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0 देश का 'आर्थिक रिपोर्ट कार्ड' संसद में पेश
नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज 29 जनवरी को देश का 'आर्थिक रिपोर्ट कार्ड' यानी इकोनॉमिक सर्वे लोकसभा में पेश किया। इस सर्वे में बताया गया है वित्त वर्ष 2026-2027 में जीडीपी ग्रोथ 6.8% से 7.2% की रेंज में रहने का अनुमान है। इसके अलावा महंगाई, खेती-किसानी की क्या हालत है और क्या आने वाले समय में नई नौकरियां बढ़ेंगी इसकी भी जानकारी सर्वे में दी गई है। 

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा गुरुवार को संसद में पेश इस सर्वेक्षण के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) प्रथम में 99.6 प्रतिशत से अधिक पात्र घरों को संपर्क सुविधा प्रदान कर योजना के द्वितीय चरण में 6,664 सड़कों पर 49,791 किलोमीटर का निर्माण और 759 पुलों का कार्य पूरा हुआ है और अब तीसरे चरण की योजना अपने पूर्ण होने के अग्रिम चरण पर है। सभी के लिए आवास योजना के तहत प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण क्रियान्वित की जा रही है और गत 11 वर्षों में 3.70 करोड़ आवासों के निर्माण का काम पूरा हुआ है। ग्रामीण क्षेत्रों में 'हर घर जल' की महत्वकांक्षी योजना में जल जीवन मिशन के तहत 15.74 करोड़ यानी 81.31 प्रतिशत घरों को इसके दायरे में लाया गया है। स्वामित्व योजना के तहत लक्षित लगभग 3.44 लाख गांवों के मुकाबले 3.28 लाख गांवों का ड्रोन सर्वेक्षण पूरा कर लिया गया है।

सर्वेक्षण में कहा गया है कि 25 दिसम्बर 2000 को पीएमजीएसवाई-प्रथम की शुरुआत हुई थी जिसका प्राथमिक उद्देश्य 2001 की जनगणना के अनुसार मैदानी क्षेत्रों के ग्रामीण इलाकों में 500 व्यक्ति या उससे अधिक और पूर्वोत्तर तथा पवर्तीय क्षेत्रों में 250 व्यक्ति या उससे अधिक की बिना संपर्क पात्र आबादी को सभी मौसम के अनुकूल सड़क सुविधा से जोड़ना है और योजना के तहत इस साल 15 जनवरी तक 99.6 प्रतिशत पात्र आवासों तक यह संपर्क सुविधा प्रदान करा दी गई है। इसके अलावा 1,64,581 सड़कों और 7,453 पुलों की मंजूरी दी गई है तथा 1,63,665 सड़कों (6,25,117 किमी) और 7,210 पुलों का निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया है। योजना का दूसरा चरण 2013 में शुरू हुआ जिसमें 6,664 सड़कों (49,791 किमी) और 759 पुलों को मंजूरी दी गई और गत 15 जनवरी तक 6,612 सड़कों (49,087 किमी) और 749 पुलों का निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया है।

वित्त मंत्री द्वारा पेश सर्वेक्षण के अनुसार बड़े ग्रामीण क्षेत्रों के पर्यावासों, ग्रामीण कृषि बाजारों, उच्चतर माध्यमिक स्कूलों तक संपर्क सुविधा प्रदान करने के लिए 1,25,000 किलोमीटर लंबे मार्गों के निर्माण के लिए जुलाई 2019 में पीएमजीएसवाई के तीसरे चरण को मंजूरी दी थी और इस योजना के तहत 15,965 सड़कों (1,22,363 किलोमीटर) और 3,211 पुलों को मंजूरी दी गई थी और 15 जनवरी 2026 तक 12,699 सड़कों (1,02,926 किलोमीटर) तथा 1,734 पुलों का निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया।

ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ जल आपूर्ति को लेकर कहा गया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में 'हर घर जल' के महत्वकांक्षी लक्ष्य को पूरा करने के लिए सरकार राज्यों के सहयोग से अगस्त 2019 से जल जीवन मिशन योजना लागू कर रही है। योजना की शुरुआत में केवल 3.23 करोड़ (17 प्रतिशत) ग्रामीण आवासों के पास स्वच्छ पेयजल की सुविधा थी और 20 नवम्बर 2025 तक इसके दायरे में 12.50 करोड़ से अधिक आवासों को लाया गया। योजना के दायरे में शामिल आवासों की संख्या बढ़कर 15.74 करोड़ (81.30 प्रतिशत) हो गई, जो ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन की गुणवत्ता में सुधार कर रहा है।

सर्वेक्षण के अनुसार ग्रामीण तकनीक समावेशी विकास के लिए अत्याधुनिक मोबाईल फोन, सैटेलाइट इंटरनेट और कृषि के क्षेत्र में डिजिटल उपकरणों जैसे नवाचार 'डिजिटल क्षेत्र' के अंतराल को कम कर कर रहे हैं और दूरस्थ क्षेत्रों में आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही है।

दिसंबर 2025 तक, स्वामित्व योजना के तहत ड्रोन समीक्षा लगभग 3.44 लाख अधिसूचित गांवों के लक्ष्य के मुकाबले 3.28 लाख गांवों में पूर्ण किया जा चुका है। लगभग 1.82 लाख गांवों के लिए 2.76 करोड़ संपत्ति कार्ड तैयार किए गए हैं। वर्ष 2023–24 के दौरान, अग्रणी उर्वरक कंपनियों ने अपने स्वयं के संसाधनों से स्वयं सहायता समूहों की ड्रोन दीदियों को 1,094 ड्रोन वितरित किए, जिनमें से नमो ड्रोन दीदी योजना के अंतर्गत 500 ड्रोन प्रदान किए गए।

इसके साथ ही डिजिटल भारत भूमि रिकॉर्ड आधुनिकीकरण कार्यक्रम चलाया जा रहा है जिसके तहत वित्त वर्ष 2008 से ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि के रिकॉर्ड के कम्प्यूटरीकरण और डिजिटलीकरण को क्रियान्वित कर रही है। राष्ट्रीय स्तर पर ग्रामीण क्षेत्रों में कुल उपलब्ध भूमि रिकॉर्डों का 99.8 प्रतिशत मालिकाना रिकॉर्ड डिजिटलीकरण का कार्य पूरा किया जा चुका है।

सरकारी कर्ज
केंद्र सरकार ने राजकोषीय घाटे को कम करने का लक्ष्य तय समय से पहले ही हासिल कर लिया है। वित्त वर्ष 2025 में यह जीडीपी का 4.8% रहा, जबकि सरकार ने वित्त वर्ष 2026 के लिए 4.4% का लक्ष्य रखा है। सरकार अपनी कमाई से ज्यादा जो खर्च करती है, उसे 'राजकोषीय घाटा' कहते हैं। घाटा कम होने का मतलब है-मजबूत इकोनॉमी और कम महंगाई।

विदेशी मुद्रा भंडार
दुनियाभर में मंदी की आहट के बीच भारत की विदेशी मुद्रा भंडार 2023-2024 में 668 बिलियन डॉलर था। ये 2024-2025 में बढ़कर 701 बिलियन डॉलर पहुंच गया है। यह भंडार जितना भरा होगा, डॉलर के मुकाबले हमारा रुपया उतना ही मजबूत रहेगा।