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0 एडीआर रिपोर्ट में खुलासा, नगालैंड और बंगाल में सबसे ज्यादा मामले
नई दिल्ली। देश में 2022 से 2026 के बीच चुनाव जीतने के बाद 111 सांसदों और विधायकों ने पार्टी बदली। इनमें 26 लोकसभा सांसद, 7 राज्यसभा सांसद और 78 विधायक शामिल हैं। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) और नेशनल इलेक्शन वॉच की रिपोर्ट में यह दावा किया गया है।

इसके मुताबिक, पार्टी बदलने के सबसे ज्यादा मामले नगालैंड और पश्चिम बंगाल में सामने आए। नगालैंड में 32 विधायक एनपीएफ में शामिल हुए। इनमें से 25 विधायक पहले एनडीपीपी के टिकट पर चुने गए थे। दूसरी पार्टियों में शामिल होने वाले सांसदों-विधायकों में 29 यानी 26% भाजपा में गए। वहीं कांग्रेस में 9 यानी 8% सांसद-विधायक शामिल हुए। रिपोर्ट में विधानसभा चुनाव और उपचुनाव के दौरान हुए पार्टी बदलावों को शामिल किया गया है। इसमें दलबदल, पार्टी विलय और इस्तीफे के बाद उपचुनाव जीतने जैसे मामले भी शामिल हैं।

बंगाल में 20 लोकसभा सांसदों ने पार्टी बदली
पश्चिम बंगाल में पार्टी बदलने के 20 मामले लोकसभा सांसदों के हैं। ये सभी एआईटीसी   के टिकट पर चुनाव जीते थे और बाद में एनसीपीआई में चले गए। इन सांसदों ने पार्टी में विलय का दावा किया है। अब लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को फैसला लेना है कि विलय वैध है या नहीं।

तेलंगाना में 9 विधायक कांग्रेस में गए, महाराष्ट्र में 6 सांसद शिंदे गुट में शामिल हुए
तेलंगाना में 9 विधायक पार्टी बदलने वालों में शामिल हैं। ये सभी बीआरएस से चुने गए थे और कांग्रेस में गए। गोवा में 8 कांग्रेस विधायकों के भाजपा में जाने के मामले सामने आए।महाराष्ट्र में 6 लोकसभा सांसदों ने उद्धव ठाकरे की शिवसेना से एकनाथ शिंदे की शिवसेना का रुख किया।

एनडीपीपी से सबसे ज्यादा नेता बाहर गए
जिन पार्टियों के नेताओं ने पार्टी बदली, उनमें सबसे ज्यादा एनडीपीपी के 25, तृणमूल कांग्रेस के 20 और कांग्रेस के 19 नेता शामिल हैं। इसके बाद बीआरएस के 9, आप और एनसीपी के 7-7, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के 6, जेडी (यू) के 5 और एनपीपी के 4 नेता रहे। एनडीपीपी, एआईटीसी और कांग्रेस से पार्टी बदलने वाले नेताओं की संख्या 64 यानी कुल मामलों की 58% रही।

एनपीएफ में 32 और भाजपा में 29 नेता शामिल हुए
दूसरी पार्टियों से सबसे ज्यादा नेता एनपीएफ में 32 शामिल हुए। भाजपा में 29, एनसीपीआई में 20, कांग्रेस में 9, शिवसेना में 8, एनपीपी में 6 और पीपुल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल में 4 नेता शामिल हुए। एनपीएफ, भाजपा और एनसीपीआई में शामिल होने वाले नेताओं की संख्या 81 यानी कुल मामलों की 73% रही।

एडीआर ने दलबदल कानून में बदलाव सुझाए
एडीआर ने कहा कि कुछ राज्यों में विधायकों के दलबदल को सरकार गिरने से भी जोड़ा गया। हालांकि, संगठन ने साफ किया कि उसका आंकड़ा पूरी तरह अंतिम नहीं है, क्योंकि नेताओं के पार्टी बदलने का कोई व्यवस्थित और आसानी से उपलब्ध आधिकारिक डेटाबेस नहीं है। एडीआर ने सांसदों और विधायकों की अयोग्यता से जुड़ी याचिकाओं पर फैसला लेने की व्यवस्था में बदलाव का सुझाव दिया है। इसके तहत सांसदों के मामले में यह अधिकार राष्ट्रपति और विधायकों के मामले में राज्यपाल को देने की सिफारिश की गई है, जिसमें चुनाव आयोग की सलाह ली जाए। संगठन ने फैसले के लिए समय सीमा तय करने और दोबारा चुनाव जीतने तक दलबदल करने वालों को सार्वजनिक पद संभालने से रोकने का भी सुझाव दिया है।