नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र से पहले रविवार को यहां हुई सर्वदलीय बैठक में सरकार ने विपक्ष से सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलाने में सहयोग की अपील करते हुए विपक्ष को भरोसा दिया है कि उसके सभी मुद्दों पर चर्चा कराई जाएगी और सत्र के दौरान लाए जाने वाले विधेयकों की जानकारी भी पहले से विपक्षी दलों को दी जाएगी।
करीब तीन घंटे तक चली बैठक के बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने संवाददाताओं से कहा कि सर्वदलीय बैठक अच्छे और सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई, जिसमें सभी राजनीतिक दलों ने अपने सुझाव और विचार रखे। सरकार ने सभी सुझावों को गंभीरता से सुना है और उन पर ध्यान दिया है। उन्होंने कहा कि संसदीय लोकतंत्र में हर दल को अपनी बात रखने की पूरी स्वतंत्रता है और सरकार चाहती है कि संसद की कार्यवाही सुचारू रूप से चले।
उन्होंने कहा कि सरकार विपक्ष द्वारा उठाए जाने वाले सभी मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार है। मानसून सत्र के लिए फिलहाल आठ विधेयक सूचीबद्ध किए गए हैं और यदि कोई अतिरिक्त विधायी कार्य होगा तो संसदीय परंपराओं के अनुरूप उसकी जानकारी भी पहले से राजनीतिक दलों को दी जाएगी। उनका कहना था कि संसद की कार्यवाही बाधित होने से किसी को राजनीतिक लाभ नहीं मिलता, बल्कि लोकतंत्र प्रभावित होता है और जनता के समय तथा धन की बर्बादी होती है।
तृणमूल कांग्रेस से अलग हुए 20 सांसदों को सर्वदलीय बैठक में आमंत्रित करने पर विपक्ष के वॉकआउट संबंधी सवाल पर श्री रिजिजू ने कहा कि इन सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष से नेशनल सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) के रूप में मान्यता देने का अनुरोध किया है, जिस पर विचार चल रहा है। सरकार का दायित्व है कि किसी भी सांसद को उसके अधिकारों से वंचित न किया जाए और इसी कारण सभी सांसदों को बैठक में आमंत्रित किया गया।
सूत्रों के अनुसार बैठक में कुछ दलों के नेताओं के बीच परस्पर सवाल जवाब भी हुए। बैठक के दौरान जनता दल (यू) के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने पश्चिम एशिया की स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां के हालात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पैदा नहीं किए हैं, लेकिन संकट के समय उनका नेतृत्व और प्रबंधन सराहनीय रहा है। इस पर माकपा सांसद जॉन ब्रिटास ने कहा कि पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात प्रधानमंत्री के एक मित्र की वजह से बने हैं।
बैठक के बाद एनसीपीआई का प्रतिनिधित्व कर रहे सांसद सुदीप बंदोपाध्याय ने कहा कि उनकी पार्टी को निर्वाचन आयोग से मान्यता देने का अनुरोध किया गया है और इससे संबंधित पत्र लोकसभा अध्यक्ष को सौंपा जाएगा। उन्होंने कहा कि सदन में राजनीतिक दलों को उनकी वास्तविक संख्या के अनुरूप प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए तथा विपक्ष को भी पर्याप्त अवसर दिए जाने चाहिए।
उल्लेखनीय है कि संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से 13 अगस्त तक चलेगा। चार सप्ताह तक चलने वाले इस सत्र में कुल 19 बैठकें प्रस्तावित हैं, जिसमें आठ विधेयक पेश होने की संभावना है।