय नागरिकों को वीज़ा सुविधा के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय भूमि सीमा पार करने में भी मदद कर रहा है। हमारे कई नागरिक इस विकल्प का लाभ उठाकर भारत लौट चुके हैं। हम अन्य भारतीय नागरिकों से भी आग्रह करते हैं कि जो लोग ईरान छोड़ना चाहते हैं, वे दूतावास द्वारा दी जा रही इस सहायता का लाभ उठाएं। हमारे दूतावास ने इस संबंध में एक एडवाइजरी भी जारी की है। स्कायलाइट नाम का यह विशेष कॉमर्शियल शिप हमले का शिकार हुआ था, जिसमें एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई और एक अब भी लापता है। दूसरा शिप, जिस पर हमला हुआ था, वह एमकेडी व्योम था। उसमें एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई थी, जबकि 16 अन्य भारतीय सुरक्षित अपने घर लौट चुके हैं।

सप्लाई संकट की 2 वजह
1. होर्मुज स्ट्रेट का लगभग बंद होना
भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का बंद होना है। ये करीब 167 किमी लंबा जलमार्ग है, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। ईरान जंग के कारण यह रूट अब सुरक्षित नहीं रहा है। खतरे को देखते हुए कोई भी तेल टैंकर वहां से नहीं गुजर रहा। दुनिया के कुल पेट्रोलियम का 20% हिस्सा यहीं से गुजरता है। सऊदी अरब, इराक और कुवैत जैसे देश भी अपने निर्यात के लिए इसी पर निर्भर हैं। भारत अपनी जरूरत का 50% कच्चा तेल और 54% एलएनजी इसी रास्ते से मंगाता है। ईरान खुद इसी रूट से एक्सपोर्ट करता है।

2. प्लांट पर ड्रोन हमले से एलएनजी का प्रोडक्शन रुका
पिछले हफ्ते अमेरिका-इजराइल ने ईरान पर स्ट्राइक की थी। इसके जवाब में ईरान ने यूएई, कतर, कुवैत और सऊदी जैसे देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया है। ईरान के ड्रोन हमले के बाद भारत को गैस सप्लाई करने वाले सबसे बड़े देश कतर ने अपने एलएनजी प्लांट का प्रोडक्शन रोक दिया है। इससे भारत में गैस की सप्लाई घट गई है। भारत अपनी जरूरत की 40% एलएनजी (करीब 2.7 करोड़ टन सालाना) कतर से ही आयात करता है।

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