रायपुर। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 66 हस्तियों को पद्म पुरस्कार से सम्मानित किया है। छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा और अबूझमाड़ जैसे दूर-दराज और नक्सल प्रभावित इलाकों में वर्षों से चिकित्सा सेवा दे रहे डॉक्टर दंपती डॉ. रामचंद्र त्रयम्बक गोडबोले और डॉ. सुनीता गोडबोले को पद्मश्री सम्मान मिला है।
द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह फेज 1 में गोडबोले दंपती को यह सम्मान प्रदान किया। डॉक्टर दंपती लंबे समय से आदिवासी और ग्रामीण इलाकों में लोगों का इलाज कर मानव सेवा का काम कर रहे हैं। उनके इस समर्पण और सेवा को देखते हुए केंद्र सरकार ने उन्हें देश के प्रतिष्ठित सम्मान से नवाजा है।
डॉक्टर रामचंद्र गोडबोले और डॉक्टर सुनीता गोडबोले ने अब तक 1 लाख से ज्यादा मरीजों का फ्री में इलाज किया है। समाज सेवा के लिए दंपती को अवार्ड मिला है।
डॉ. रामचंद्र गोडबोले और उनकी पत्नी सुनीता गोडबोले दंतेवाड़ा के आदिवासी इलाके में पिछले 35 साल से नि:शुल्क स्वास्थ्य सेवाएं दे रहे हैं। ये दोनों पति-पत्नी हैं। मूल रूप से महाराष्ट्र के सतारा के रहने वाले हैं। 1990 में बारसूर (दंतेवाड़ा) आकर बस गए।
तब से ये दक्षिण बस्तर, बीजापुर और सुकमा के वनवासी समुदाय की सेवा में अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। गोडबोले दंपती MAAS योजना के तहत बच्चों को कुपोषण और एनीमिया से बचाने का काम कर रहे हैं। इसके साथ ही दूर-दराज के गांवों में मेडिकल कैंप लगाते हैं। लगातार फॉलो-अप करते हैं।
मेरे सामने बैठा हर आदिवासी मेरे लिए भगवानः डॉ. रामचंद्र
डॉ. रामचंद्र जिन्हें लोग प्यार से "डॉक्टर भैया" कहते हैं, अब तक 1 लाख से ज्यादा मरीजों का इलाज कर चुके हैं। वहीं सुनीता गोडबोले आदिवासी महिलाओं के संगठन और स्वास्थ्य जागरूकता में सक्रिय रूप से काम कर रही हैं। साथ ही स्कूल के बच्चों को स्वास्थ्य शिक्षा और संस्कार भी देते हैं। डॉ. गोडबोले का कहना है कि मेरे सामने बैठा हर आदिवासी मेरे लिए भगवान है।