0 सुप्रीम कोर्ट बोला- जांच पारदर्शी रहे, ताकि आम लोगों को परेशानी न हो
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पश्चिम बंगाल के 1.25 करोड़ वोटर्स को अपना नाम वोटर लिस्ट में जुड़वाने के लिए एक और मौका दिया। कहा कि वे 10 दिन में अपने डॉक्यूमेंट्स चुनाव आयोग को पेश करें।
चुनाव आयोग ने राज्य में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) के दौरान नाम, सरनेम, आयु में गड़बड़ी की वजह 1.25 करोड़ वोटर्स को लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी नोटिस जारी किया था।
कोर्ट ने कहा कहा चुनाव आयोग गड़बड़ी वाली वोटर लिस्ट ग्राम पंचायत भवन, ब्लॉक कार्यालय और वार्ड कार्यालय में सार्वजनिक लगाए, ताकि लोगों को पता चल सके। सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस जोयमाल्या बागची की बेंच ने कहा- सिर्फ तर्क के आधार पर आम लोगों को परेशान नहीं किया जा सकता है। वोटर लिस्ट में सुधार की प्रक्रिया जरूरी है, लेकिन यह पारदर्शी और समय पर हो। चुनाव आयोग लोगों की परेशानी को समझे।
15 जनवरी: चुनाव आयोग ने कहा था- हम देश निकाला नहीं दे रहे
चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि एसआईआर के तहत आयोग सिर्फ यह तय करता है कि कोई व्यक्ति वोटर लिस्ट में रहने के योग्य है या नहीं। इससे सिर्फ नागरिकता वेरिफाई की जाती है। एसआईआर से किसी का डिपोर्टेशन (देश से बाहर निकालना) नहीं होता, क्योंकि देश से बाहर निकालने का अधिकार केवल केंद्र सरकार के पास है।
6 जनवरी: चुनाव आयोग ने कहा- लिस्ट को सही रखना हमारा काम
चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि उसे वोटर लिस्ट का स्पेशल इंटेसिव रिविजन (एसआईआर) कराने का पूरा अधिकार है। आयोग ने यह भी बताया कि उसकी संवैधानिक जिम्मेदारी है कि कोई भी विदेशी नागरिक वोटर लिस्ट में शामिल न हो। आयोग की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ वकील ने कहा कि संविधान के अनुसार राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और जज जैसे सभी प्रमुख पदों पर नियुक्ति के लिए भारतीय नागरिक होना अनिवार्य शर्त है।