नई दिल्ली। सत्ता पक्ष और विपक्ष के हंगामे के कारण शुक्रवार को राज्यसभा में प्रश्नकाल नहीं हो सका और महज चार मिनट के भीतर सदन की कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित करनी पड़ी।
एक बार के स्थगन के बाद दोबारा सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सदस्य खड़े होकर गृह मंत्री और प्रधानमंत्री के सदन में आने की मांग तथा अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले को लेकर नारेबाजी करने लगे।
हंगामे के बीच ही सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने रेल मंत्रालय से संबंधित प्रश्न पूछने के लिए समाजवादी पार्टी के रामजी लाल सुमन को पुकारा। जब पहला पूरक प्रश्न पूछने की बारी आयी तो श्री सुमन ने राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मुद्दा उठाना चाहा जिसकी सभापति ने अनुमति नहीं दी।
सत्ता पक्ष की ओर से सुस्मिता देव, तरुण चुग और अन्य सदस्य भी खड़े होकर विपक्ष की नारेबाजी का जवाब देते देखे गये। अन्नाद्रमुक के एम. थंबीदुरै के पूरक प्रश्न का रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने उत्तर भी दिया लेकिन शोर में कुछ भी साफ सुनाई नहीं दे रहा था। इस दौरान दोनों तरफ से नारेबाजी होती रही।
श्री राधाकृष्णन ने सत्ता पक्ष के सदस्यों से भी अपनी-अपनी सीट पर जाने का अनुरोध किया लेकिन उन पर भी कोई असर नहीं हुआ। हंगामा शांत ने होता देख उन्होंने सदन की कार्यवाही सोमवार 10 अगस्त पूर्वाह्न 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।
इससे पहले, इन्हीं मुद्दों पर हंगामे के कारण सदन में शून्यकाल भी बाधित रहा था। श्री राधाकृष्णन ने विधायी दस्तावेज सदन के पटल पर रखे जाने के बाद जैसे ही कार्यवाही शुरू की विपक्ष के सदस्य अपनी जगहों से उठकर जोर-जोर से बोलने लगे। सभापति ने सदस्यों से शांत रहने और अपनी सीटों पर लौटने की अपील करते हुए लोक महत्व के विषय रखने के लिए सदस्यों के नाम पुकारे।
विपक्षी सदस्यों के शांत नहीं होने पर उन्होंने नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को बोलने का मौका देते हुए पूछा कि क्या उनके पास कहने के लिए कोई नयी बात है क्योंकि वह हर रोज पुरानी बात को ही दोहराते हैं।
श्री खरगे ने कहा कि उन्हें कुछ नहीं कहना केवल एक अनुरोध करना है कि प्रधानमंत्री सदन में आयें और जवाब दें। उन्होंने कहा कि आसन की ओर से प्रधानमंत्री को सदन में आकर जवाब देने के लिए कहा गया था लेकिन वह आसन की बात नहीं मानकर सदन का अपमान कर रहे हैं। इस दौरान सत्ता पक्ष के सदस्यों ने जोरदार हंगामा किया।
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष सदन को भ्रमित कर रहे हैं। आसन की ओर से ऐसा कोई निर्देश नहीं दिया गया है। उन्होंने विपक्ष के रवैये की निंदा करते हुए कहा कि विपक्ष में बात सुनने की हिम्मत नहीं हैं।
इस बीच विपक्ष के सदस्यों की नारेबाजी जारी रहने पर सभापति ने सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।