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0 2 पैरा के बाद रोक दिया गया था  
0 विधान परिषद में भी भाजपा सदस्यों ने पूरा गीत गाया

बेंगलुरु। कर्नाटक विधानसभा के 3 दिन के स्पेशल सेशन के पहले दिन सोमवार को वंदे मातरम को लेकर विवाद हो गया। विधानसभा में वंदे मातरम की रिकॉर्डिंग सिर्फ दो पैराग्राफ के बाद रोक दी गई।

इसके बाद भाजपा विधायकों ने विरोध किया और बाकी के 4 पैरा खुद गाए। विधान परिषद में भी भाजपा सदस्यों ने पूरा गीत गाया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। कर्नाटक सरकार ने सूखे की स्थिति और पश्चिमी घाट से जुड़ी कस्तूरीरंगन रिपोर्ट पर चर्चा के लिए तीन दिन का विशेष सत्र बुलाया है।

राज्य सरकार ने 2 पैरा का आदेश दिया है
कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने सरकारी कार्यक्रमों में वंदे मातरम के पहले दो पैरा गाने का आदेश दिया है। इसी के तहत विधानसभा और विधान परिषद में रिकॉर्डिंग दो पैरा के बाद रोक दी गई थी। हालांकि, राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या राज्यपाल की मौजूदगी वाले कार्यक्रमों में यह नियम लागू नहीं होगा।

कांग्रेस ने तय किया था- वंदे मातरम के दो पैरा गाए जाएंगे
इसी साल 9 जुलाई को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने निर्देश दिया था कि सभी सरकारी कार्यक्रमों में राष्ट्रगान ‘जन-गण-मन’ के साथ ‘वंदे मातरम’ के सभी 6 पद गाए जाएं। इसके बाद 19 अगस्त को कांग्रेस वर्किंग कमेटी ने वंदे मातरम को लेकर 1937 के अपने प्रस्ताव का पालन करने का फैसला किया। इस प्रस्ताव के तहत पार्टी कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत के केवल 2 पैरा जाते हैं।

2026 वंदे मातरम के अपमान पर कानून बना
24 जनवरी 1950 को संविधान सभा ने 'वंदे मातरम' को राष्ट्रीय गीत घोषित किया था। लंबे समय तक इसके अपमान पर कोई अलग कानून नहीं था, लेकिन 2026 के मानसून सत्र में केंद्र सरकार ने 'राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम' बनाया। इस कानून के तहत 'वंदे मातरम' के गायन को जानबूझकर रोकने, इसमें बाधा डालने या इसका सार्वजनिक अपमान करने को दंडनीय अपराध माना गया है। ऐसा करने पर 3 साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों की सजा का प्रावधान है। इस बार 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान पहली बार लाल किले की प्राचीर से 'वंदे मातरम' के पूरे 6 छंद गाए गए।