नई दिल्ली। लोकसभा में मंगलवार को विपक्ष स्पीकर ओम बिरला को पद से हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव लाया। 50 से ज्यादा सांसदों ने प्रस्ताव के पक्ष में वोट किया। इसके बाद पीठासीन ने प्रस्ताव पेश करने की परमिशन दे दी। प्रस्ताव पर चर्चा के लिए 10 घंटे का समय तय हुआ। मंगलवार को करीब 7 घंटे चर्चा हुई। इसके बाद सदन की कार्रवाई बुधवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। विपक्ष ने ओम बिरला पर सदन की कार्यवाही में पक्षपात करने का आरोप लगाया है।
बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने की। लोकसभा में कांग्रेस के उप नेता गौरव गोगोई ने मंगलवार को कहा कि सदन में सदस्यों के साथ समान व्यवहार न किये जाने की वजह से और संसद की मर्यादा एवं गरिमा को बचाने की मंशा से विपक्ष की ओर से अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया है। श्री गोगोई ने कहा कि विपक्ष की ओर से सदन में पेश अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा की शुरुआत करते हुए कहा कि लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला का व्यक्तिगत रिश्ता सभी के साथ अच्छा है, लेकिन सदन में सभी सदस्यों के साथ समान व्यवहार नहीं होता। उन्होंने कहा कि सदन के संचालन में अध्यक्ष का कर्तव्य बहुत महत्वपूर्ण है, अध्यक्ष सदन के संरक्षक होते हैं, उन्हें सरकार की आवाज नहीं बनना चाहिए।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव पर सदन में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को अपनी बात नहीं रखने दी गयी। सत्ता पक्ष की ओर से उन्हें बीसों बार टोका गया। रक्षा मंत्री, गृह मंत्री और संसदीय कार्य मंत्री ने भी उन्हें बार-बार टोका।
श्री गोगोई ने कहा कि श्री गांधी बहुत महत्वपूर्ण मुद्दे सदन में उठाना चाहते थे। वह बता रहे थे कि चीन की सेना जब भारतीय सीमा की ओर चली आ रही थी, तो तत्कालीन सेना प्रमुख मनोज नरवणे ने रक्षा मंत्री से कार्रवाई के लिए आदेश मांगा, लेकिन बार-बार फोन कॉल करने के कई घंटे के बाद उन्हें प्रधानमंत्री की तरफ से कहलवाया गया कि 'जो उचित समझो करो।
इस पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने आपत्ति करते हुए कहा कि अविश्वास प्रस्ताव में लाये गये विषयों से हटकर चर्चा की जा रही है। इसके बाद श्री गोगोई ने कहा कि जब संसद में टोका-टाकी की गणना की जायेगी, तो स्पष्ट रूप से सामने आयेगा कि श्री रिजिजू सबसे अधिक टाेका-टाकी करने वाले संसदीय कार्य मंत्री रहे हैं।
इस बीच गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि श्री रिजिजू की ओर से टोका-टाकी इसलिए की जा रही है, क्योंकि इतना गैर जिम्मेदार विपक्ष कभी नहीं रहा। इस पर श्री गोगोई ने कहा कि अच्छा ही हुआ, श्री शाह ने यह कहकर उनके वक्तव्य का दायरा बढ़ा दिया है।
कांग्रेस के उप नेता ने कहा कि अमेरिका में न्याय विभाग की ओर से जारी दस्तावेजों में देश के एक व्यवसायी का नाम आया है। एक मंत्री का भी नाम आया है।
इस पर पीठासीन जगदंबिका पाल ने कहा क अविश्वास प्रस्ताव में लगाये गये आरोपों पर ही श्री गोगोई बोल सकते हैं, तब श्री गोगोई ने कहा कि वह तो बता रहे हैं कि श्री गांधी राष्ट्रपति के अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव पर अपने वक्तव्य में क्या-क्या कहना चाहते थे, जिसे उन्हें कहने नहीं दिया गया।
श्री गोगोई ने कहा कि प्रधानमंत्री ने अमेरिका के साथ ऐसे व्यापार समझौते पर सहमति दे दी है, जिससे देश का व्यवसाय और कृषि क्षेत्र चौपट हो जायेगा। उन्होंने पूछा कि ऐसा क्या दबाव है कि प्रधानमंत्री देश के हितों के खिलाफ जाकर ऐसे घातक समझौते पर रजामंदी दे रहे हैं। उन्होंने कहा, " क्या इसका कारण अमेरिकी में जांच , या इप्सटीन फाइल में और भी नाम हैं। "
उन्होंने कहा कि देश जानना चाहता है जनरल नरवणे ने जो बातें अपनी किताब में कही हैं, क्या वे खोखली हैं, या जनरल नरवणे झूठ बोल रहे हैं, यह बातें देश की जनता के सामने आनी चाहिए। "
इससे पहले कांग्रेस के मोहम्मद जावेद ने श्री बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया, जिसका 50 से अधिक सदस्यों ने खड़े होकर समर्थन किया।
इस पर आल इंडिया मजलिस-ए- इत्तेहादुल मुस्लिमीन के असदुद्दीन ओवैसी ने नियमों का हवाला देते हुए कहा कि श्री बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाये जाने के बाद उनके द्वारा नियुक्त पैनल के सदस्य पीठासीन नहीं हो सकते। इस समय लोक सभा का कोई उपाध्यक्ष नहीं है, अत: सदन की राय लेने के बाद कोई सदस्य इस प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान पीठासीन हो सकता है। कांग्रेस के के सी वेणुगोपाल और तृणमूल कांग्रेस के सौगत राय ने भी इसी तरह की राय जाहिर की, लेकिन श्री पाल ने उनके 'व्यवस्था के प्रश्न' को अस्वीकार कर दिया।