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0 बासिल दूसरे नंबर पर रहे, लॉन्ग जंप में मुरली को सिल्वर
ग्लास्गो। दिलीप महादु गावित ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में सातवें दिन भारत को तीसरा गोल्ड मेडल दिलाया। उन्होंने पुरुषों की पैरा टी47 कैटेगरी में100 मीटर रेस में 10.71 सेकेंड का समय लेकर पहला स्थान हासिल किया।

भारत के ही मोहम्मद बासिल ने 10.83 सेकेंड के साथ सिल्वर मेडल जीता, जबकि इंग्लैंड के केविन सैंटोस ने 10.85 सेकेंड के साथ ब्रॉन्ज अपने नाम किया। गावित से पहले भारत के लिए महिलाओं के पैरा शॉटपुट एफ57 इवेंट में शर्मिला धनकड़ और रविवार को वेटलिफ्टिंग के 48 किलोग्राम इवेंट में मीराबाई चानू गोल्ड मेडल जीत चुकी हैं।

इससे पहले सातवें दिन लॉन्ग जंपर मुरली श्रीशंकर ने 8.09 मीटर की छलांग लगाकर सिल्वर मेडल जीता। वह पुरुषों की लॉन्ग जंप में लगातार दो कॉमनवेल्थ गेम्स में सिल्वर जीतने वाले पहले भारतीय बने। इस इवेंट का गोल्ड जमैका के तजय गेल ने 8.15 मीटर की जंप के साथ जीता।

भारत फिर आठवें स्थान पर पहुंचा
छठे दिन के मुकाबले समाप्त होने के बाद भारत के खाते में 3 गोल्ड, 9 सिल्वर और 3 ब्रॉन्ज समेत कुल 15 मेडल हो गए हैं। इसके साथ ही भारतीय टीम मेडल टैली में आठवें स्थान पर पहुंच गई। भारत पांचवें दिन नौवें स्थान पर खिसक गया था। वहीं, ऑस्ट्रेलिया 47 गोल्ड समेत कुल 103 मेडल के साथ टॉप पर बना हुआ है। वहीं, बुधवार को छह मुक्केबाजों के सेमीफाइनल में पहुंचने से बॉक्सिंग टीम के लिए इस खेल में 10 मेडल पक्के हो गए हैं।

टी47 कैटेगरी में कौन से एथलीट भाग ले सकते हैं
टी47 कैटेगरी में उन ट्रैक एथलीट्स को शामिल किया जाता है, जिनके एक या दोनों हाथों में शारीरिक अक्षमता होती है। इसमें हाथ के किसी हिस्से की कमी या हाथ की कार्यक्षमता प्रभावित होने वाले खिलाड़ी प्रतिस्पर्धा करते हैं।

पेड़ से गिरने के बाद दिलीप का हाथ कांटना पड़ा था
दिलीप महादु गावित ने पुरुषों के 100 मीटर टी47 इवेंट में शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल जीता। उन्होंने फाइनल में 10.71 सेकेंड का समय निकालकर पहला स्थान हासिल किया। उन्होंने इस प्रदर्शन के साथ गेम्स रिकॉर्ड बनाया और सीजन का अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन भी किया। भारत के ही मोहम्मद बासिल मोर्सिंगनाकथ ने 10.83 सेकेंड के साथ सिल्वर मेडल हासिल किया। दिलीप गावित की सफलता के पीछे संघर्ष की लंबी कहानी है। महाराष्ट्र के नासिक के पास तोरण डोंगरी गांव के रहने वाले दिलीप किसान परिवार से हैं। बचपन में वह माता-पिता के साथ खेतों में काम करते थे। पांच-छह साल की उम्र में पेड़ से गिरने के कारण उनके दाहिने हाथ में गंभीर चोट लगी। समय पर इलाज नहीं मिलने से हाथ में गैंगरीन हो गया और कोहनी के नीचे से हाथ काटना पड़ा।