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नई दिल्ली। देश में मोबाइल विनिर्माण तंत्र को और विस्तृत तथा गहन बनाने तथा भारतीय मोबाइल ब्रांडों को विकसित करने के उद्येश्य से केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को एक मोबाइल फोन विनिर्माण योजना (एमपीएमएस) को मंजूरी दे दी है। पांच वर्ष की इस योजना के लिए 62,500 करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान किया गया है।

योजना के अंतर्गत भारत में मोबाइल फोन निर्माण पर पात्र बिक्री के आधार पर 2.25 प्रतिशत से 5 प्रतिशत तक की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। इसके अलावा मोबाइल फोन के मुख्य हिस्से पुर्जों के घरेलू विनिर्माण और घरेलू स्तर पर खरीद को भी प्रोत्साहन दिया जाएगा।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में यहां मंत्रिमंडल की बैठक में लिये गये निर्णयों की जानकारी देते हुए सूचना प्रसारण, इलेक्ट्रानिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी एवं रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि मोबाइल फोन विनिर्माण योजना देश में मोबाइल का उत्पादन और अधिक बढ़ाने, घरेलू मूल्य संवर्धन का विस्तार करने, आपूर्ति श्रृंखला को अधिक मजबूत बनाने तथा वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू की जा रही है।

मोदी सरकार द्वारा इलेक्ट्रानिक उत्पादों के घरेलू विनिर्माण को प्रोत्साहित करने के लिए 2021 में शुरू की गयी उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना (पीएलआई योजना) से भारत को मोबाइल फोन निर्माण और निर्यात का वैश्विक केंद्र बनाने में बड़ी मदद मिली है। इस योजना की अवधि 31 मार्च 2026 को समाप्त हो गई है।

उन्होंने कहा कि योजना का लक्ष्य भारतीय ब्रांडों को विकसित करना, तकनीकी आत्मनिर्भरता प्राप्त करना, अधिक आर्थिक मूल्य सृजित करना तथा डिजाइन एवं अनुसंधान एवं विकास के क्षेत्र में अधिकाधिक संख्या में भारतीय पेटेंट विकसित करना है। यह योजना पांच वर्ष के लिए है और इस वित्त वर्ष में शुरू हो कर 2030-31 तक लागू रहेगी।

श्री वैष्णव ने कहा कि भारत में 2014 तक अधिकांश मोबाइल बाहर से आते थे और देश में उनका विनिर्माण बहुत कम था। आज भारत में इस्तेमाल हो रहे 99.2 प्रतिशत मोबाइल फोन भारत में बनते हैं। उन्होंने घरेलू मूल्य वर्धन के विस्तार से जुड़े एक सवाल पर कहा कि मोबाइल फोन का विनिर्माण एक वैश्विक विनिर्माण श्रृंखला के तहत होता है। चीन में मोबाइल विनिर्माण में घरेलू हिस्से पुर्जों का अनुपात इस समय सर्वाधिक 38 प्रतिशत है जो उसने इलैक्ट्रानिक्स कारोबार में 35 वर्ष के बाद हासिल किया है। भारत ने बहुत कम समय में 34 प्रतिशत घरेलू मूल्य वर्धन का स्तर हासिल कर लिया। उन्होंने कहा कि नयी नीति से घरेलू मूल्य वर्धन का विस्तार होगा और भारतीय मोबाइल ब्रांड मजबूत होंगे।

मंत्रिमंडल की बैठक के बाद जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि इस योजना के अंतर्गत भारत में मोबाइल फोन निर्माण पर पात्र बिक्री के आधार पर 2.25 प्रतिशत से 5 प्रतिशत तक की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। प्रमुख पुर्जों एवं उप-असेंबली की घरेलू खरीद से जुड़ी शर्तों को पूरा करने पर अधिकतम 1.5 प्रतिशत अतिरिक्त प्रोत्साहन भी मिलेगा।

इस योजना के तहत भारतीय ब्रांडों को बढ़ावा देने के लिए उत्पाद के डिजाइन एवं अनुसंधान एवं विकास (आए एंड डी) पर पात्र बिक्री के आधार पर 3 प्रतिशत अतिरिक्त प्रोत्साहन दिया जाएगा।
सरकार का कहना है कि इस योजना की अवधि के दौरान देश में मोबाइल फोन का कुल उत्पादन लगभग 39 लाख करोड़ रुपये तक पहुँचने की संभावना है। इसके साथ ही मोबाइल फोन के निर्यात में भी उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है। इस योजना से लगभग 60,000 प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की संभावना है, जिससे आर्थिक विकास, रोजगार सृजन तथा भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण केंद्र के रूप में और अधिक मजबूत बनाने में सहायता मिलेगी।

सरकार का कहना है कि प्रधानमंत्री के "मेक इन इंडिया" विजन के तहत वित्तीय वर्ष 2014-15 से अब तक इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में सात गुना तथा इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में 11 गुना वृद्धि हुई है। इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र विशेष रूप से दूर-दराज़ के ग्रामीण क्षेत्रों के युवा पुरुषों और महिलाओं के लिए रोजगार का एक प्रमुख स्रोत बनकर उभरा है। कई विनिर्माण संयंत्रों में एक ही स्थान पर 5,000 से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं। मोबाइल फोन विनिर्माण इस विकास का प्रमुख आधार रहा है और यह भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र का मुख्य स्तंभ बन चुका है। वर्तमान में भारत उत्पादन की मात्रा के आधार पर दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता है । वर्ष 2025 में स्मार्टफोन भारत का सबसे बड़ा निर्यात उत्पाद बनकर उभरा, जिसने डीज़ल ईंधन और कटे हुए हीरों जैसे पारंपरिक प्रमुख निर्यात उत्पादों को पीछे छोड़ दिया। आज मोबाइल फोन भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन और निर्यात का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं तथा वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में भारत की स्थिति को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।