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नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने देश में सेमीकंडक्टर विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए 1.27 लाख करोड़ रुपये के बजटीय प्रावधान वाले 'सेमीकॉन 2.0' को बुधवार को मंजूरी प्रदान की।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में गुरुवार को यहां हुई मंत्रिमंडल की बैठक में इससे संबंधित प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की गयी। बैठक के बाद केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि देश के सेमीकंडक्टर डिजाइन और विनिर्माण पारितंत्र के विकास के लिए अगले छह साल में 1,27,500 करोड़ रुपये के कुल बजटीय प्रावधान के साथ 'सेमीकॉन 2.0' को मंजूरी दी गयी है। इसका लक्ष्य देश को वैश्विक सेमीकंडक्टर मानचित्र पर एक महत्वपूर्ण स्थान दिलाने की सरकार की प्रतिबद्धता को और मजबूत करना है।

उन्होंने कहा कि मिसाइल से लेकर ड्रोन तक, तोप से जहाज तक, कंप्यूटर से कैमरा तक और एक्स-रे से सिनेमा तक सबके पीछे चिप की ताकत है। सेमीकॉन 2.0 में कुल चार लाख करोड़ रुपये का निवेश आने की उम्मीद है। सालाना दो लाख करोड़ रुपये का उत्पादन और एक लाख करोड़ रुपये का निर्यात होने की उम्मीद है।

बाद में संवाददाताओं के सवालों के जवाब में उन्होंने बताया कि चिप निर्माण में रणनीतिक क्षेत्र को प्राथमिकता दी जायेगी और वाणिज्यिक चिप का निर्माण बाजार की मांग के आधार पर होगा। एक अन्य प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि गुजरात के धोलेरा में टाटा के सेमीकंडक्टर संयंत्र के निर्माण का कार्य तेजी से चल रहा है। साल 2028 तक संयंत्र में उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है।

आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि सेमीकॉन 2.0 छह प्रमुख स्तंभों - डिजाइन, मशीनें और सामग्री, अधिक फैब इकाइयों की स्थापना, एटीएमपी/ओएसएटी उद्योग को और मजबूत बनाना, अनुसंधान एवं विकास और प्रतिभा विकास - पर आधारित एक समग्र सेमीकंडक्टर पारितंत्र के निर्माण का लक्ष्य रखता है। सेमीकॉन 2.0 चिप डिजाइन के क्षेत्र में मिली शुरुआती सफलता को आगे बढ़ायेगा। वर्तमान में 105 स्टार्टअप चिप विकास में जुटे हुए हैं। इस योजना के अंतर्गत बौद्धिक संपदा, चिप डिजाइन तथा सिस्टम डिजाइन विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।

नयी योजना के तहत सेमीकंडक्टर निर्माण के लिए आवश्यक मशीनें बनाने, अनुसंधान एवं विकास, तथा आवश्यक सामग्री, रसायन और गैसों के उत्पादन से जुड़ी कंपनियों को प्रोत्साहन दिया जायेगा। पहली सेमीकंडक्टर फैब के वर्ष 2028 तक शुरू होने की संभावना के साथ देश की सेमीकंडक्टर रणनीति पर वैश्विक विश्वास बढ़ा है। अधिक से अधिक कंपनियों को भारत में आकर चिप निर्माण के लिए फैब स्थापित करने हेतु प्रोत्साहित किया जायेगा। इसमें सिलिकॉन फैब, कंपाउंड सेमीकंडक्टर फैब, डिस्क्रीट कंपोनेंट फैब, डिस्प्ले फैब आदि शामिल होंगे।

विज्ञप्ति में कहा गया है कि एटीएमपी (असेम्बली, परीक्षण, मार्किंग और पैकेजिंग) इकाइयों की सफलता के बाद भारत अब वैश्विक स्तर पर एटीएमपी/ओएसएटी (आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर एसेम्बली एंड टेस्ट) इकाइयों की स्थापना के लिए एक आकर्षक विकल्प बनकर उभरा है। सरकार इन इकाइयों को सक्रिय रूप से प्रोत्साहित करेगी तथा अत्याधुनिक एटीएमपी प्रौद्योगिकियों को देश में लाने पर विशेष ध्यान देगी। सेमीकॉन 2.0 में और अधिक उन्नत नोड्स तथा अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों के विकास पर ध्यान दिया जायेगा। इसके लिए देश और विदेश के अग्रणी अनुसंधान एवं विकास संस्थानों के साथ सहयोग किया जायेगा।

सरकार ने कहा है कि 315 विश्वविद्यालयों में नवीनतम ईडीए टूल्स के माध्यम से जटिल चिप डिजाइन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। अब तक लगभग 68,000 छात्रों को प्रशिक्षित किया जा चुका है। अब इस प्रशिक्षण का और विस्तार किया जायेगा। साथ ही उद्योग जगत की सक्रिय भागीदारी से क्लीन रूम, फैब निर्माण और अन्य संबंधित क्षेत्रों में भी प्रशिक्षण को सुदृढ़ किया जायेगा।

सेमीकॉन 1.0 में अब तक कुल 12 विनिर्माण इकाइयों को स्वीकृति दी जा चुकी है, जिनमें 1.64 लाख करोड़ रुपये से अधिक का संचयी निवेश प्रस्तावित है। इनमें से तीन संयंत्रों में उत्पादन शुरू हो गया है। माइक्रोन, केन्स और सीजी सेमी ने व्यावसायिक उत्पादन शुरू कर दिया है तथा एक अन्य इकाई के वर्ष 2026 में उत्पादन प्रारंभ करने की संभावना है।

इसके अलावा स्टार्टअप और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएमएमई) की 24 सेमीकंडक्टर डिजाइन परियोजनाओं को वित्तीय सहायता के लिए स्वीकृति दी गयी है। साथ ही 105 स्टार्टअप एवं एमएसएमई को उद्योग-मानक इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन ऑटोमेशन टूल्स तक पहुंच प्रदान की गयी है।