0 मुद्रास्फीति के अनुमान को घटाकर 5 प्रतिशत किया
0 आर्थिक वृद्धि के अनुमान को 6.7 प्रतिशत बढ़ाया
0 अगले 2 महीने सस्ता लोन नहीं, ईएमआई भी नहीं घटेगी
मुंबई (ए)। भारतीय रिजर्व बैंक ने फौरी उधार के लिए अपनी नीतिगत ब्याज दर को वर्तमान घरेलू और वैश्विक हालात को देखते हुए 5.25 प्रतिशत पर बनाए रखा है और घरेलू अर्थव्यवस्था के हालात को पहले से बेहतर बताया है। इसका मतलब है कि नए लोन की तरह मौजूदा लोन और ईएमआई भी सस्ती नहीं होंगी।
केंद्रीय बैंक के देश की आर्थिक वृद्धि और खुदरा महंगाई दर के बारे में अपने जून के अनुमानों में सुधार करते हुए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में वृद्धि के अनुमान को 6.7 प्रतिशत और मुद्रास्फीति के अनुमान को घटा कर 5 प्रतिशत कर दिया है। रिजर्व बैंक ने जून में वृद्धि दर के अनुमान को पहले के 6.9 प्रतिशत से घटा कर 6.6 प्रतिशत और मुद्रास्फीति के अनुमान को बढ़ा कर 5.1 प्रतिशत कर दिया था। आरबीआई का यह फैसला अपनी बचत के पैसे बैंक में रखने वालों के लिए राहतभरा है, क्योंकि एफडी पर मिलने वाला ब्याज फिलहाल कम नहीं होगा। हालांकि, सभी बैंक आरबीआई के बताए मुताबिक ब्याज दरें एक जैसी नहीं रखते, वे अपनी लागत और बाजार को देखकर इसमें थोड़ा बदलाव कर सकते हैं।
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की द्वैमासिक बैठक के बाद यहां बुधवार को जारी वक्तव्य में कहा कि दुनियाभर में जारी उठापटक की वजह से महंगाई बढ़ी है। इसके चलते फिलहाल ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। वैश्विक आर्थिक दशाएं और भावनाएं अब भी पश्चिम एशिया और अन्य क्षेत्रों में तेजी से बनते बिगड़ते हालात की शिकार बनी हुई है। इनका भारत की घरेलू आर्थिक वृद्धि और मुद्रास्फीति की संभावनाओं पर असर पड़ा है पर देश की वृहद आर्थिक बुनियाद पहले से मजबूत हुई और इससे अर्थव्यवस्था को वैश्विक झटकों के बीच अपने रास्ते पर मजबूती से बढ़ने में मदद मिल रही है।
श्री मल्होत्रा ने कहा कि देश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का प्रवाह पहली तिमाही में मजबूत रहा है, जून और जुलाई में खास कर प्रतिभूति बाजार में विदेशी पोर्टफोलियाे निवेश से विदेशी पोर्टफोलियो निेवेश में भी वृद्धि दर्ज की गयी है। उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था में ऋण के प्रवाह की स्थिति मजबूत है।
आरबीआई गवर्नर ने शहरी सहकारी बैंक खोलने के लाइसेंस के लिए नियमों का मसौदा जारी करने की भी घोषणा की , साथ में ग्रामीण सहकारी बैंकों के लिए दिशा-निर्देशों का मसौदा जारी करने के निर्णय की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि देश में विदेशी मुद्रा भंडार की स्थिति मजबूत है और यह इस समय 10 महीने के आयात और 91 प्रतिशत विदेशी कर्ज के निपटान के लिए पर्याप्त स्तर पर है।
श्री मल्होत्रा ने कहा कि रिजर्ब बैंक विदेशी विनिमय दर को किसी खास स्तर पर रखने का लक्ष्य नहीं रखता लेकिन बाजार में सट्टोरिया गतिविधियों के कारण होने वाले किसी भी अनावश्यक उतार-चढ़ाव से निपटने के लिए उसके पास पर्याप्त मौद्रिक और नियामकीय हथियार उपलब्ध है। आरबीआई गवर्नर ने कहा कि रिजर्व बैंक आर्थिक वृद्धि की संभावनाओं को मजबूत करने और मूल्य स्थिरता के माध्यम से उपभोक्ताओं की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाता रहेगा।