0 महिलाओं को 33% आरक्षण मिलेगा, सीटें बढ़ाने पर दक्षिणी राज्यों का विरोध
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने लोकसभा की कुल सीटों को 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव रखा है। इसका ड्राफ्ट बिल सांसदों के साथ शेयर किया है। प्रस्ताव के मुताबिक, 850 में से 815 सीटें राज्यों को और 35 सीटें केंद्र शासित प्रदेशों को दी जाएंगी।
सरकार इस बदलाव के लिए संविधान संशोधन की तैयारी में है। इस प्रस्ताव को लागू करने के लिए संविधान के अनुच्छेद 81 में संशोधन किया जाएगा। इसके लिए 16 अप्रैल से संसद का तीन दिन का विशेष सत्र बुलाया गया है। इसमें महिला आरक्षण बिल पर भी चर्चा होगी।
इस बिल को 2029 के आम चुनाव से लागू करने की योजना है। यह कदम देश में संसदीय प्रतिनिधित्व को बड़े स्तर पर बदल सकता है, हालांकि इस पर विरोध भी शुरू हो गया है।
यूपी में सबसे ज्यादा 40 सीटें बढ़ सकती है
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, महिला आरक्षण के बाद यूपी में सबसे ज्यादा 40 लोकसभा सीटें बढ़ सकती है। यहां 80 से बढ़कर 120 हो जाएंगी। महाराष्ट्र में महिलाओं के लिए 24 सीटें आरक्षित हो जाएंगी। यहां लोकसभा की सीटें 48 से बढ़कर 72 हो जाएंगी। रिपोर्ट्स के मुताबिक बिहार में महिला सीटों की संख्या 20 हो सकती है। यहां कुल सीटें 40 से 60 तक पहुंच सकती है। मध्यप्रदेश में 15 महिला आरक्षित सीटें बढ़ सकती हैं। तमिलनाडु में 20 और दिल्ली में 4 यानी महिला सीटें होंगी। झारखंड में 7 महिला आरक्षित सीटें बढ़ने का अनुमान है।
2011 जनगणना के आधार पर परिसीमन
बिल में सीटों के पुनर्निर्धारण (परिसीमन) के लिए 2011 की जनगणना के आंकड़ों को आधार बनाने की बात कही गई है। फिलहाल आधिकारिक जनसंख्या आंकड़े 2011 जनगणना के ही हैं। सरकार इस प्रक्रिया को तेज करने के लिए संविधान संशोधन बिल, परिसीमन कानून से जुड़ा बिल और दिल्ली, जम्मू-कश्मीर व पुडुचेरी जैसे विधानसभा वाले केंद्र शासित प्रदेशों के लिए एक अलग बिल भी लोकसभा में पेश करेगी।
दक्षिणी राज्यों का विरोध
तमिलनाडु सीएम एमके स्टालिन ने इसका विरोध करते हुए कहा कि दक्षिणी राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण के लिए केंद्र की नीतियों का पालन किया, लेकिन अब उन्हें इसकी सजा मिल रही है। प्रधानमंत्री से संसद में यह भरोसा देने की मांग की है कि दक्षिणी राज्यों के हित प्रभावित नहीं होंगे, लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं मिला है।
वहीं तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने कहा कि अगर सीटें अनुपात के आधार पर बढ़ाई गईं, तो दक्षिणी राज्यों में महिलाओं, एससी और एसटी समुदायों को नुकसान हो सकता है। यह कदम दक्षिणी राज्यों की राजनीतिक ताकत को कम करने की साजिश हो सकता है।