0 देश में प्रस्तावित 9030 मेगावाट डेटा सेंटर क्षमता से 2030 तक 4.33 लाख नौकरी पैदा होने का अनुमान है
0 महाराष्ट्र में सबसे अधिक 5.4 करोड़ वर्गफुट रेजिडेंशियल डिमांड बनने का अनुमान है
मुंबई। भारत में तेजी से बढ़ रहे डेटा सेंटर निवेश अगले कुछ वर्षों में रेजिडेंशियल रियल एस्टेट मार्केट के लिए नया ग्रोथ इंजन बन सकते हैं। डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पारंपरिक आईटी हब से आगे बढ़कर नए शहरी गलियारों को आकार दे रहा है। डेटा सेंटर से न केवल रेजिडेंशियल मार्केट में बड़ी डिमांड पैदा होगी, बल्कि इससे लाखों लोगों को नौकरियां भी मिल सकती हैं। तेजी से बढ़ रहे डेटा सेंटर का सबसे ज्यादा फायदा महाराष्ट्र को हो सकता है।
प्रॉपटेक कंपनी स्क्वायर यार्ड्स की नई रिपोर्ट के अनुसार, देश में प्रस्तावित 9030 मेगावाट डेटा सेंटर क्षमता से 2030 तक करीब 4.33 लाख रोजगार पैदा होंगे, जिसकी वजह से रियल एस्टेट सेक्टर में 19.5 करोड़ वर्गफुट रेजिडेंशियल स्पेस की डिमांड पैदा होने का अनुमान है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत दुनिया के करीब 20 फीसदी डिजिटल डेटा का उत्पादन करता है, लेकिन वैश्विक डेटा सेंटर क्षमता में उसकी हिस्सेदारी केवल 4 फीसदी है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), क्लाउड कंप्यूटिंग और एंटरप्राइज डिजिटलीकरण में तेजी के कारण डेटा सेंटर क्षमता में बड़े पैमाने पर विस्तार की संभावना है, जिससे रियल एस्टेट क्षेत्र को भी नई गति मिलेगी।
डेटा सेंटर तय करेंगे शहरों के विस्तार की दिशा
स्क्वायर यार्ड्स के को-फाउंडर एवं चीफ टेक्नॉलॉजी ऑफिसर विवेक अग्रवाल ने कहा कि अब तक भारत में रियल एस्टेट का विस्तार हाईवे, औद्योगिक कॉरिडोर, एयरपोर्ट व आईटी पार्कों के आसपास हुआ है और ये केंद्र सीधे तौर पर कम रोजगार पैदा करते हैं, लेकिन आने वाले वर्षों में डेटा सेंटर नए इंफ्रास्ट्रक्चर एंकर के रूप में शहरों के विस्तार की दिशा तय करेंगे। बिजली, फाइबर कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स में निवेश आसपास के क्षेत्रों में रेजिडेंशियल और कमर्शियल डेवलपमेंट को बढ़ावा देगा।
‘गोल्डन रिंग’ बनेगी नया हाउसिंग हॉटस्पॉट
रिपोर्ट में कहा गया है कि सबसे अधिक आवासीय विकास डेटा सेंटर परिसर के भीतर नहीं, बल्कि उसके 5 से 15 किलोमीटर के दायरे में होगा। इस ‘गोल्डन रिंग’ में बेहतर सड़क, बिजली, मिक्स्ड लैंड वाली परियोजनाएं, टाउनशिप, रिटेल सेंटर और सामाजिक सुविधाओं का विकास होगा, जिससे रेजिडेंशियल डिमांड लगातार बढ़ेगी। रिपोर्ट यह भी बताती है कि पारंपरिक कमर्शियल प्रोजेक्ट्स के विपरीत, डेटा सेंटर बिजली, फाइबर कनेक्टिविटी, लॉजिस्टिक्स, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और सहायक सेवाओं में निवेश आकर्षित करते हैं। इससे आसपास के क्षेत्रों का विकास होता है और वे धीरे-धीरे समृद्ध शहरी इकोसिस्टम में बदल जाते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, डेटा सेंटर केवल डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर एसेट्स नहीं हैं, बल्कि वे रेजिडेंशियल डिमांड, बुनियादी ढांचे में निवेश और शहरी विस्तार के प्रमुख उत्प्रेरक के रूप में उभर रहे हैं।
महाराष्ट्र सबसे आगे
राज्यों के स्तर पर महाराष्ट्र में सबसे अधिक 5.4 करोड़ वर्गफुट रेजिडेंशियल डिमांड बनने का अनुमान है। इसके बाद कर्नाटक (करीब 2.8 करोड़ वर्गफुट), आंध्र प्रदेश (2.33 करोड़ वर्गफुट), उत्तर प्रदेश (2.27 करोड़ वर्गफुट), तेलंगाना (2.16 करोड़ वर्गफुट) और तमिलनाडु (1.94 करोड़ वर्गफुट) का स्थान है। इन राज्यों में परिवहन, उपयोगिताओं और कमर्शियल एक्टिविटी के विकास के साथ रेजिडेंशियल रियल एस्टेट को बढ़ावा मिलने की संभावना है।रिपोर्ट के अनुसार, नोएडा, विशाखापत्तनम, हैदराबाद, बेंगलूरु, चेन्नई और गिफ्ट सिटी जैसे क्षेत्र डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश का प्रमुख केंद्र बन सकते हैं। स्क्वायर यार्ड्स की रिसर्च एवं इनसाइट्स प्रमुख सुनीता मिश्रा ने कहा कि रेजिडेंशियल डिमांड हमेशा उन क्षेत्रों की ओर बढ़ती है जहां रोजगार की बड़ी संभावनाएं होती हैं। इसलिए डेटा सेंटर भारत में रेजिडेंशियल डेवलपमेंट की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इसका लाभ केवल महानगरों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि टियर-2 और टियर-3 शहरों को भी मिलेगा।