Head Office

SAMVET SIKHAR BUILDING RAJBANDHA MAIDAN, RAIPUR 492001 - CHHATTISGARH

tranding

मुंबई। टाटा संस में 66 फीसदी हिस्सेदारी रखने वाला सबसे बड़ा शेयरधारक टाटा ट्रस्ट्स, एन चंद्रशेखरन को कंपनी के कार्यकारी चेयरमैन के तौर पर अगले पांच साल के लिए फिर से नियुक्त करने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे सकता है। चंद्रशेखरन का मौजूदा कार्यकाल फरवरी 2027 में खत्म होना है।

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने रविवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि वह टाटा विवाद में शामिल हो गए हैं। हालांकि, इस मामले में टाटा ट्रस्ट्स की ओर से अभी कोई बयान नहीं आया है।

सिंघवी बोले, शेयरधारकों के अधिकार नहीं छीने जा सकते
सिंघवी ने कहा कि शेयरधारक-मालिकों के मौलिक अधिकारों को इस तरह खत्म नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा, “शेयरधारकों के स्वामित्व अधिकारों को कमजोर करना भारत की सैकड़ों कंपनियों में कॉर्पोरेट गवर्नेंस के लिए गंभीर संकट पैदा कर सकता है। टाटा ट्रस्ट्स के भीतर लोकतांत्रिक तरीके से फैसले लेने की प्रक्रिया में बाधा डालना और बैठक बुलाने तक पर अचानक और पूरी तरह अनुचित रोक लगाना भी स्पष्ट रूप से कानूनी सवाल खड़े करता है। 
रतन टाटा के साथ साइरस मिस्त्री मामले में करीबी तौर पर काम कर चुके वरिष्ठ वकील ने कहा कि टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस के बीच 100 साल से ज्यादा पुराने संबंध को तोड़ना और दोनों को एक-दूसरे से अलग करना अकल्पनीय लगता है। मतदान में ट्रस्ट की सर्वसम्मति की लंबे समय से चली आ रही अनिवार्य शर्त और दशकों से बिना किसी आपत्ति के लागू किए जा रहे स्पष्ट वीटो अधिकार को नजरअंदाज करना सीधे तौर पर अनुचित प्रतीत होता है।

चंद्रशेखरन की तीसरी पारी पर मतभेद
17 सितंबर को टाटा संस के बोर्ड ने 4:1 के मत से चंद्रशेखरन (जिन्हें चंद्रा भी कहा जाता है) के तीसरे कार्यकाल के समर्थन वाले प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। विरोध में एकमात्र वोट नोएल टाटा का था। वह टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन और टाटा संस के बोर्ड में नामित निदेशकों में से एक हैं। बैठक के दौरान और उसके बाद नोएल टाटा ने टाटा संस के एसोसिएशन ऑफ आर्टिकल्स (AoA) में नामित निदेशकों के वीटो अधिकार और निर्णायक मत से जुड़े नियमों के कथित उल्लंघन का मुद्दा उठाया। टाटा ट्रस्ट्स ने भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़ से कानूनी राय ली थी। वहीं, टाटा संस ने वरिष्ठ वकीलों सुदीप्तो सरकार और बी. एन. श्रीकृष्ण समेत अन्य से सलाह ली। इन कानूनी राय में एसोसिएशन ऑफ आर्टिकल्स (AoA) की विभिन्न धाराओं की अलग-अलग व्याख्या की गई है।