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0 साइबर सुरक्षा की समीक्षा करेगी सरकार
0 सीईआरटी-आईएन ने कंपनियों को चेतावनी जारी की
नई दिल्ली। विगत कुछ दिनों में घटित साइबर सुरक्षा से जुड़ी विभिन्न घटनाओं के बाद भारतीय कंपनियों को हुए संभावित नुकसान का आकलन करने के लिए सरकार जल्द ही उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक कर सकती है। सूत्रों के मुताबिक बैठक में सर्वर-साइड प्रोग्रामिंग भाषा ‘पीएचपी’ में सामने आई सुरक्षा कमजोरियों के प्रभाव, ई-मुद्रा द्वारा जारी वेब सुरक्षा प्रमाणपत्रों की निजी कुंजियों) के लीक होने और भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया दल (सर्ट-इन) द्वारा करीब एक सप्ताह पहले जारी उस सूचना पर चर्चा होने की संभावना है जिसमें कहा गया था कि आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) से संचालित एजेंट भारतीय कंपनियों के लाइव नेटवर्क तक पहुंच गए थे।

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया, ‘इन सभी घटनाओं के बाद हमने एक बड़ी चिंता यह देखी है कि हमारे उद्यमों, विशेषकर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) की साइबर सुरक्षा तैयारियां और हमलों से निपटने की क्षमता बहुत कमजोर है। कुछ मामलों में लॉगिन संबंधी जानकारी (क्रेडेंशियल) सादे टेक्स्ट में रखी जाती है और अधिकांश पासवर्ड अब तक वही हैं जो सॉफ्टवेयर इंस्टॉल करते समय डिफॉल्ट रूप से दिए गए थे।’


इस सप्ताह की शुरुआत में सर्ट-इन की एक चेतावनी में बताया गया था कि अत्याधुनिक एआई मॉडल उपलब्ध कराने वाली कुछ सेवा प्रदाता कंपनियों ने सर्ट-इन और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को सूचित किया था कि उनके कुछ अत्याधुनिक एआई मॉडल और एजेंट ‘अनुसंधान एवं मूल्यांकन गतिविधियों के दौरान’ कई भारतीय संगठनों के लाइव सिस्टम तक पहुंच गए थे। सर्ट-इन ने उस समय कहा था, ‘दर्ज की गई गतिविधियों में कारोबारी रिकॉर्ड पढ़ना शामिल था। इनमें व्यक्तिगत डेटा और गोपनीय सामग्री भी थी।

यह काम उन लॉगिन जानकारियों और कनेक्शन सेटिंग्स के माध्यम से किया गया जो एप्लिकेशन के कॉन्फिगरेशन, सार्वजनिक कोड रिपॉजिटरी और क्लाउड सेवाओं में जरूरत से ज्यादा अनुमतियों के कारण उजागर हो गई थीं।’

एक अन्य परामर्श में सर्ट-इन ने फिर चेतावनी दी कि ई-मुद्रा के डिजिटल प्रमाणपत्रों में इस्तेमाल की गई निजी कुंजियां (प्राइवेट कीज) ‘अपर्याप्त क्रिप्टोग्राफिक अनियमितता के साथ तैयार की गई थीं’ जिसके कारण उनकी सुरक्षा से समझौता हुआ। बेंगलुरु स्थित सरकारी एजेंसी ई-मुद्रा की स्थापना 2008 में हुई थी और अब तक वह 6 करोड़ से अधिक डिजिटल प्रमाणपत्र जारी कर चुकी है।

ई-मुद्रा जैसी एजेंसियों द्वारा जारी प्रमाणपत्रों के आधार पर वेब ब्राउजर यह जांचते हैं कि कोई वेबसाइट भरोसेमंद है या नहीं। इसके बाद वे उसी के अनुसार उपयोगकर्ताओं को उस वेबसाइट तक पहुंचने की अनुमति देते हैं।

सर्वर-साइड प्रोग्रामिंग भाषा पीएचपी में पाई गई सुरक्षा कमजोरियों के कारण वैश्विक स्तर पर सेवाएं बाधित होने के बाद कल देर रात सर्ट-इन ने एक और परामर्श जारी किया। इसमें सभी भारतीय कंपनियों और उद्यमों से पीएचपी में सामने आई सुरक्षा खामियों को दूर करने के लिए जारी पैच (सॉफ्टवेयर अपडेट) इंस्टॉल करने को कहा गया।

कैस्परस्की के एशिया-प्रशांत क्षेत्र के अनुसंधान केंद्र के प्रमुख सर्गेई लोजकिन ने कहा, ‘व्यावहारिक रूप से हमलावर प्रभावित सिस्टम पर दुर्भावनापूर्ण कोड चला सकते हैं। इसमें वेब शेल्स इंस्टॉल करना भी शामिल है जिसके जरिए वे कमजोर सर्वरों पर नियंत्रण हासिल कर सकते हैं। इस तरह की घटनाएं वैश्विक साइबर जगत में तेजी से गंभीर रूप ले सकती हैं, खासकर तब जब उनमें ऐसी तकनीकों का इस्तेमाल हो रहा हो जो बड़े पैमाने पर तैनात हैं।’

साइबर सुरक्षा कंपनी सोफोस में खतरे से जुड़ी खुफिया जानकारी इकाई के उपाध्यक्ष डॉन स्मिथ ने कहा, ‘पीएचपी का इस्तेमाल व्यापक रूप से होता है। यह सार्वजनिक वेबसाइटों, कंटेंट मैनेजमेंट सिस्टम, होस्टिंग प्लेटफॉर्म और तीसरे पक्ष के उत्पादों के पीछे काम कर सकता है। कई बार इसका इस्तेमाल करने वाले संगठन को भी इसकी मौजूदगी का स्पष्ट पता नहीं होता।’

63सैट्स साइबरटेक के संयुक्त प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्रीनिवास एल. ने कहा कि इसके अलावा, संगठनों को अपने सभी सिस्टम की पूरी सूची तैयार करनी चाहिए और पीएचपी को उन नवीनतम संस्करणों में अपडेट करना चाहिए, जिनमें सुरक्षा खामियों को दूर करने के लिए पूरी तरह जांचे-परखे पैच उपलब्ध हैं।