नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सरकार के प्रमुख के रूप में लगातार 25 वर्ष के कार्यकाल पर बधाई प्रस्ताव पारित किया है।
प्रस्ताव में गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल से लेकर प्रधानमंत्री के रूप में नेतृत्व तक की यात्रा को 'राष्ट्र प्रथम' और 'नागरिक प्रथम' की सोच से जोड़ा गया है। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में यह प्रस्ताव पारित किया गया। बैठक के बाद केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्वनी वैष्णव ने संवाददाताओं को बताया कि इस प्रस्ताव में कहा गया है कि गुजरात में तीन बड़े जनादेश और लगातार तीन लोकसभा चुनावों में मिले समर्थन ने प्रधानमंत्री मोदी के प्रति जनता के भरोसे को दिखाया है।
उन्होंने कहा कि प्रस्ताव में श्री मोदी के नेतृत्व की दस प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख किया गया है। प्रस्ताव के अनुसार, गुजरात में नागरिकों की शिकायतें सुनने की व्यवस्था स्वागत' बाद में केंद्र की ' प्रगति' पहल के लिए प्रेरणा बनी। इसी तरह गुजरात की ज्योतिग्राम योजना के अनुभव को देशभर में आगे बढ़ाया गया। गरीबों के लिए काम को प्रस्ताव में उनके व्यक्तिगत अनुभवों से जोड़ा गया है। इसमें करीब 60 करोड़ जनधन खाते, 4 करोड़ से अधिक आवास और 25 करोड़ लोगों के गरीबी से बाहर आने का उल्लेख किया गया है।
महिला और युवा सशक्तीकरण के तहत करीब 3.5 करोड़ महिलाओं के लखपति दीदी बनने, महिला आरक्षण कानून, स्टार्टअप, कौशल और शिक्षा सुधारों का जिक्र है। पीएम-किसान के तहत 4 लाख करोड़ रुपए से अधिक के हस्तांतरण और पीएम-जनमन के जरिए विशेष रूप से कमजोर आदिवासी समुदायों तक सहायता पहुंचाने की बात भी कही गयी है। प्रस्ताव में जीएसटी, कल्याणकारी योजनाओं के वितरण में सुधार और पुराने औपनिवेशिक कानूनों को बदलने को सुधारों के प्रति प्रतिबद्धता का उदाहरण बताया गया है।
सार्वजनिक पूंजीगत खर्च बढ़ने, राजमार्गों के विस्तार, रेलवे विद्युतीकरण और इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन में वृद्धि को आत्मनिर्भर भारत की दिशा में उठाए गए कदमों के रूप में रखा गया है। तकनीक के क्षेत्र में जनधन-आधार-मोबाइल, यूपीआई, स्वदेशी कोविड टीकों और चंद्रयान-3 की उपलब्धियों का उल्लेख किया गया है। अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम तकनीक और जैव-प्रौद्योगिकी में काम को भी प्रस्ताव का हिस्सा बनाया गया है। कोविड और पश्चिम एशिया संकट जैसे मुश्किल समय में नेतृत्व, 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक, 2019 के बालाकोट एयर स्ट्राइक और 2025 के ऑपरेशन सिंदूर को राष्ट्रीय सुरक्षा के संदर्भ में रेखांकित किया गया है।
अनुच्छेद 370 हटाने, वन रैंक वन पेंशन, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ का पद बनाने, माओवादी हिंसा के खिलाफ कार्रवाई और पूर्वोत्तर में शांति प्रयासों का भी प्रस्ताव में उल्लेख है। विदेश नीति के संदर्भ में प्रस्ताव में जी 20 और ब्रिक्स में सहमति बनाने, ग्लोबल साउथ की आवाज उठाने, अफ्रीकी संघ को जी 20 में शामिल कराने और वैक्सीन मैत्री का जिक्र किया गया है। इसमें कहा गया है कि 36 देशों से मिले सम्मान प्रधानमंत्री मोदी और भारत के प्रति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बने सम्मान को दर्शाते हैं।
प्रस्ताव के अंत में विकास, सांस्कृतिक विरासत और पर्यावरणीय जिम्मेदारी को एक साथ रखने की बात कही गयी है। इसमें योग, मोटे अनाज, काशी विश्वनाथ धाम और रामलला की प्राण प्रतिष्ठा का उल्लेख करते हुए 2047 तक समृद्ध, आत्मनिर्भर और विकसित भारत के लक्ष्य के प्रति सामूहिक प्रयास की प्रतिबद्धता दोहरायी गयी है।