Head Office

SAMVET SIKHAR BUILDING RAJBANDHA MAIDAN, RAIPUR 492001 - CHHATTISGARH

tranding

नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा है कि विज्ञान, राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक गतिविधियों के विभिन्न क्षेत्रों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का इस्तेमाल बढ रहा है लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े फैसले पूरी तरह एआई के भरोसे नहीं छोड़े जा सकते।

राष्ट्रपति ने मंगलवार को यहां राष्ट्रपति भवन में 66वें राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय पाठ्यक्रम के शिक्षकों और प्रतिभागियों से मुलाकात की। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि विज्ञान, राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक गतिविधियों के विभिन्न क्षेत्रों में ए आई का इस्तेमाल बढ रहा है लेकिन निर्णय लेने का काम केवल इस प्रौद्योगिकी के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता।

उन्होंने बदलती सुरक्षा चुनौतियों के बीच प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल में संतुलित नजरिया अपनाने और तेजी से फैसले लेने की जरूरत पर जोर दिया। श्रीमती मुर्मु ने कहा कि सुरक्षा और प्रौद्योगिकी का क्षेत्र तेजी से बदल रहा है। साइबर सुरक्षा, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और जैव प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में युद्ध के नए तरीके सामने आ रहे हैं। ऐसे में बेहतर तैयारी, दूरदर्शिता और बदलते हालात के अनुसार खुद को ढालने की क्षमता जरूरी है।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा अब केवल सैन्य ताकत तक सीमित नहीं है। नये विचारों और प्रौद्योगिकी को व्यावहारिक समाधान में बदलने के लिए वैज्ञानिक संस्थानों और सशस्त्र बलों के बीच करीबी सहयोग जरूरी है। उन्होंने कम लागत वाली ऐसी प्रौद्योगिकी के महत्व पर भी जोर दिया, जो उन्नत रक्षा प्रणालियों की मदद कर सकें और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल सुनिश्चित करें। इस संदर्भ में उन्होंने अनुसंधान, विकास और नवाचार योजना जैसी सरकारी पहलों का उल्लेख किया।

राष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अर्थव्यवस्था का मजबूत होना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था ने बाहरी कारणों से पैदा हुई बाधाओं का सामना करने की क्षमता दिखायी है और इसके साथ ही भारत ने रणनीतिक फैसले लेने की अपनी स्वतंत्रता भी बनाये रखी है।