Head Office

SAMVET SIKHAR BUILDING RAJBANDHA MAIDAN, RAIPUR 492001 - CHHATTISGARH

tranding

0 केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री ने कहा-कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक मौजूदा ऊंचे स्तर पर नहीं बनी रहेंगी 
 
नई दिल्ली। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने सोमवार को कहा कि अगर खाड़ी क्षेत्र का मौजूदा संकट अन्य इलाकों तक फैलता है, तो इससे नई समस्याएं पैदा हो सकती हैं और स्थिति चिंताजनक हो सकती है। समाचार चैनल सीएनएन-न्यूज18 से बातचीत में उन्होंने कहा कि भारत के पास कुल तेल और गैस का इतना भंडार है, जो 76 से 80 दिनों तक देश की जरूरतों को पूरा कर सकता है।

खाड़ी क्षेत्र में जारी तनाव का जिक्र करते हुए पुरी ने कहा कि यह संघर्ष केवल मौजूदा क्षेत्र तक सीमित नहीं रह सकता। आप जानते हैं कि दूसरी जगहों पर भी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। संभव है कि कोई दूसरा मोर्चा भी खुल जाए। ऐसी स्थिति चिंताजनक होगी। 

भारत की सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने मई के मध्य से अब तक चार बार ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी की है। यह कदम युद्ध के चलते पैदा हुई सप्लाई की दिक्कतों के असर को कम करने के लिए उठाया गया है। इससे पहले राज्य चुनावों के चलते कंपनियां कीमतें बढ़ाने से बच रही थीं। मौजूदा समय में पेट्रोल की कीमतें लगभग 7.8 फीसदी और डीजल की कीमतें करीब 8.6 फीसदी बढ़ चुकी हैं।

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक मौजूदा ऊंचे स्तर पर नहीं बनी रहेंगी और आने वाले महीनों में इनमें गिरावट आने की उम्मीद है। हालांकि उन्होंने चेतावनी दी कि अगर खाड़ी क्षेत्र का संकट अन्य इलाकों तक फैलता है, तो स्थिति चिंताजनक हो सकती है। पुरी ने कहा कि भारत के पास 76 से 80 दिनों की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त तेल और गैस भंडार मौजूद है।

होर्मुज से सप्लाई प्रभावित
युद्ध के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाली आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिसके चलते वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में करीब 40 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है और कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं। युद्ध से पहले दुनिया के कुल तेल और गैस आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता था। युद्ध शुरू होने से पहले भारत अपने कुल कच्चे तेल आयात का 40 फीसदी से अधिक और रसोई गैस (एलपीजी) आयात का करीब 90 फीसदी हिस्सा इसी मार्ग से प्राप्त करता था। श्री पुरी ने यह भी कहा कि अमेरिका और कनाडा समेत पश्चिमी ग्लोब के सप्लायर्स से आपूर्ति बढ़ने की उम्मीद है, जिससे संभावित कमी की भरपाई हो सकेगी। भारत लगातार इस युद्ध को समाप्त करने के लिए बातचीत और कूटनीतिक समाधान की वकालत करता रहा है। इस संघर्ष ने व्यापार और यात्रा को प्रभावित किया है तथा हजारों लोगों की जान जा चुकी है।

सोमवार को भारत के विदेश मंत्रालय ने भी संघर्ष के फिर से तेज होने पर “गहरी चिंता” जताई और सभी पक्षों से तत्काल तनाव कम करने तथा कूटनीतिक समाधान के लिए चल रही वार्ताओं को जल्द निष्कर्ष तक पहुंचाने की अपील की।