नई दिल्ली। अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर विपक्षी दलों के भारी हंगामे के कारण मंगलवार को राज्यसभा में प्रश्नकाल बाधित रहा और छह मिनट के भीतर कार्यवाही अपराह्न दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी गयी।
एक बार के स्थगन के बाद दोपहर 12 बजे जैसे ही सदन की कार्यवाही शुरू हुई कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी दलों के सदस्य खड़े होकर राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मुद्दे को लेकर नारेबाजी करने लगे। नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कुछ कहना चाहा लेकिन सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने उन्हें अनुमति नहीं दी। उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष जो मुद्दा उठाना चाहते हैं वह राज्य का विषय है और सदन में इसकी अनुमति नहीं दी जा सकती।
श्री खरगे ने सभापति पर सरकार के दबाव में सदन का संचालन करने का आरोप लगाया जिस पर श्री राधाकृष्णन ने कहा कि सत्ता पक्ष के सदस्य भी झारखंड का मुद्दा उठाना चाहते थे लेकिन उन्हें भी उसकी अनुमति नहीं दी गयी है। उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा, "वे कभी मुझ पर दबाव नहीं डालते। मैं खरगे जी को छोड़कर किसी के दबाव में नहीं हूं।
इसके बाद सभापति ने प्रश्नकाल की कार्यवाही शुरू की और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय से संबंधित एक प्रश्न पूछा गया। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्रीपद येसो नाईक पूरक प्रश्नों के उत्तर दे ही रहे थे कि अचानक विपक्ष का शोर काफी बढ़ गया और मंत्री को बीच में रुकना पड़ा। सदन में अव्यवस्था की स्थिति देखते हुए श्री राधाकृष्णन ने सदन की कार्यवाही अपराह्न दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी।
इससे पहले पूर्वाह्न 11 बजे सदन में शून्यकाल भी बाधित रहा था। श्री खरगे ने उस समय राम मंदिर में चंदा चोरी का मुद्दा उठाना चाहा था, लेकिन सभापति ने सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी थी।
संसद के मौजूदा मानसून सत्र में पहले दिन से ही राम मंदिर में चंदा चोरी, दिल्ली में प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई और अन्य मुद्दों को लेकर विपक्ष हंगामा करता रहा है। इस कारण एक भी दिन शून्यकाल और प्रश्नकाल की कार्रवाई सुचारू ढंग से नहीं चल सकी है।