Head Office

SAMVET SIKHAR BUILDING RAJBANDHA MAIDAN, RAIPUR 492001 - CHHATTISGARH

tranding

0 शीर्ष अदालत ने कहा- 11 साल से नहीं हुआ बदलाव
0 4 महीने में फैसला लेने का निर्देश
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को एम्प्लॉई प्रोविडेंट फंड ऑर्गेनाइजेशन (ईपीएफओ) की सैलरी लिमिट (वेज सीलिंग) बढ़ाने पर विचार करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि पिछले 11 साल से इस लिमिट में कोई बदलाव नहीं हुआ है, इसलिए सरकार को अगले 4 महीने के भीतर इस पर फैसला लेना चाहिए।
फिलहाल, 15,000 से ज्यादा मंथली सैलरी पाने वाले एम्प्लॉई इस सोशल सिक्योरिटी स्कीम के अनिवार्य दायरे से बाहर हैं। जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस एएस चांदुरकर की बेंच ने एक्टिविस्ट नवीन प्रकाश नौटियाल की याचिका पर यह आदेश दिया।
कोर्ट ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिया है कि वह दो सप्ताह के भीतर केंद्र सरकार को अपना प्रेजेंटेशन सौंपें, जिस पर सरकार को समय सीमा के भीतर फैसला लेना होगा।

11 साल से सैलरी लिमिट 15,000 पर स्थिर
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील प्रणव सचदेवा और नेहा राठी ने दलील दी कि ईपीएफओ की सैलरी लिमिट में आखिरी बार 2014 में बदलाव किया गया था। तब इसे 6,500 से बढ़ाकर 15,000 किया गया था। पिछले एक दशक में महंगाई और न्यूनतम वेतन में भारी बढ़ोतरी हुई है, लेकिन ईपीएफओ की लिमिट वहीं अटकी हुई है। इसके कारण करोड़ों कर्मचारी इस सोशल सिक्योरिटी के लाभ से वंचित रह जाते हैं।

न्यूनतम वेतन से भी कम है ईपीएफओ की लिमिट
याचिका में कहा गया है कि केंद्र और कई राज्यों द्वारा तय किया गया न्यूनतम वेतन अब 15,000 की इस लिमिट से ज्यादा हो चुका है। ऐसे में जो कर्मचारी न्यूनतम मजदूरी पा रहे हैं, वे भी ईपीएफओ के दायरे से बाहर हो जा रहे हैं। वकील सचदेवा ने कहा कि यह एक कल्याणकारी योजना है, लेकिन इसकी पुरानी लिमिट के कारण ज्यादातर कामगारों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।

2022 में ईपीएफओ की सब-कमेटी ने की थी सिफारिश
रिपोर्ट के अनुसार, ईपीएफओ की अपनी सब-कमेटी ने 2022 में सिफारिश की थी कि कवरेज बढ़ाने के लिए सैलरी लिमिट को बढ़ाया जाना चाहिए। जुलाई 2022 में सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज (सीबीटी) ने भी इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी थी। याचिका में आरोप लगाया गया कि बोर्ड की मंजूरी के बावजूद केंद्र सरकार ने अब तक इस पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है।

क्या होगा बदलाव का असर?
अगर केंद्र सरकार सैलरी लिमिट को 15,000 से बढ़ाकर 21,000 या उससे ज्यादा करती है, तो संगठित क्षेत्र के लाखों नए कर्मचारी ईपीएफओ के दायरे में आ जाएंगे। इससे उनकी रिटायरमेंट सेविंग्स बढ़ेगी और उन्हें पेंशन व बीमा (ईडीएलआई)  का लाभ भी मिल सकेगा। हालांकि, इससे कंपनियों और सरकार पर वित्तीय बोझ भी बढ़ेगा, क्योंकि उन्हें भी ईपीएफ में अपना योगदान देना होगा।