0 लंबी न्यायिक हिरासत को बनाया आधार
नई दिल्ली/रायपुर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (सीजीपीएससी) के कथित घोटाले से जुड़े मामले में तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने मंगलवार (1 सितंबर) को उन्हें नियमित जमानत देने का आदेश दिया है। आरती वासनिक के साथ तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक ललित गनवीर को भी नियमित जमानत दी गई है।
मामले की सुनवाई जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने की। तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक की ओर से सीनियर एडवोकेट पीबी सुरेश और एडवोकेट हर्षवर्धन परगनिहा ने पक्ष रखा।
1 साल से अधिक समय से जेल में थीं वासनिक
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान आरती वासनिक की ओर से बताया गया कि वह एक साल से अधिक समय से न्यायिक हिरासत में हैं। मामले में जांच एजेंसी चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। वहीं, मुकदमे में 100 से अधिक गवाहों के बयान दर्ज किए जाने हैं। बचाव पक्ष ने दलील दी कि मुकदमे में देरी आरोपी की वजह से नहीं हो रही है, बल्कि अभियोजन की स्वीकृति नहीं मिलने के कारण सुनवाई आगे नहीं बढ़ पा रही है।
सीबीआई ने प्रत्यक्ष भूमिका का आरोप नहीं लगाया
सुप्रीम कोर्ट में दलील दी गई कि सीबीआई ने आरती वासनिक पर मामले में किसी प्रत्यक्ष भूमिका का आरोप नहीं लगाया है। वहीं, कथित तौर पर मामले से लाभान्वित अभ्यर्थियों की नियुक्तियों पर भी फिलहाल रोक लगी हुई है। इन परिस्थितियों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आरती वासनिक और ललित गनवीर को नियमित जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया।