Head Office

SAMVET SIKHAR BUILDING RAJBANDHA MAIDAN, RAIPUR 492001 - CHHATTISGARH

tranding

0 11.40 लाख रेलवे कर्मचारियों को 78 दिन का दिवाली बोनस 
0 3 पेंशन योजनाओं से इंदिरा गांधी नाम हटा 
0 प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में यह निर्णय लिया गया

नई दिल्ली। सरकार ने राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम का नाम बदलकर 'प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना' करने के साथ ही दिव्यांगजन पेंशन के लिए दिव्यांगता पात्रता की सीमा 80 से घटाकर विकलांगता 40 प्रतिशत तथा न्यूनतम उम्र की सीमा समाप्त कर दी है। 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में यह निर्णय लिया गया। इसके साथ ही केंद्र सरकार ने दिवाली से पहले रेलवे के करीब 11.40 लाख कर्मचारियों को 78 दिन का बोनस देने की मंजूरी दी है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के मुताबिक, इस पर करीब 2,009 करोड़ खर्च होंगे।

बुधवार को कैबिनेट बैठक में यह फैसला लिया गया। इसके अलावा, सरकार ने तीन पेंशन योजनाओं से इंदिरा गांधी का नाम हटाकर उनमें प्रधानमंत्री शब्द जोड़ने का फैसला किया है। कैबिनेट बैठक के बाद निर्णय की जानकारी देते हुए सूचना प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने  संवाददाता सम्मेलन में बताया कि कैबिनेट ने राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (एनएसएपी) को वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक अगले 5 वर्षों के लिए जारी रखने को मंजूरी दे दी है। इस योजना के लिए कुल 53,428 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। कैबिनेट के फैसले के तहत योजना और इसकी विभिन्न उप-योजनाओं के नाम बदले जाएंगे। दिव्यांगजन पेंशन योजना में पात्रता मानदंड और सहायता राशि में संशोधन किया जाएगा, जबकि वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन और पारिवारिक लाभ योजनाएं मौजूदा स्वरूप में जारी रहेंगी।

सरकार के अनुसार, इस फैसले से देश के सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के करीब 3.20 करोड़ लाभार्थियों को लाभ मिलेगा। ग्रामीण विकास विभाग अगले तीन महीनों के भीतर संशोधित दिशा-निर्देश जारी करेगा और उन्हें लागू किया जाएगा।

राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम का नाम बदला
कैबिनेट की मंजूरी के बाद राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम का नाम बदलकर ‘प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना’ किया जाएगा, जिसके तहत मौजूदा इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना का नाम प्रधानमंत्री वृद्धावस्था पेंशन योजना, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना का नाम प्रधानमंत्री विधवा पेंशन योजना, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय दिव्यांग पेंशन योजना का नाम प्रधानमंत्री दिव्यांगजन पेंशन योजना और राष्ट्रीय परिवार लाभ योजना का नाम प्रधानमंत्री परिवार लाभ योजना रखा जाएगा।

कैबिनेट ने दिव्यांगजन पेंशन योजना में महत्वपूर्ण बदलावों को मंजूरी दी
बयान के अनुसार, कैबिनेट ने दिव्यांगजन पेंशन योजना में महत्वपूर्ण बदलावों को मंजूरी दी है। अब 0 से 79 वर्ष तक के दिव्यांग लाभार्थियों को 375 रुपए प्रति माह और 80 वर्ष या उससे अधिक आयु के लाभार्थियों को 625 रुपए प्रति माह की सहायता दी जाएगी। इसके साथ ही पात्रता मानदंडों में भी राहत दी गई है। अभी तक योजना का लाभ पाने के लिए 80 प्रतिशत दिव्यांगता जरूरी थी, जिसे घटाकर 40 प्रतिशत बेंचमार्क दिव्यांगता कर दिया गया है। इसके अलावा, दिव्यांग पेंशन के लिए न्यूनतम आयु की शर्त भी समाप्त कर दी गई है और अब जन्म से दिव्यांग व्यक्ति भी इस योजना के दायरे में आ सकेंगे।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि वृद्धावस्था पेंशन योजना, विधवा पेंशन योजना और परिवार लाभ योजना वर्तमान स्वरूप में ही जारी रहेंगी। इन योजनाओं के पात्र लाभार्थियों को पहले की तरह सहायता मिलती रहेगी।

केंद्र सरकार इस योजना के तहत 100 प्रतिशत केंद्रीय सहायता देती है
कैबिनेट ने बयान में आगे बताया है कि राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम की शुरुआत 15 अगस्त 1995 को की गई थी, जिसका उद्देश्य संविधान के अनुच्छेद 41 में निहित राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांतों के तहत गरीब और जरूरतमंद परिवारों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना था। केंद्र सरकार इस योजना के तहत 100 प्रतिशत केंद्रीय सहायता देती है ताकि देशभर में पात्र लाभार्थियों को समान रूप से सहायता उपलब्ध हो सके। सरकार ने बताया कि दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम, 2016 के लागू होने के बाद दिव्यांग पेंशन की पात्रता को ‘बेंचमार्क दिव्यांगता’ यानी 40 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांगता से जोड़ना आवश्यक हो गया था। इसी कानून में यह भी प्रावधान है कि दिव्यांगजनों को मिलने वाली सहायता समान श्रेणी की अन्य योजनाओं की तुलना में कम से कम 25 प्रतिशत अधिक होनी चाहिए। इसी को ध्यान में रखते हुए नई व्यवस्था को मंजूरी दी गई है।

रेलवे कर्मचारियों को 17,951 तक बोनस
रेलवे कर्मचारियों को मिलने वाले प्रोडक्टिविटी लिंक्ड बोनस (पीएलबी) की गणना के लिए अधिकतम मासिक वेतन सीमा 7000 तय की गई है। इस आधार पर 78 दिन के बोनस की अधिकतम रकम 17,951 बनती है।

बोनस का कैलकुलेशन:
7,000 × 12 × 78 ÷ 365 = 17,951
यह अधिकतम गणना की रकम है। कर्मचारियों को मिलने वाला वास्तविक बोनस उनकी पात्रता और लागू नियमों के आधार पर अलग हो सकता है। रेलवे के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में 1,670 मिलियन टन माल की ढुलाई की गई, जो उस साल का रिकॉर्ड था। इस दौरान रेलवे से करीब 7.41 अरब यात्रियों ने सफर किया। रेल मंत्री ने कहा कि बोनस का मकसद कर्मचारियों को उनकी मेहनत के लिए प्रोत्साहित करना और रेलवे के कामकाज को बेहतर बनाने के लिए प्रेरित करना है।